अजय शर्मा काशी। 2005–06 में जब उन्होंने माँ गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए सम्पूर्ण गंगा पदयात्रा प्रारम्भ की और गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित कराने का आंदोलन चलाया, तब तत्कालीन कांग्रेस सरकार के समय उन्हें “भाजपाई” कह दिया गया।
2007–08 में जब काशी में मंदिर तोड़े जाने की खबर पर वे प्रशासन से टकरा गए, तब बसपा सरकार के समय उन्हें कभी “भाजपाई” तो कभी “सपाई” घोषित किया गया।
2015 में काशी में गणेश प्रतिमा के अपमान के विरोध में जब उन्होंने अपने शिष्यों के साथ आंदोलन किया और लाठियाँ खाईं, तब सपा सरकार के समय उन्हें “भाजपाई नेता” कहा जाने लगा।
2019–20 में जब काशी में मंदिरों को तोड़े जाने के विरोध में उन्होंने भीषण गर्मी में देवालयों की रक्षा के लिए सम्पूर्ण काशी की नंगे पाँव पदयात्रा की, तब भाजपा सरकार के समय उन्हें “कांग्रेसी नेता” बताया गया।
2022 में छत्तीसगढ़ के कवर्धा में भगवा ध्वज के अपमान के विरोध में जब उन्होंने लगभग एक लाख सनातनियों के साथ 108 फीट ऊँचे स्तम्भ पर विशाल भगवा ध्वज फहराया, तब वहाँ की कांग्रेस सरकार ने उन्हें “भाजपाई नेता” के रूप में प्रचारित किया।
और जब उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि प्रकरण में न्यायालय में शास्त्रीय प्रमाणों के आधार पर भगवान श्रीराम के पक्ष में गवाही दी, तब कुछ लोग उस धर्मयुद्ध की पीड़ा को भुलाकर केवल श्रेय लेने पहुँच गए।
और आज – जब वही संन्यासी सनातन धर्मशास्त्रों में वर्णित गौमाता को “गौ-राष्ट्र माता” का दर्जा देने तथा देश में पूर्ण गौ-हत्या निषेध की आवाज़ बुलंद कर रहे हैं, तो वर्तमान सत्ता के कुछ समर्थकों की दृष्टि में भी वे अचानक “विपक्षी नेता” बन बैठे हैं।
अब प्रश्न यह है –
जो संन्यासी हर सरकार के समय धर्म, गंगा और देवालयों की रक्षा के लिए खड़ा हुआ, वह आखिर किस दल का नेता है? या फिर सत्य यह है कि- जो धर्म की बात करता है, उसे हर सत्ता अपने विरोधी दल का आदमी घोषित कर देती है।
संन्यासी को राजनीति में घसीटना बहुत आसान है, पर धर्म की रक्षा के लिए सत्ता से टकराने का साहस सबमें नहीं होता। इसलिए ज़रा ठहरकर सोचिए- दोष उस संन्यासी का है या उस व्यवस्था का जो हर धर्मस्वर को राजनीति के चश्मे से ही देखने की अभ्यस्त हो चुकी है। और अंत में हम सबके लिए एक प्रश्न- क्या हम आने वाली धर्मनिष्ठ पीढ़ी को इसका उत्तर दे पाएँगे? या फिर धर्म की आवाज़ भी राजनीति के शोर में दबा दी जाएगी? धर्मो रक्षति रक्षितः।
