श्वेताभ पाठक श्वेत प्रेम रस। प्रश्न : कभी कभी ऐसा क्यों लगता है भगवान हैं कि नहीं
उत्तर: – *आदरणीय श्वेताभ पाठक भैया जी* —
हम्म ।
क्योंकि अभी वह रस नहीं चखा है न ।
आप ऐसे ही बन गए ?
बिना भगवान के ??
आप अपने अंदर घुसते हैं भोजन करने के बाद कि अब कौन कौन से पोषक तत्वों को कैसे पचाना है , किस विटामिन प्रोटीन एमिनो एसिड्स इत्यादि को कौन से cells में transfer करना है ।
किस्से मांस बनना है , किससे मेद , किससे मज्जा , किससे रक्त , किससे वीर्य ।
आप तो अंदर घुसकर नहीं बताते या command देते हैं कि सुन रे भोजन के रस अब तू जाकर वीर्य बना , रक्त बना ।
लेकिन सब व्यवस्थित रूप से चल रहा है ।
कोई तो है न इसको govern करने वाला ??
इतनी बड़ी सृष्टि , आप तो संचालित नहीं कर रहे होंगे ।
कोई तो सत्ता है जिसके कारण यह सब विधिवत चल रहा है बिना किसी व्यवधान के ।
तो आपने ताजमहल नहीं देखा या राममन्दिर नहीं देखा तो इसका अर्थ कदापि नहीं है कि उसका अस्तित्व नहीं है ।
जो देखकर आये हैं उससे उसका पता पूछिये , कैसे जाया जाएगा वह पूछिये ।
यहीं से देखकर कि पता नहीं होगा भी या नहीं , किसी चीज़ को नकारा नहीं जा सकता ।
तब तो आप किसी scientist की बात नहीं मानते होंगे जब वह बोलते होंगे कि Atom , nucleus , proton , electron , quarks आदि हैं । क्योंकि इनको भी आपने कभी नहीं देखा है , बस पढा और सुना है ।
पूरा जीवन आपने इन्हें पढ़ने में लगा दिया और अब जीवन भी खत्म होने वाला है लेकिन यह सब कभी नहीं दिखे ।
तो क्या आपने जाकर उन scientists और अध्यापकों का गिरेबान पकड़ा कि क्यों बे , पूरा जीवन जिसे पढ़ने में नष्ट किया वह तो आज तक दिखा नहीं ।।
तुमने मुझे आकाश में झूठे मूठे ही हाथ पांव मरवाया ??
आपने कभी पूछा ??
नहीं पूछा होगा क्योंकि सांसारिक बातों पर हम जितना विश्वास करते हैं उतना अगर किसी सन्त महापुरुष या शास्त्रों की बात पर कर लेते तो हमारा कल्याण हो जाता और हमें वह परमानंद मिल जाता जिसके लिए इस विश्व का प्रत्येक जीव प्रतिक्षण कर्म कर रहा है ।
एक गाड़ी खरीदते हैं और उसे अपना बहुमूल्य जीवन सौंप देते हैं लेकिन आप उससे यह नहीं पूछते कि हम कैसे मान लें कि यह सही गाड़ी है , इसका engine blast नहीं करेगा थोड़ी देर बाद ।
आँख मूंदकर समर्पण ।
संसार मे हम कुछ भी लेते हैं , आँख मूंदकर समर्पण ।
एक चाट वाले गोलगप्पे वाले तक से नहीं पूछते कि यह बताईये कि अगर मैं इसे खाकर मर गया तो ?
क्या gaurantee है कि जहर नहीं मिलाया होगा या यह पोषणयुक्त भोजन है ।
लेकिन उस पर हम पूर्ण समर्पण ।
बस एक शास्त्र वेद सन्त महापुरुष के पास जाने पर हम ब्रह्मा , बृहस्पति के समान बुद्धि चलाने लगते हैं ।
इनकी महत्त्ता हम गोलगप्पे वाले नाई वाले से भी कमतर करते हैं ।
सारी बुद्धि हमारी बस इसी क्षेत्र में चलती है ।
संसार में जाते ही स्त्री पति बेटा नाती पोता मूत्र कलत्र गोलगप्पा , टिक्की , जलेबी ,इत्यादि वालों पर पूर्ण समर्पण ।
तो जब तक समर्पण भाव उस क्षेत्र की ओर नहीं आएगा तब तक भगवान कोसों दूर रहेंगे ।
