श्वेता पुरोहित : 7/8 सितम्बर, 2025, रविवार को खग्रास चन्द्रग्रहण पड़ रहा है।
यह ग्रहण भाद्रपद पूर्णिमा को 7 एवं 8 सितम्बर, 2025 ई. की मध्यगत रात्रि को सम्पूर्ण भारत में खग्रास रूप में दिखाई देगा। यह खग्रास चन्द्रग्रहण भाद्रपद पूर्णिमा, रविवार, तदनुसार 7/8 सितं., 2025 ई. को यूरोप, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, पश्चिमी उत्तरी-पूर्वी अमेरिका एवम् पैसिफिक, अटलांटिक, अंटार्कटिक एवं हिन्द महासागर में खग्रासरूप में दिखाई देगा। यह ग्रहण म्यांमार, चाईना, नाईजीरिया, इजिप्ट, थाईलैण्ड, इण्डोनेशिया, जर्मनी, रसिया, उ. कोरिया, ईटली, बंगलादेश, हंगरी, फिलीपींस, ग्रीस, सिंगापुर, रोमानिया, बुल्गारिया, जापान, टर्की, बैल्जियम, नीदरलैण्डस, फ्रांस, यू. के., स्पेन और भारत के अधिकतर भागों में खग्रासरूप में दिखाई देगा। इसके अतिरिक्त अमेरिका के कुछ भाग, पुतर्गाल और ब्राजील में यह ग्रहण आंशिक रूप में भी देखा जा सकेगा।
इस ग्रहण का स्पर्श-मोक्षादि काल (भा.स्टैं.टा.) इस प्रकार होगा-
ग्रहण स्पर्श (प्रारम्भ):
21-57 (रात्रि में 9:57 बजे)
खग्रास प्रारम्भ:
23-01 (रात्रि में 11:01 बजे)
ग्रहण मध्य:
23-42 (रात्रि में 11:42 बजे)
खग्रास समाप्त:
24-23 (रात्रि में 12:23 बजे)
ग्रहण समाप्त:
25-26 (रात्रि में 1:26 बजे)
7/8 सितम्बर, 2025 ई. की मध्यगत रात्रि
(भा. स्टैं.टा. के अनुसार )
ग्रहण की अवधि = 3 घं. 29 मि. ग्रासमान = 1.362 प्रतिशत
भारत में जब 7 सितम्बर, 2025 ई. की रात्रि 9 बजकर, 57 मिनट पर चन्द्रग्रहण शुरु होगा अथवा 20घं.-58मिं. पर चन्द्र मालिन्य आरम्भहोगा, उस समय से बहुत पहले ही सम्पूर्ण भारत में चन्द्र-उदय हो चुका होगा। भारत के सभी नगरों/ग्रामों में 7 सितम्बर को सायं 6:00 से 7:00 तक चन्द्रोदय हो जाएगा तथा यह खग्रास चन्द्रग्रहण 7 सितम्बर की रात्रि 21 घं.-57 मिं. से प्रारम्भ होकर रात्रि 25-26 मिं. (अर्थात् 1 बजकर 26 मिनट) पर समाप्त (मोक्ष) होगा। भारत के सभी नगरों में इसका प्रारम्भ, मध्य तथा मोक्ष रूप देखा जा सकेगा।
इस ग्रहण में चन्द्रबिम्ब पश्चिम-दक्षिण की ओर से ग्रसित होकर उत्तर-पूर्व की ओर से मुक्त होगा। इस ग्रहण की स्पर्श-मोक्ष की दिशाएं, परमग्रासमान तथा विश्व में कहाँ-कहाँ दिखाई देगा, आगामी पृष्ठ- पर दिए गए चित्र में देखिए।
भारत के अतिरिक्तं दिखाई देने वाले क्षेत्र (देश):
भारत के अतिरिक्त यह ग्रहण सम्पूर्ण यूरोप, सम्पूर्ण एशिया के देशों, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैण्ड, अफ्रीका, पश्चिमी उत्तरी-अमेरिका तथा दक्षिणी अमरीका के पूर्वी क्षेत्रों (केवल ब्राज़ील के पूर्वी क्षेत्रों) में दिखाई देगा।
यूरोप के लगभग सभी देशों (इंग्लैण्ड, इटली, जर्मनी, फ्रांस आदि), अफ्रीका के अधिकतर देशों में इस ग्रहण का प्रारम्भ चन्द्रोदय के बाद देखा जा सकेगा अर्थात् जब इन क्षेत्रों में चन्द्रोदय होगा, तब ग्रहण प्रारम्भ हो चुका होगा। (ग्रस्तोदय रूप में दिखाई देगा)
जबकि दक्षिणी-पूर्वी ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैण्ड, फिजी आदि में इस ग्रहण की समाप्ति चन्द्रास्त के समय देखी जा सकेगी अर्थात् जब ग्रहण घटित हो रहा होगा, तो चन्द्रास्त हो जाएगा। (8 सितम्बर की सुबह) – (ग्रस्तास्त होगा।)
भारत तथा सम्पूर्ण एशिया में इस ग्रहण का दृश्य प्रारम्भ से समाप्ति तक देखा जा सकेगा।
ग्रहण का सूतक-इस ग्रहण का सूतक 7 सितम्बर, 2025 ई. को दोपहर 12घं.-57मिं. (भा.स्टैं.टा.) पर प्रारम्भ हो जाएगा।
ग्रहण-काल तथा बाद में क्या करें-क्या न करें ?
