“जेन-जी” को पूर्ण-सफलता
अब्बासी-हिंदू भारत का नेता , बेईमानों को ढूंढता रहता ;
आउट ऑफ़ टर्न प्रमोशन देकर,प्रमुख पदों पर उनको भरता ।
आई टी , ई डी , सी बी आई , इसी तरह का सी जे आई ;
चुनाव-आयोग व प्रेस-मीडिया , ये महाभ्रष्ट पूरे हरजाई ।
चरित्रहीन जो भ्रष्टाचारी , डाकू – चोर – लुटेरे हैं ;
अब्बासी-हिंदू सरदार है इनका , पाप करें सब पूरे हैं ।
पूरी तरह से धर्म – विरोधी , राष्ट्र – विरोधी है ये नेता ;
हिंदू को सदा ही धोखा देता , पर हिंदू समझ नहीं पाता ।
नफरत का ये जहर घोलता , जातिवाद से धर्म तोड़ता ;
धर्महीन – अज्ञानी हिंदू , इसकी साजिश नहीं समझता ।
अनपढ़ और कुपढ़ ये नेता , शिक्षा का घोर-विरोधी है ;
ब्रेनडेड हिंदू को करता , बहुत बड़ा अपराधी है ।
पेपर लीक कराता रहता , ताकि बच्चे पढ़ न पायें ;
बंधुआ-मजदूर बनाता उनको , पांच-किलो राशन खायें ।
जड़ें देश की कर रहा खोखली , सेना तक बर्बाद कर रहा ;
“जनरल-रावत” को किया किनारे, “अग्निवीर” को घुसा रहा ।
हर-पल देश को बेच रहा है , और नहीं कुछ भी आता है ;
वणिक-वृत्ति का है ये नेता , देश बेचकर खाता है ।
घूम-घूम कर अय्याशी करता , पूरी-दुनिया में घूमता रहता ;
भारत-वर्ष लुटाता रहता , बदले में पुरस्कार पा जाता ।
पूरी तरह मनोरोगी है , “पैरानोइया” का रोगी है ;
“स्टॉकहोम-सिंड्रोम” से पीड़ित, “मेगालोमेनिया” का रोगी है ।
बेहद डरपोक लालची नेता , पुलिस के पीछे छिपता है ;
“जेन-जी” से बहुत ही डरता , लाठी-गोली चलवाता है ।
पर महामूर्ख ! ये नहीं जानता , डाल रहा है आग में हाथ ;
सारे दलबल सहित जलेगा , कमल उखाड़ेगा ये हाथ ।
तथाकथित हिंदू-वादी दल , कहीं से नहीं हिंदू-वादी ;
समलैंगिक जो मातृ-संस्था , धर्म-विरोधी ये आबादी ।
भारत का दुर्भाग्य यही है , हिंदू ! इनको समझ न पाया ;
इस क्षद्म-रूप हिंदू-दुश्मन को , अपना हृदय-सम्राट बनाया ।
पर पेपर लीक कराके नेता , फंस गया है अपने जाल में ;
पेपर लीक की जो चिंगारी , भड़क चुकी है आग में ।
अब ये आग जला डालेगी, नेता के गंदे-मंसूबे जल जायेंगे ;
नेता , दल व मातृ-संस्था , ये सब के सब मिट जायेंगे ।
“जेन-जी” को पूर्ण-सफलता , बहुत-शीघ्र मिलने वाली ;
धर्म , देश व राष्ट्र-विरोधी , हर-ताकत मिटने वाली ।
“सत्यमेव-जयते”, एडवो• ब्रजेश सिंह सेंगर
