सत्ता-लोलुप कितना ये नेता ?
हिंसा – प्रतिहिंसा – बर्बरहिंसा , ये नेता गृहयुद्ध करा देगा ;
अब्बासी-हिंदू भारत का नेता , भारत में आग लगा देगा ।
सत्ता-लोलुप कितना ये नेता ? जान भी अपनी दे देगा ;
पर जीते-जी सत्ता न छोड़े , खून-खराबा करवा देगा ।
खुले-आम वोटों की चोरी , चोरी नहीं डकैती है ;
सुप्रीम-कोर्ट चोरी में शामिल , गुंडागर्दी व बकैती है ।
खुले-आम चैलेंज दे रहे , ये भारत की जनता को ;
चरित्रहीन व भ्रष्टाचारी , लूट रहे हैं जनता को ।
सुप्रीम-कोर्ट से खुली छूट है, जैसे चाहें भारत को लूटें ;
पापी-साम्राज्य देश में कायम ,”राम-मंदिर” तक खुलकर लूटें ।
धर्महीन – अज्ञानी हिंदू को , नेता अंधभक्त बनवाता ;
अब उनको भी मूर्ख बनाता , मूर्खों को समझ नहीं आता ।
अन्धभक्तों की महामूर्खता , बेमिसाल है दुनिया में ;
उसको हृदय-सम्राट बनाते, जो सबसे-पापी इस दुनिया में ।
पर नेता ने ये गलती की , सबको मूर्ख समझ बैठा ;
पहले कुछ-दिन मूर्ख बने सब, पर अब भारत उठ बैठा ।
अब पांच-प्रतिशत ही अंधभक्त हैं , महाधूर्त हैं ये अनाचारी ;
इन्हीं में पुलिस के कुछ अधिकारी, चरित्रहीन जो भ्रष्टाचारी ।
लेकिन अब भारत जाग उठा है , “जेन-जी” भारत की शक्ति ;
“एलओपी” “उम्मीद का सूरज” , लोकतंत्र में जिसकी भक्ति ।
“जेन-जी” – “एलओपी” के आगे, कोई नहीं टिक पायेगा ;
अब्बासी-हिंदू भारत का नेता , तिनके सा उड़ जायेगा ।
देखो उड़कर कहाॅं जा रहा ? इस पर नजर बनाये रखना ;
जहाॅं जायेगा – पकड़ा जायेगा , इसको पूरी-सजा भुगतना ।
हर – पापी को सजा मिलेगी , कोई नहीं बच पायेगा ;
अब भी मौका है हार मान ले , खून-खराबा बच जायेगा ।
इकबाले-जुर्म जो भी कर लेगा , वायदा-माफ बन जायेगा ;
फिर भी जेल तो जाना होगा , पर मृत्यु-दंड बच जायेगा ।
या हिटलर के मार्ग को चुन ले , मुसोलिनी का भी है मार्ग ;
अपना-अंत सुनिश्चित कर ले , क्योंकि तुझे नहीं सन्मार्ग ।
अब तेरा-जादू टूट चुका है , सदा नहीं कुछ भी चलता है ;
एकमात्र है “धर्म-सनातन”, जिससे तू सदा-सदा चिढ़ता है ।
“जैसी मति – वैसी गति” , कर्मों का फल तो भोगना होगा ;
कभी भी कोई नहीं बचा है , ये ही तुझे समझना होगा ।
अमरीका , चीन और इजरायल , कोई भी काम न आयेंगे ;
इन सबको भी अपने भोग भोगना , अंत भयानक पायेंगे ।
“सत्यमेव-जयते”, एडवो• ब्रजेश सिंह सेंगर

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