ग्रहण के सूतक तथा ग्रहणकाल में स्नान, दान, जप-पाठ, मन्त्र, स्तोत्र-पाठ, मन्त्र-सिद्धि, तीर्थस्नान, ध्यान, हवनादि शुभ कृत्यों का सम्पादन करना कल्याणकारी होता है। धर्मनिष्ठ लोगों को ग्रहणकाल अथवा 7 सितम्बर को सूर्यास्त से पूर्व ही अपनी राश्यानुसार अन्न, जल, चावल, सफेद वस्त्र, फल (ऋतु अनुसार) आदि अथवा ब्राह्मण के परामर्शानुसार दान योग्य वस्तुओं का संग्रह करके संकल्प कर लेना चाहिए तथा अगले दिन 8 जुलाई को प्रातः सूर्योदय के समय पुनः स्नान करके संकल्पपूर्वक सामग्री/वस्तुएँ योग्य ब्राह्मण को दान देनी चाहिएं।
पुत्रजन्मनि यज्ञे च तथा सङ्क्रमणे रवेः।
राहोश्च दर्शने कार्यं प्रशस्तं नान्यथा निशि ॥
- वसिष्ठ
अर्थात् पुत्र की उत्पत्ति, यज्ञ, सूर्य-संक्रान्ति और सूर्य-चन्द्र के ग्रहण में रात्रि में भी स्नान करना चाहिए।
सूतक एवं ग्रहण-काल में मूर्त्ति स्पर्श करना, अनावश्यक खाना-पीना, मैथुन, निद्रा, नाखुन-काटना, तैलाभ्यंग वर्जित है। झूट-कपटादि, वृथा-अलाप, मूत्र-पुरीषोत्सर्ग से परहेज़ करना चाहिए। वृद्ध, रोगी, बालक एवं गर्भवती स्त्रियों को यथानुकूल भोजन या दवाई आदि लेने में कोई दोष नहीं। गर्भवती महिलाओं को ग्रहणकाल में सब्ज़ी काटना, पापड़ सेंकना आदि उत्तेजित कार्यों से परहेज़ करना चाहिए तथा धार्मिक ग्रन्थ का पाठ करते हुए प्रसन्नचित्त रहे। इससे भावी सन्तति स्वस्थ एवं सद्गुणी होती है। हरिद्वार, प्रयाग, वाराणसी, अयोध्या आदि तीर्थों पर स्नानादि का विशेष माहात्म्य होगा।
ग्रहणस्पर्शकाले स्नानं मध्ये होमः सुराचर्नम् ।
श्राद्धं च मुच्यमाने दां मुक्ते स्नानमिति क्रमः ॥
- धर्मसिन्धुः
अर्थात् ग्रहण में स्पर्श के समय स्नान, मध्य में होम और देवपूजन तथा ग्रहणमोक्ष के समय श्राद्ध और अन्न, वस्त्र, धनादि का दान और सर्वमुक्त होने पर स्नान करें-यह क्रम है।
ग्रहण/सूतकाल से पहिले ही दूध/दही, आचार, चटनी, मुरब्बा में कुशातृण रख देना श्रेयस्कर होता है। इससे ये दूषित नहीं होते। सूखे खाद्य-पदार्थों में कुशा डालने की आवश्यकता नहीं।
ग्रहण-सूतक – इस ग्रहण का सूतक 7 सितं., 2025 ई. को 12 घं. 57 मि. भा. स्टैं. टा. से प्रारम्भ हो जाएगा।
क्योंकि 7 सितं., 2025 ई. को ‘पूर्णिमा का महालय श्राद्ध है और इस दिन श्राद्धकाल में (अपराह्ण के वक्त ) ग्रहणसूतक लगा रहेगा। श्राद्ध आदि ग्रहण- समय में शास्त्रों द्वारा विहित माने गए हैं। लेकिन ध्यान रहे कि यहां अपक्वान्न (न पके अन्न) का ही दान विहित है। पक्वान्न का यहां निषेध है- यह ध्यान रखें।
ग्रहण का राशिफल –
