नोट और वोटों की चोरी
राज्य के तीनों अंग हैं दुर्बल , प्रेस – मीडिया बेईमान है ;
अग्निवीर से सेना जर्जर , अब तो मालिक भगवान है ।
राजनीति बन चुकी है वैश्या , नेता भड़वे बनते जाते ;
चुनाव-आयोग पूरा गुलाम है , नेता नाच नचाते जाते ।
म्लेच्छराज चल रहा देश में , हिंदू – जनता पीड़ित है ;
हजार-बरस से चल रही गुलामी , शासक-वर्ग ही पीड़क है ।
सौ में नब्बे चोर हैं नेता , नोट और वोटों की चोरी ;
टैक्स – डकैती है हिंदू पर , नेता करते सीनाजोरी ।
बद से बदतर होते जाते , देश के ऐसे हैं हालात ;
धर्महीन – अज्ञानी हिंदू , इनको मिलती हरदम लात ।
फिर भी ये लतिहड़ ऐसे हैं , नेता से ही चिपके हैं ;
महाम्लेच्छ इनका नेता है , इस कारण हिंदू पिचके हैं ।
पराकाष्ठा महामूर्खता की , भक्षक को ये समझें रक्षक ;
अब्बासी-हिंदू इनका जो नेता , वो जहरीला नाग है तक्षक ।
अकल के अंधों की बहुतायत , किसको हृदय-सम्राट बनाया ?
ये ही तुम्हें मिटाने आया , हिंदू ! अब तक समझ न पाया ।
हिंदू-हित की केवल बातें , काम करे ये म्लेच्छों का ;
साजिश से सत्ता में आया , कठपुतला अपने आका का ।
अरब-अमेरिका इसके आका , एजेण्डा उनका चला रहा है ;
पूर्वोत्तर – कश्मीर – मनीपुर , पूरा – भारत मिटा रहा है ।
जागो हिंदू ! अब तो जागो , नामो-निशान मिटने वाला है ;
गृहयुद्ध भयानक होने वाला , रक्त का सागर बहने वाला है ।
“भविष्य-मालिका” भविष्य का दर्शन,हिंदू ! इसे देखना होगा ;
धर्म-मार्ग ही बचा सकेगा , वरना तुझको मरना होगा ।
“धर्मो रक्षति रक्षित : “ करनी होगी धर्म की रक्षा ;
तब ही तुमको धर्म बचाये , तुमको देगा पूर्ण – सुरक्षा ।
क्योंकि धर्म से बुद्धि खुलती , शत्रु-बोध जागृत होगा ;
“विष्णु-कृपा” से होगी रक्षा , तब ही हिंदू ! विजयी होगा ।
हर मंदिर को बचाना होगा , अब्बासी-हिंदू को भगाना होगा ;
गलियारा बनने मत देना , इसका परिणाम बुरा होगा ।
अब्बासी-हिंदू है धर्म का दुश्मन , अय्याशी इसका मजहब है ;
फ्री-मेजन मजहब है इसका , शैतानी इसका मकसद है ।
शैतान की इच्छा पूरी करता , धर्म-सनातन मिटाना चाहे ;
धर्महीन – अज्ञानी हिंदू , लगता है कि मरना चाहे ।
हिंदू ! मौत की मंजिल छोड़ो , सुखमय जीवन में आओ ;
अब्बासी-हिंदू को फौरन त्यागो व अच्छी-सरकार बनाओ ।
