संदीप देव। भगवान श्री हरि विष्णु को भोग और मोक्ष दोनों का देवता कहा गया है। विष्णु अर्थात् जो सर्वव्यापी हैं। जो सभी जगह और सभी में व्याप्त हैं। विष्णु सहस्रनाम में भगवान श्री विष्णु के 1000 नाम हैं।
विष्णु सहस्रनाम के रचयिता महर्षि वेदव्यास हैं। यह महाभारत का अंश है। भीष्म पितामह जब वाणों की शैया कर लेटे हैं और युधिष्ठिर उनसे प्रश्न कर रहे हैं, तभी इस सहस्रनाम का उद्गम होता है। युधिष्ठिर पितामह से छह प्रश्न पूछते हैं। हर प्रश्न में एक ही जिज्ञासा है कि “को धर्म: सर्वधर्माणाम्।” अर्थात् सभी धर्मों का मूल कौन है?
पितामह फिर जवाब देते हैं:- “अनादिनिधनं विष्णुं सर्वलोकमहेश्वरम्” । अर्थात् सबसे परम धर्म तो विष्णु ही हैं।
इस विष्णु सहस्रनाम के पाठ से भोग की प्राप्ति भी होती है और मोक्ष की भी। यह सगुणोपासक और निर्गुणोपासक, दोनों के लिए। अपने मन में जिस संकल्प और कामना के साथ आप इसका पाठ करते हैं, वह प्रलिभूत हो जाता है। यह केवल कहने की नहीं, अनुभव की बात है और मैं स्वयं इसका साक्षी हूं।
काफी लोग विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना तो चाहते हैं, लेकिन संस्कृत का उच्चारण नहीं होने के कारण नहीं कर पाते, अथवा 107 श्लोक एवं अन्य आरंभ, ध्यान, फलश्रुति आदि श्लोकों के कारण नहीं कर पाते।
इसका भी उपाय शास्त्रों में है। आप जिस कामना से भगवान विष्णु का जाप करना चाहते हैं, विष्णु सहस्रनाम में उससे संबंधित एक श्लोक के पाठ से भी वही फल प्राप्त होता है, जो संपूर्ण सहस्रनाम के पाठ से होता है।
अतः कल से #Indiaspeakdaily Web Portal पर हर कामना से संबंधित श्लोक को अर्थ सहित आपके समक्ष रखूंगा ताकि इस विकट काल में आप मन शुद्धि के साथ उस श्लोक का पाठ करें और आपको इच्छित फल की प्राप्ति हो जाए। याद रखिए सकाम उपासना भी हमारे शास्त्रों में उचित है और विष्णु सहस्रनाम की सकाम उपासना के लिए तो महर्षि अगस्त्य ने शाप विमोचन मंत्र भी दिए हैं, जिसका जाप विष्णु सहस्रनाम के पाठ से पूर्व करना पड़ता है।
अतः भगवान विष्णु को आप जैसे और जिस कामना से भजें वह आपको मिलेगा ही, क्योंकि जगत के पालन-पोषण का दायित्व उन्हीं के ऊपर है। मानव उन्हें सबसे प्रिय है, इसलिए वह मानव की मुक्ति के लिए बार-बार जन्म लेते हैं।
तो आज जो समय चल रहा है, उसमें आप विष्णु सहस्रनाम के एक श्लोक का पाठ भी मन से करते हैं और उसी अनुरूप आचरण और कर्म रखते हैं तो आपके अंदर का हर डर निकल जाएगा और इच्छित फल की प्राप्ति हो जाएगी। तो फिर कल से सकाम उपासना से संबंधित एक-एक श्लोक को लेकर आरंभ करते हैं! वंदे विष्णुं