यह ग्रहण पूर्वाभाद्रपदा नक्षत्र एवम् कुम्भ राशि के समय घटित हो रहा है। अतः पूर्वाभाद्रपदा नक्षत्र और कुम्भ राशि के जातकों के लिए यह अधिक अशुभ / कष्टप्रद रहेगा।
ग्रहण का राशियों पर प्रभाव-यह खग्रास चन्द्रग्रहण पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र तथा कुम्भराशि में घटित हो रहा है। इसलिए इस राशि तथा नक्षत्र में उत्पन्न जातकों को विशेष रूप से चन्द्र-राहु तथा राशिस्वामी शनि का जप, दान करना कल्याणकारी रहेगा।
जन्म या नामराशि आधारित बारह राशि वालों के लिए इस ग्रहण का फल इस प्रकार होगा-
राशि:
मेष:
धन-लाभ, उन्नति।
वृष:
रोग, शरीर पीड़ा।
मिथुन:
सन्तान सम्बन्धी गुप्त चिन्ता।
कर्क:
शत्रुभय, साधारण लाभ, खर्च।
सिंह:
स्त्री/पति सम्बन्धी परेशानी।
कन्या:
रोग, गुप्त चिन्ता,संघर्ष।
तुला:
खर्च अधिक, कार्य विलम्ब।
वृश्चिक:
कार्य-सिद्धि, लाभ।
धनु:
धन-लाभ, उन्नति।
मकर:
धन-हानि, व्यर्थ-यात्रा।
कुंभ:
दुर्घटना, शरीर कष्ट, शत्रुता।
मीन:
धन हानि, चिन्ता।
जिस राशि के लिए ग्रहण का फल अशुभ लिखा है, वह यथाशक्ति जप-पाठ, ग्रह-शान्ति (चन्द्रमा एवं राशिस्वामी शनि की) एवं दानादि द्वारा ग्रहण के अनिष्ट प्रभाव को क्षीण किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त ग्रहणोपरान्त औषधि-स्नान करने से भी अनिष्ट की शान्ति, होती है। रोग शान्ति के लिए ग्रहणकाल में ‘श्रीमहामृत्युञ्जय-मन्त्र’ का जप करना शुभ होता है।
🌿🌼 ग्रहण का लोक-भविष्य एवं प्रभाव :
१. ग्रहण का राशि नक्षत्र फल- चन्द्रग्रहण कुम्भ राशि एवं पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में घटित होने से पश्चिमी प्रदेशों के पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वालों, पशु पालने वालों, हिंसा, चोरी तथा नीच प्रकृति वाले लोगों को कष्ट एवं पीड़ा होगी।
कुम्भोपरागे पीडयन्तेगिरिजाः पश्चिमाजनाः ॥
२. ग्रहण का मास-फल- यह खग्रास चन्द्रग्रहण भाद्रपद मास में घटित होने से उड़ीसा, उत्तरी आंध्रा-प्रदेश, बंगाल, सौराष्ट्र (महाराष्ट्र), मुस्लिम देशों में उपद्रव, युद्धजन्य घटनाएं घटित होंगी। स्त्रियों के गर्भ नाश, परन्तु कृषि उत्पादन श्रेष्ठ हो तथा सुभिक्ष रहे।
३. ग्रहण का वार-फल- चन्द्रग्रहण रविवार को घटित होने से वर्षा की कमी, धान्य (चावल) का उत्पादन कम, गायों में दुग्ध की कमी, राजाओं (शासकों) में युद्ध, उड़ीसा में उपद्रव, घी, तेल आदि बेचने से लाभ प्राप्त हो।
४. ग्रहण योग-फल- ग्रहण धृति-योग में होने से गाने-बजाने, नृत्य करने वाले, सिनेमा-संगीत से जुड़े हुए लोग, लकड़ी का काम करने वालों को कष्ट होगा।
