संदीप देव। भारत की नरेंद्र मोदी सरकार के तहत अमेरिका स्थित भारतीय दूतावास ने SHW Partners LLC नामक अमेरिकी लॉबिंग फर्म को अप्रैल 2025 में अमेरिका में लॉबिंग के लिए हायर किया है। यह फर्म अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड के पूर्व ट्रंप एडवाइजर जेसन मिलर द्वारा लीड की जाती है। इस फार्म का इस्तेमाल ‘ट्रेड टॉक’ और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के लिए भी किया गया।



इस लॉबिंग का अभी तक भारत सरकार को स्पष्ट और ठोस लाभ नहीं दिखाई देता है। जेसन मिलर ने ट्रंप से मीटिंग्स कीं और फोटोज पोस्ट कीं, जिसमें उन्होंने “फैंटास्टिक वीक” बताया, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने उसके तुरंत बाद भारत पर 50% टैरिफ लगा दिए, जिसमें 25% रशियन क्रूड ऑयल खरीद पर पेनल्टी शामिल है।

सूचना के अनुसार, भारत सरकार इस लॉबिंग एजेंसी को सालाना $1.8 मिलियन (लगभग ₹15.7 करोड़) दे रही है, जो $150,000 (लगभग ₹1.3 करोड़) प्रति माह ठहरता है।
इसके अलावा, यह जानकारी भी आ रही है कि भारत की मोदी सरकार ने अगस्त 2025 में अमेरिका की एक दूसरी फर्म Mercury Public Affairs को भी तीन महीनों के लिए हायर किया, जिस पर $75,000 (लगभग ₹65 लाख) प्रति माह सरकार ने खर्च किया। आरोप के अनुसार, यह विदेशी एजेंसी मोदी सरकार के लिए फेडरल गवर्नमेंट रिलेशंस, मीडिया रिलेशंस और डिजिटल स्ट्रैटेजी तैयार करने का कार्य रही थी।


शायद यही करण है कि ट्रंप लगातार यह कह रहा है कि मोदी उसे खुश करने की कोशिश कर रहे हैं। ट्रंप के राष्ट्रपति बनते ही अप्रैल 2025 में भारत सरकार ने ट्रंप के सलाहकार की लॉबिंग एजेंसी को ही हायर कर लिया! परंतु इसका स्ट्रेटजिक लाभ अभी तक न तो भारत को हुआ है, न भारत सरकार को। ट्रंप भारत-पाक सीजफायर का श्रेय लेने से लेकर भारत पर जुर्माना ठोकने और हाई टैरिफ लगाने का काम धड़ल्ले से कर रहा है!
ज्ञात हो कि इससे पूर्व नवंबर 2025 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) द्वारा अमेरिका में लॉबिंग के लिए एक विदेशी फर्म को हायर करने की भी खबरें सामने आई थी।
अमेरिकी सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, आरएसएस ने वाशिंगटन-आधारित लॉबिंग फर्म Squire Patton Boggs (SPB) को अप्रत्यक्ष रूप से हायर किया, जो एक अन्य फर्म State Street Strategies के माध्यम से हुआ। यह खुलासा नवंबर 2025 में Prism Reports नामक मीडिया आउटलेट द्वारा किया गया, जिसमें अमेरिकी सीनेट में दाखिल लॉबिंग डिस्क्लोजर्स का हवाला दिया गया।






यह बात भी सामने आई है कि आरएसएस द्वारा हायर की गई फर्म Squire Patton Boggs ने पाकिस्तान के लिए भी लॉबिंग की है। SPB पाकिस्तान सरकार के लिए काम करती है और पाकिस्तान से जुड़े क्लाइंट्स का प्रतिनिधित्व करती है। यह खुलासा अमेरिकी लॉबिंग डिस्क्लोजर्स से हुआ।


SPB को संघ के पार्टनर की ओर से $330,000 (लगभग ₹2.92 करोड़) का भुगतान किया गया। आरएसएस के प्रवक्ता सुनील अंबेकर ने इन आरोपों का खंडन किया, जिसमें कहा गया कि “आरएसएस भारत में काम करता है और अमेरिका में कोई लॉबिंग फर्म नहीं हायर की गई।” उन्होंने यह भी कहा कि आरएसएस भारत में पंजीकृत नहीं है, इसलिए अमेरिकी डिस्क्लोजर्स में इसका नाम गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया हो सकता है। हालांकि, डिस्क्लोजर्स में स्पष्ट रूप से आरएसएस का नाम और पता (नागपुर, भारत) उल्लिखित है, जो खंडन पर सवाल उठाता है?

तो हर किसी को देशभक्ति का सर्टिफिकेट बांटने वाले लोग, उनका नेता, उनकी पार्टी और उनका संगठन अमेरिका लॉबिंग एजेंसी के जरिए अमेरिकी में लॉबिंग करते पाए गये हैं! ज्ञात हो कि इसी संगठन के नेताओं के अमेरिकी सरकार फंडेड #ACYPL में लंबे समय तक प्रशिक्षण का रिकार्ड भी पब्लिक डोमेन में उपलब्ध है।



वैसे कांग्रेसियों को खुश होने की आवश्यकता नहीं है। कांग्रेस की मनमोहन सरकार ने भी परमाणु करार के लिए अमेरिकी लॉबिंग एजेंसी को 2005-2010 तक हायर किया था और उसके लिए करीब 10 मिलियन $ से अधिक का भुगतान किया था।
