संदीप देव। मुझे पता चला कि हरियाणा के पानीपत में भी एक जगन्नाथ मंदिर है, जहां पुरी की जगन्नाथ यात्रा की परंपरा में 1895 से रथयात्रा चल रही है। फिर क्या था, मैं जगन्नाथ यात्रा काल में सपरिवार जगन्नाथ महाप्रभु का दर्शन करने पानीपत पहुंच गया।
वैश्य समाज के ट्रस्ट द्वारा संचालित यह बहुत ही सुंदर मंदिर है। अभी तक सरकार की नजर इसके कोष पर शायद नहीं पड़ी है, जिससे सरकारी कब्जे से यह मंदिर बची हुई है।


वैश्य-अग्रवाल समाज जहां-जहां मंदिरों का संचालन कर रहा है, बहुत ही उचित प्रबंधन से मंदिर का संचालन कर रहा है। ऐसे सरकारी भोंपू जो मंदिरों पर सरकार के कब्जे को यह कहते हुए जस्टिफाई करते हैं कि हिंदू मंदिर का सही संचालन नहीं कर सकते, उन्हें देश भर में विभिन्न हिन्दू जातीय समाज द्वारा संचालित मंदिरों का प्रबंधन देखना चाहिए। यह देखकर शायद उनकी मान्यता बदल जाए!
आदि शंकराचार्य ने अपने चारों पीठों का क्षेत्राधिकार निर्धारित करते हुए उस पीठ के शंकराचार्य के अधीन उस क्षेत्र के मंदिरों के संचालन का कार्य सुनिश्चित किया था। स्वतंत्रता के बाद सरकारों ने शंकराचार्यों के उस अधिकार को ही समाप्त कर मंदिरों को अपने कब्जे में ले कर उस धन से म्लेच्छों के तुष्टिकरण का जो अभियान आरंभ किया था, वह बदस्तूर आज भी जारी है।
1895 से संचालित पानीपत का भव्य जगन्नाथ मंदिर यह बता रहा है कि हिंदू समाज पूरी तरह से सक्षम है अपने मंदिरों का संचालन स्वयं करने में। जय जगन्नाथ 🙏