५. ग्रहणकालीन चन्द्र पर ग्रहदृष्टिफल- ग्रहण के समय कुम्भ राशिस्थ चन्द्र का राहु से सन्निकर्ष एवं सूर्य-बुध-केतु ग्रहों के साथ समसप्तक योग बना हुआ है। कहीं अग्निकाण्ड, उपद्रव, युद्धभय, प्रजा को रोग व प्राकतिक प्रकोपों से कष्ट, वर्षा से हानि तथा आवश्यक वस्तुओं के मूल्यों में वृद्धि होगी। परन्तु ‘चन्द्र-राहु’ पर गुरु की दृष्टि रहने से शीघ्र ही परिस्थितियां अनुकूल हो जाएंगी।
६. ग्रहण का अन्य फल – कुम्भ राशि का ग्रहण पर्वतीय प्रदेशवासियों, पाश्चात्त्य देशों में रहने वाले लोगों, बोझा ढोने वाले, चोर, अहीर, दरद देश (उत्तरी कश्मीर और दक्षिण रूस के सीमांत प्रदेश) वासियों, प्रधान शासकों, सिंह, एवम् बार्बर देश (उत्तरी अफ्रीका) में रहने वाले जनों के लिए अशुभकारी माना जाता है।
७. ग्रहण का नक्षत्रफल – पूर्वाभाद्रपदा नक्षत्र में ग्रहण होने से हिंसक, पशुपालक, चोर, अधर्मी, व्रत नियमादि न मानने वाले, शठ/नीच प्रवृत्ति वाले और युद्ध-प्रवीणजन कष्ट पावें।
८. वारफल – क्योंकि यह ग्रहण रविवार को घटित हो रहा है, अतः वर्षा की कमी हो, धान्य की उत्पत्ति में भी कमी रहे। गाएं कम दूध दें। राजाओं एवम् शासकों में युद्ध का वातावरण बने ।
९. मासफल – भाद्रपदी पूर्णिमा का चन्द्रग्रहण कलिंग (उत्तरी तेलंगाना, उत्तर/पूर्वी आंध्र, ओडिसा व मध्य प्रदेश का कुछ भाग), बंग (बंगाल व बंगलादेश आदि), मगध (बिहार), सौराष्ट्र (काठियावाड़ आदि), मलेच्छ, सुवीर (सिंधु नदी के पार्श्ववर्ती प्रदेश), दरद (उत्तरी कश्मीर व दक्षिणी रूस के सीमाप्रदेश), अश्मक (नर्मदा और गोदावरी केमध्यप्रदेश)- इन देशों के वासियों के लिए हानिप्रद और स्त्रियों के गर्भ का हानिकारक होता है। हालांकि यह विश्व में सुभिक्ष का संकेत भी देता है। इस बारे ‘वराहमिहिर’ का यह वचन देखिए-
“कलिङ्गबङ्गान् मगधान् सुराष्ट्रान् म्लेच्छान् सुवीरान् दरदाश्मकांश्च ।
स्त्रीणां च गर्भानसुरो निहन्ति सुभिक्षकृ द्भाद्रपदे ऽभ्युपेतः ॥”
१०. अयनफल – यह चन्द्रग्रहण दक्षिणायन में घटित हो रहा है, अतः वैश्य, व्यापारी वर्ग और शूद्रजनों के लिए यह अशुभदायी रहेगा।
इस ग्रहण के प्रारम्भ, मध्य और समाप्तिकाल सभी भारतीय नगरों/उपनगरों ग्रामों के लिए समान रहेंगे- यह ध्यान रखिए।
॥ जय श्री हरि ॥
खग्रास चन्द्रग्रहण (7 सितम्बर, 2025, रविवार)
7/8 सितम्बर, 2025, रविवार को खग्रास चन्द्रग्रहण पड़ रहा है।
