वाराणसी । गृहमंत्री अमित शाह जी द्वारा उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार की स्थिति की तुलना “अंगद के पैर” से करने पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए परमाराध्य परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर अनन्तश्रीविभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानंदः सरस्वती ‘१००८’ ने कहा कि अंगद का पैर सत्ता या अहंकार के बल पर नहीं जमना था,वह तो श्री राम के धर्म, सत्य और न्याय के आधार पर स्थिर हुआ था।राजनीतिज्ञों को यह समझना चाहिए कि धर्म-ग्रंथों के रूपक अपनी सुविधानुसार उठाना धर्म का आदर नहीं,बल्कि उसका अति-सरलीकरण है।
शंकराचार्य जी ने कहा अंगद का पैर किसी सत्ता या राजनैतिक के दंभ पर नही अपितु अंगद का पैर सत्य और धर्म की शक्ति के आधार पर स्थिर था।अंगद जी ने रावण की सभा में स्वयं कहा था कि उनका पैर मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के धर्म,सत्य और न्याय की नीति के कारण टिका था।
योगी के शासन की तुलना रामराज्य से नही की जा सकती
साथ ही शंकराचार्य जी महाराज ने कहा कि बटुकों की चोटी खींचने,संतों पर निर्ममता से प्रहार करने एवं लाखों गौमाता को कटवाने वाले योगी आदित्यनाथ के शासन की तुलना रामराज्य से कदापि नही की जा सकती है।
उक्त जानकारी देते हुए शंकराचार्य जी महाराज के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने बताया की शंकराचार्य जी महाराज ने उक्त व्यक्तव्य श्रीकाशी से गुजरात प्रस्थान करने से पूर्व अपने प्रवचन के दौरान कही है।
