संदीप देव। यह पत्र मैं कल क्रिसमस के मौके पर भी लिख सकता था, लेकिन आज लिखा! मुझे लगा कल क्रिसमस की खुमारी जब हिंदुओं के सिर से उतर जाएगा तो क्या पता वो आज यह लेख पढ़ कर कुछ पल सोचें? तो मेरा यह पत्र उन हिंदुओं के लिए है, जो वाकई सोचते हैं और जिनकी मस्तिष्क उर्वरा है!
हिंदुओं को उनका शास्त्र और शास्त्रीयता ही बचाएगा। अन्यथा जो संगठन, संत और नेता क्रिसमस मना रहे हैं, असल में वह धर्मांतरण रोक नहीं, बल्कि बढ़ा रहे हैं। उन संस्थाओं, नेताओं और बाबाओं की क्रिसमस मनाती तस्वीरें मिशनरी धर्मांतरण के लिए उपयोग में लाती हैं और यह तक प्रचार करती है कि वह भी यीशू के भक्त हो चुके हैं!
उदाहरण के लिए विवेकानंद का बयान है कि वह ईसू का चरण अपने रक्त से धोना चाहते थे तो देख लीजिए आज रामकृष्ण मिशन में यीशू की पूजा परमानेंट हो चुकी है। (Pic2, 3 & 4) फ्रीमेशनरी विवेकानंद जी की बड़ी-बड़ी मूर्ति फ्रीमेशन सोसायटी में लगी है जो हिंदुओं को हिंदू धर्म छुड़वाने के काम आती है!



जो संघ हिंदुओं के रक्त, समय, और धन से खड़ा हुआ है, उसकी हिंदुत्व की परिभाषा ही बिना मुस्लिम और ईसाई के पूरी नहीं होती! अपनी बेटी तक संघी दूसरे मजहब को बड़े आराम से देते हैं और कन्हैयालाल का गला काटने वाला रियाज अत्तारी उन्हीं के संगठन से निकलता है।
संघी चर्च में झाड़ू लगाकर अपनी आत्महीनता को आत्मगौरव समझते हैं!(Pic1). ईसाई अमेरिकी सरकार के फंड से चलने वाले #ACYPL में प्रशिक्षण प्राप्त कर संघी कितना देश हित का निर्णय लेते हैं यह आप 300 अल्पसंख्यक योजना और मणिपुर की स्थिति देखकर समझ जाइए!

जो संघी नेता तथाकथित ‘हिंदू हृदय सम्राट’ माने जाते हैं, उनके यीशू प्रेम की बेबसी देखिए कि मणिपुर में कुकी क्रिश्चियन के लिए अपनी ही पार्टी के मैतेई मुख्यमंत्री को उन्हें हटाना पड़ा! अमेरिका की लगातार बत्तमीजी के बाद भी आज चुप रहना पड़ रहा है!
अमेरिका द्वारा भारत की संप्रभुता पर बार-बार हमले के बावजूद संघ अपने मुख्यालय में वाशिंगटन पोस्ट के पत्रकार को दावत देता है और अमेरिकी एजेंसी को अपने PR के लिए हायर करता है!
चर्च की समलैंगिकता और व्यभिचार को आज कानून बनाकर इसी संघ की सरकार ने लागू कर दिया है।
अतः इस गलतफहमी में मत रहिए कि सभी पंथों के प्रति समान भाव आपको महान बनाएगा! बल्कि सच तो यह है कि अन्य पंथ आपके समभाव के कारण आपके ही हिंदू धर्म का विनाश करते रहे हैं और आज भी कर रहे हैं।
आखिर क्या कारण था कि कैथोलिक रोनाल्ड रीगन की सरकार ने ईसा मसीह का सच बताते ही ओशो को हथकड़ी-बेड़ी पहना कर अमेरिका में घुमाया, जेल में डाला और दुनिया को आदेश दिया कि इन्हें कोई शरण न दे। 21 देशों ने उनके विमान को उतरने नहीं दिया? उसके पहले या उसके बाद अमेरिका ने ऐसा किसी भारतीय संत, संगठन या नेता के साथ तो ऐसा नहीं किया? यह सवाल नहीं उठता आपके मन में?
सवाल स्वयं से पूछिए तो ही जवाब मिलेगा! अन्यथा भेड़ मस्तिष्क के साथ तो आपको केवल हां..हां ही करना है! और ‘हां’ में मेहनत नहीं लगती, ब्रेन को ताक पर रखकर केवल पिछलग्गू बनना ही काफी होता है! अतः सोचिए! सनातन धर्म आपको सोचने की स्वतंत्रता देता है!