यह ग्रहण भाद्रपद पूर्णिमा को 7 एवं 8 सितम्बर, 2025 ई. की मध्यगत रात्रि को सम्पूर्ण भारत में खग्रास रूप में दिखाई देगा। यह खग्रास चन्द्रग्रहण भाद्रपद पूर्णिमा, रविवार, तदनुसार 7/8 सितं., 2025 ई. को यूरोप, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, पश्चिमी उत्तरी-पूर्वी अमेरिका एवम् पैसिफिक, अटलांटिक, अंटार्कटिक एवं हिन्द महासागर में खग्रासरूप में दिखाई देगा। यह ग्रहण म्यांमार, चाईना, नाईजीरिया, इजिप्ट, थाईलैण्ड, इण्डोनेशिया, जर्मनी, रसिया, उ. कोरिया, ईटली, बंगलादेश, हंगरी, फिलीपींस, ग्रीस, सिंगापुर, रोमानिया, बुल्गारिया, जापान, टर्की, बैल्जियम, नीदरलैण्डस, फ्रांस, यू. के., स्पेन और भारत के अधिकतर भागों में खग्रासरूप में दिखाई देगा। इसके अतिरिक्त अमेरिका के कुछ भाग, पुतर्गाल और ब्राजील में यह ग्रहण आंशिक रूप में भी देखा जा सकेगा।
इस ग्रहण का स्पर्श-मोक्षादि काल (भा.स्टैं.टा.) इस प्रकार होगा-
ग्रहण स्पर्श (प्रारम्भ):
21-57 (रात्रि में 9:57 बजे)
खग्रास प्रारम्भ:
23-01 (रात्रि में 11:01 बजे)
ग्रहण मध्य:
23-42 (रात्रि में 11:42 बजे)
खग्रास समाप्त:
24-23 (रात्रि में 12:23 बजे)
ग्रहण समाप्त:
25-26 (रात्रि में 1:26 बजे)
7/8 सितम्बर, 2025 ई. की मध्यगत रात्रि
(भा. स्टैं.टा. के अनुसार )
ग्रहण की अवधि = 3 घं. 29 मि. ग्रासमान = 1.362 प्रतिशत
भारत में जब 7 सितम्बर, 2025 ई. की रात्रि 9 बजकर, 57 मिनट पर चन्द्रग्रहण शुरु होगा अथवा 20घं.-58मिं. पर चन्द्र मालिन्य आरम्भहोगा, उस समय से बहुत पहले ही सम्पूर्ण भारत में चन्द्र-उदय हो चुका होगा। भारत के सभी नगरों/ग्रामों में 7 सितम्बर को सायं 6:00 से 7:00 तक चन्द्रोदय हो जाएगा तथा यह खग्रास चन्द्रग्रहण 7 सितम्बर की रात्रि 21 घं.-57 मिं. से प्रारम्भ होकर रात्रि 25-26 मिं. (अर्थात् 1 बजकर 26 मिनट) पर समाप्त (मोक्ष) होगा। भारत के सभी नगरों में इसका प्रारम्भ, मध्य तथा मोक्ष रूप देखा जा सकेगा।
इस ग्रहण में चन्द्रबिम्ब पश्चिम-दक्षिण की ओर से ग्रसित होकर उत्तर-पूर्व की ओर से मुक्त होगा। इस ग्रहण की स्पर्श-मोक्ष की दिशाएं, परमग्रासमान तथा विश्व में कहाँ-कहाँ दिखाई देगा, आगामी पृष्ठ- पर दिए गए चित्र में देखिए।
भारत के अतिरिक्तं दिखाई देने वाले क्षेत्र (देश):
भारत के अतिरिक्त यह ग्रहण सम्पूर्ण यूरोप, सम्पूर्ण एशिया के देशों, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैण्ड, अफ्रीका, पश्चिमी उत्तरी-अमेरिका तथा दक्षिणी अमरीका के पूर्वी क्षेत्रों (केवल ब्राज़ील के पूर्वी क्षेत्रों) में दिखाई देगा।
यूरोप के लगभग सभी देशों (इंग्लैण्ड, इटली, जर्मनी, फ्रांस आदि), अफ्रीका के अधिकतर देशों में इस ग्रहण का प्रारम्भ चन्द्रोदय के बाद देखा जा सकेगा अर्थात् जब इन क्षेत्रों में चन्द्रोदय होगा, तब ग्रहण प्रारम्भ हो चुका होगा। (ग्रस्तोदय रूप में दिखाई देगा)
