#संदीपदेव । भारत की अन्य राजनीतिक पार्टियां जहां इफ्तार में सम्मिलित होने के लिए मुस्लिमों के बीच जाती हैं, वहीं भाजपा ने अपने कार्यालय को ही ‘इफ्तारी दफ्तर’ बना दिया है! फिर भी मूढ़, चेतनाहीन ‘संघी-सरकारी हिंदू’ आम हिंदुओं को डराते रहते हैं कि भाजपा को वोट नहीं दिया तो मुस्लिम तुम्हारा जीना हराम कर देंगे! जिंदा नहीं रह पाओगे, इसलिए भाजपा का कोई विकल्प नहीं है! अब सच देखिए:-
१) लश्कर का आतंकी तालिब हुसैन भाजपा के जम्मू-कश्मीर विंग का सोशल मीडिया प्रमुख निकलता है।
२) कन्हैयालाल का गला काटने वाला रियाज अत्तारी भाजपा राजस्थान भाजपा के अल्पसंख्यक विंग का सदस्य निकलता है।
३) संघ मुस्लिमों के लिए मुस्लिम राष्ट्रीय मंच चलाता है और हिंदू बेटियों का विवाह मुस्लिमों से कराकर कोख-जिहाद को बढ़ाने में योगदान देता है।
४) उप्र के सबसे बड़े गो तस्कर माजिद के साथी आशुतोष हिस्ट्रीशीटर को भाजपा की सरकार शंकराचार्यजी के विरुद्ध खड़ा करती है। उस गौ तस्कर आशुतोष हिस्ट्रीशीटर के साथ भाजपा के बड़े-बड़े नेताओं का संबंध उजागर होता है।
५) मुस्लिमों द्वारा संचालित बीफ कंपनियों से भाजपा चंदा लेती है और ‘पिंक रिवोल्यूशन’ व बीफ एक्सपोर्ट को खूब बढ़ावा देती है।
६) ओबीसी कोटा में मुस्लिम आरक्षण को भाजपा लगातार बढ़ाती है। बल्कि ओबीसी कोटा में मुस्लिम आरक्षण की शुरुआत ही संघियों की सरकार ने किया।
७) SC/ST आरक्षण में मुस्लिम-ईसाई को आरक्षण देने के लिए भाजपा की मोदी सरकार ही जस्टिस बालकृष्ण कमेटी बनाती है।
८) IAS/IPS वाली UPSC परीक्षा में मुस्लिम भागीदारी बढ़ाने के लिए उन्हें स्पेशल स्कॉलरशिप, मुफ्त रिहायशी कोचिंग आदि की सुविधा प्रदान करती है। परिणाम देश में एकाएक और अचानक से हर साल बड़ी संख्या में मुस्लिम चुने जाते हैं! स्वतंत्रता के 67 साल में UPSC में मुस्लिम उम्मीदवारों की सफलता दर जहां 2.5% थी, वहीं भाजपा के केवल 12 साल में यह सफलता दर 5.5-6% के बीच हो जाती है।
९) सरकारी नौकरियों में पिछले 67 सालों में जहां मुसलमानों की सफलता दर 5.5% के करीब थी, अचानक से भाजपा की मोदी सरकार में यह 10-11% हो जाती है!
१०) अल्पसंख्यक के नाम पर मुसलमानों के लिए 300 योजनाएं चलाई जाती हैं। अल्पसंख्यकों के लिए चलाई जा रही इन योजनाओं में 70-80% लाभार्थी मुस्लिम हैं!
११) राम मंदिर के निर्माण में मिट्टी डलवाने से लेकर मंदिर की कारीगरी तक में मुस्लिमों को शामिल किया जाता है।
१२) काशी के मंदिरों को तोड़ने में मुस्लिम मजदूर लगाए जाते हैं। इसका खुलासा तो तब हुआ जब कुछ मुस्लिम निर्माण के दौरान घायल हुए और अखबारों में उनका नाम छपा। मैं स्वयं काशी में अपनी आंखों से मुस्लिम को मंदिर पर हथौड़ा चलाते देख चुका हूं।
१३) शादी शगुन योजना और अन्य विवाह योजनाओं के जरिए सरकार खुलकर धर्मांतरण का खेल कर रही है। अंतर्जातीय व अंतर्धार्मिक विवाह करने पर 51,000₹ नगद राशि प्रदान करती है।
१४) हर राज्य चुनाव में घुसपैठियों का मुद्दा उछालना और हकीकत में रोहिंग्या घुसपैठियों को फ्लैट देना, उन्हें सारी सुविधाएं देना। पिछले 13 साल में 13,000 घुसपठिए भी यह नहीं निकाल सके हैं, जबकि अपने 10 साल के शासन में कांग्रेस की मनमोहन सरकार ने 80,000 से अधिक बांग्लादेशी घुसपैठियों को निकाल कर उन्हें उनके देश वापस भेजा था।
१५) स्वतंत्रता के बाद मजहबियों ने सबसे अधिक हिंदुओं का गला भाजपा की मोदी सरकार के दौरान काटा है, सबसे अधिक टारगेट किलिंग का शिकार हिंदू मोदी शासन के दौरान हुए हैं!
मुस्लिमों के लिए इतना सबकुछ भाजपा की सरकार कर रही है और फिर भी मुस्लिमों के नाम पर हिंदुओं को डरा कर वोट ले रही है! और ब्रेनडेड ‘संघी-सरकारी हिंदू’ रात-दिन IT cell से मिले Whatsapp झूठ को परोस-परोस कर हिंदुओं का ‘मानसिक खतना’ करने में जुटे हैं!
हर चुनाव से पहले समाज में हिंदू -मुस्लिम के नाम पर नफरत का बीज बोना और चुनाव जीतते ही मुस्लिम तुष्टिकरण की पराकाष्ठा पार करते हुए हिंदुओं को मुस्लिमों के नाम पर डराने के लिए मेनस्ट्रीम मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक अपने ‘छर्रे’ उतार देना ताकि हिंदू अन्य विषय पर सोच ही नहीं सके; यह संघ-भाजपा की आजमाई हुई पुरानी फितरत है, जिसकी गिरफ्त में हिंदू समाज फंसा हुआ है!
