संदीपदेव। तुमसे ही रौशन,
मेरा आंगन!
तुमसे ही महका,
मेरा गुलशन!
तुम्हारी ही आंखों में,
मेरा चिलमन!
तुम जो नहीं तो,
सूना मेरा मन!
तुम ही हो तो,
चलता मेरा जीवन!
संदीपदेव। तुमसे ही रौशन,
मेरा आंगन!
तुमसे ही महका,
मेरा गुलशन!
तुम्हारी ही आंखों में,
मेरा चिलमन!
तुम जो नहीं तो,
सूना मेरा मन!
तुम ही हो तो,
चलता मेरा जीवन!
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