जबकि दक्षिणी-पूर्वी ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैण्ड, फिजी आदि में इस ग्रहण की समाप्ति चन्द्रास्त के समय देखी जा सकेगी अर्थात् जब ग्रहण घटित हो रहा होगा, तो चन्द्रास्त हो जाएगा। (8 सितम्बर की सुबह) – (ग्रस्तास्त होगा।)
भारत तथा सम्पूर्ण एशिया में इस ग्रहण का दृश्य प्रारम्भ से समाप्ति तक देखा जा सकेगा।
ग्रहण का सूतक-इस ग्रहण का सूतक 7 सितम्बर, 2025 ई. को दोपहर 12घं.-57मिं. (भा.स्टैं.टा.) पर प्रारम्भ हो जाएगा।
ग्रहण-काल तथा बाद में क्या करें-क्या न करें ?
ग्रहण के सूतक तथा ग्रहणकाल में स्नान, दान, जप-पाठ, मन्त्र, स्तोत्र-पाठ, मन्त्र-सिद्धि, तीर्थस्नान, ध्यान, हवनादि शुभ कृत्यों का सम्पादन करना कल्याणकारी होता है। धर्मनिष्ठ लोगों को ग्रहणकाल अथवा 7 सितम्बर को सूर्यास्त से पूर्व ही अपनी राश्यानुसार अन्न, जल, चावल, सफेद वस्त्र, फल (ऋतु अनुसार) आदि अथवा ब्राह्मण के परामर्शानुसार दान योग्य वस्तुओं का संग्रह करके संकल्प कर लेना चाहिए तथा अगले दिन 8 जुलाई को प्रातः सूर्योदय के समय पुनः स्नान करके संकल्पपूर्वक सामग्री/वस्तुएँ योग्य ब्राह्मण को दान देनी चाहिएं।
पुत्रजन्मनि यज्ञे च तथा सङ्क्रमणे रवेः।
राहोश्च दर्शने कार्यं प्रशस्तं नान्यथा निशि ॥
- वसिष्ठ
अर्थात् पुत्र की उत्पत्ति, यज्ञ, सूर्य-संक्रान्ति और सूर्य-चन्द्र के ग्रहण में रात्रि में भी स्नान करना चाहिए।
सूतक एवं ग्रहण-काल में मूर्त्ति स्पर्श करना, अनावश्यक खाना-पीना, मैथुन, निद्रा, नाखुन-काटना, तैलाभ्यंग वर्जित है। झूट-कपटादि, वृथा-अलाप, मूत्र-पुरीषोत्सर्ग से परहेज़ करना चाहिए। वृद्ध, रोगी, बालक एवं गर्भवती स्त्रियों को यथानुकूल भोजन या दवाई आदि लेने में कोई दोष नहीं। गर्भवती महिलाओं को ग्रहणकाल में सब्ज़ी काटना, पापड़ सेंकना आदि उत्तेजित कार्यों से परहेज़ करना चाहिए तथा धार्मिक ग्रन्थ का पाठ करते हुए प्रसन्नचित्त रहे। इससे भावी सन्तति स्वस्थ एवं सद्गुणी होती है। हरिद्वार, प्रयाग, वाराणसी, अयोध्या आदि तीर्थों पर स्नानादि का विशेष माहात्म्य होगा।
ग्रहणस्पर्शकाले स्नानं मध्ये होमः सुराचर्नम् ।
श्राद्धं च मुच्यमाने दां मुक्ते स्नानमिति क्रमः ॥
- धर्मसिन्धुः
अर्थात् ग्रहण में स्पर्श के समय स्नान, मध्य में होम और देवपूजन तथा ग्रहणमोक्ष के समय श्राद्ध और अन्न, वस्त्र, धनादि का दान और सर्वमुक्त होने पर स्नान करें-यह क्रम है।
ग्रहण/सूतकाल से पहिले ही दूध/दही, आचार, चटनी, मुरब्बा में कुशातृण रख देना श्रेयस्कर होता है। इससे ये दूषित नहीं होते। सूखे खाद्य-पदार्थों में कुशा डालने की आवश्यकता नहीं।
ग्रहण-सूतक – इस ग्रहण का सूतक 7 सितं., 2025 ई. को 12 घं. 57 मि. भा. स्टैं. टा. से प्रारम्भ हो जाएगा।
क्योंकि 7 सितं., 2025 ई. को ‘पूर्णिमा का महालय श्राद्ध है और इस दिन श्राद्धकाल में (अपराह्ण के वक्त ) ग्रहणसूतक लगा रहेगा। श्राद्ध आदि ग्रहण- समय में शास्त्रों द्वारा विहित माने गए हैं। लेकिन ध्यान रहे कि यहां अपक्वान्न (न पके अन्न) का ही दान विहित है। पक्वान्न का यहां निषेध है- यह ध्यान रखें।
ग्रहण का राशिफल –
यह ग्रहण पूर्वाभाद्रपदा नक्षत्र एवम् कुम्भ राशि के समय घटित हो रहा है। अतः पूर्वाभाद्रपदा नक्षत्र और कुम्भ राशि के जातकों के लिए यह अधिक अशुभ / कष्टप्रद रहेगा।
ग्रहण का राशियों पर प्रभाव-यह खग्रास चन्द्रग्रहण पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र तथा कुम्भराशि में घटित हो रहा है। इसलिए इस राशि तथा नक्षत्र में उत्पन्न जातकों को विशेष रूप से चन्द्र-राहु तथा राशिस्वामी शनि का जप, दान करना कल्याणकारी रहेगा।
जन्म या नामराशि आधारित बारह राशि वालों के लिए इस ग्रहण का फल इस प्रकार होगा-
राशि:
मेष:
धन-लाभ, उन्नति।
वृष:
रोग, शरीर पीड़ा।
मिथुन:
सन्तान सम्बन्धी गुप्त चिन्ता।
कर्क:
शत्रुभय, साधारण लाभ, खर्च।
सिंह:
स्त्री/पति सम्बन्धी परेशानी।
कन्या:
रोग, गुप्त चिन्ता,संघर्ष।
तुला:
खर्च अधिक, कार्य विलम्ब।
वृश्चिक:
कार्य-सिद्धि, लाभ।
धनु:
धन-लाभ, उन्नति।
मकर:
धन-हानि, व्यर्थ-यात्रा।
कुंभ:
दुर्घटना, शरीर कष्ट, शत्रुता।
मीन:
धन हानि, चिन्ता।
जिस राशि के लिए ग्रहण का फल अशुभ लिखा है, वह यथाशक्ति जप-पाठ, ग्रह-शान्ति (चन्द्रमा एवं राशिस्वामी शनि की) एवं दानादि द्वारा ग्रहण के अनिष्ट प्रभाव को क्षीण किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त ग्रहणोपरान्त औषधि-स्नान करने से भी अनिष्ट की शान्ति, होती है। रोग शान्ति के लिए ग्रहणकाल में ‘श्रीमहामृत्युञ्जय-मन्त्र’ का जप करना शुभ होता है।
ग्रहण का लोक-भविष्य एवं प्रभाव :
१. ग्रहण का राशि नक्षत्र फल- चन्द्रग्रहण कुम्भ राशि एवं पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में घटित होने से पश्चिमी प्रदेशों के पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वालों, पशु पालने वालों, हिंसा, चोरी तथा नीच प्रकृति वाले लोगों को कष्ट एवं पीड़ा होगी।
कुम्भोपरागे पीडयन्तेगिरिजाः पश्चिमाजनाः ॥
२. ग्रहण का मास-फल- यह खग्रास चन्द्रग्रहण भाद्रपद मास में घटित होने से उड़ीसा, उत्तरी आंध्रा-प्रदेश, बंगाल, सौराष्ट्र (महाराष्ट्र), मुस्लिम देशों में उपद्रव, युद्धजन्य घटनाएं घटित होंगी। स्त्रियों के गर्भ नाश, परन्तु कृषि उत्पादन श्रेष्ठ हो तथा सुभिक्ष रहे।
३. ग्रहण का वार-फल- चन्द्रग्रहण रविवार को घटित होने से वर्षा की कमी, धान्य (चावल) का उत्पादन कम, गायों में दुग्ध की कमी, राजाओं (शासकों) में युद्ध, उड़ीसा में उपद्रव, घी, तेल आदि बेचने से लाभ प्राप्त हो।
४. ग्रहण योग-फल- ग्रहण धृति-योग में होने से गाने-बजाने, नृत्य करने वाले, सिनेमा-संगीत से जुड़े हुए लोग, लकड़ी का काम करने वालों को कष्ट होगा।
५. ग्रहणकालीन चन्द्र पर ग्रहदृष्टिफल- ग्रहण के समय कुम्भ राशिस्थ चन्द्र का राहु से सन्निकर्ष एवं सूर्य-बुध-केतु ग्रहों के साथ समसप्तक योग बना हुआ है। कहीं अग्निकाण्ड, उपद्रव, युद्धभय, प्रजा को रोग व प्राकतिक प्रकोपों से कष्ट, वर्षा से हानि तथा आवश्यक वस्तुओं के मूल्यों में वृद्धि होगी। परन्तु ‘चन्द्र-राहु’ पर गुरु की दृष्टि रहने से शीघ्र ही परिस्थितियां अनुकूल हो जाएंगी।
६. ग्रहण का अन्य फल – कुम्भ राशि का ग्रहण पर्वतीय प्रदेशवासियों, पाश्चात्त्य देशों में रहने वाले लोगों, बोझा ढोने वाले, चोर, अहीर, दरद देश (उत्तरी कश्मीर और दक्षिण रूस के सीमांत प्रदेश) वासियों, प्रधान शासकों, सिंह, एवम् बार्बर देश (उत्तरी अफ्रीका) में रहने वाले जनों के लिए अशुभकारी माना जाता है।
७. ग्रहण का नक्षत्रफल – पूर्वाभाद्रपदा नक्षत्र में ग्रहण होने से हिंसक, पशुपालक, चोर, अधर्मी, व्रत नियमादि न मानने वाले, शठ/नीच प्रवृत्ति वाले और युद्ध-प्रवीणजन कष्ट पावें।
८. वारफल – क्योंकि यह ग्रहण रविवार को घटित हो रहा है, अतः वर्षा की कमी हो, धान्य की उत्पत्ति में भी कमी रहे। गाएं कम दूध दें। राजाओं एवम् शासकों में युद्ध का वातावरण बने ।
९. मासफल – भाद्रपदी पूर्णिमा का चन्द्रग्रहण कलिंग (उत्तरी तेलंगाना, उत्तर/पूर्वी आंध्र, ओडिसा व मध्य प्रदेश का कुछ भाग), बंग (बंगाल व बंगलादेश आदि), मगध (बिहार), सौराष्ट्र (काठियावाड़ आदि), मलेच्छ, सुवीर (सिंधु नदी के पार्श्ववर्ती प्रदेश), दरद (उत्तरी कश्मीर व दक्षिणी रूस के सीमाप्रदेश), अश्मक (नर्मदा और गोदावरी केमध्यप्रदेश)- इन देशों के वासियों के लिए हानिप्रद और स्त्रियों के गर्भ का हानिकारक होता है। हालांकि यह विश्व में सुभिक्ष का संकेत भी देता है। इस बारे ‘वराहमिहिर’ का यह वचन देखिए-
“कलिङ्गबङ्गान् मगधान् सुराष्ट्रान् म्लेच्छान् सुवीरान् दरदाश्मकांश्च ।
स्त्रीणां च गर्भानसुरो निहन्ति सुभिक्षकृ द्भाद्रपदे ऽभ्युपेतः ॥”
१०. अयनफल – यह चन्द्रग्रहण दक्षिणायन में घटित हो रहा है, अतः वैश्य, व्यापारी वर्ग और शूद्रजनों के लिए यह अशुभदायी रहेगा।
इस ग्रहण के प्रारम्भ, मध्य और समाप्तिकाल सभी भारतीय नगरों/उपनगरों ग्रामों के लिए समान रहेंगे- यह ध्यान रखिए।
