श्वेताभ पाठक ( श्वेत प्रेम रस ) प्रश्न: भैया, जो ज्वाला माता जी का मंदिर है जहां खुद से ज्योति जगती रहती है,उसका क्या रहस्य है, कृपया मार्गदर्शन करे।
उत्तर:- आदरणीय श्री श्वेताभ पाठक भैया जी:-
पृथ्वी के भूगर्भ में बहुत सी inflammable gases होती हैं और वह धीरे धीरे पृथ्वी के किसी भी aperture से निकलती हैं और जब वह वायु या oxygen के सम्पर्क में आती हैं तो वह ज्वलनशील हो जाती हैं ।
यह मुख्यतः पहाड़ों पर अधिक होता है जहाँ पृथ्वी के अंदर गर्म होकर इन पहाड़ों का निर्माण हुआ हो ।
यह सब पहाड़ पृथ्वी के अंदर मौजूद विभिन्न elements और मिट्टी के विभिन्न दाब और ऊष्मा से बने हैं कई करोड़ वर्ष पहले ।
तो पृथ्वी के अंदर यह लावा बनता और उठता रहता है और फिर ठंडा होकर नीचे जाता है ।
इसके कारण पहाड़ों पर जो बहुत ठंडे होने के बावजूद भी भूगर्भ से गर्म पानी के स्रोत बन जाते हैं जैसे मणिकर्ण साहिब में ।
तो ऐसे असंख्य स्रोत निकलते रहते हैं पृथ्वी के भूगर्भ से ।
यह ऐसा नहीं है कि केवल भारत में पाया जाता है , यह विभिन्न देशों में कई कई जगह पाया जाता है ।
ऐसे ही है एक Door to Hell , यहाँ भी बस एक बार किसी छेद से gas निकली थी और 1971 में यहाँ आग की लौ दी गयी , वह आज तक लगातार जल रहा है और बहुत बड़ा crater की तरह विकसित हो गया है ।
क्योंकि यहाँ खोद दिया गया था जिसके कारण यह आग भयंकर हो गयी और आज तक बहुत कोशिश के बाद भी नहीं बुझ पाई और लगातार जल रही है ।
ऐसे ही एक Newyork में है Eternal Flame falls है , वह भी जवाला जी की तरह निरन्तर जलता रहता है ।
ऐसे ही Erta Alle है जिसे smoking mountain कहते हैं , ethiopia में , वहाँ भी continous flame जलता रहता है ।
ऐसे ही Taiwan में एक Fire Cave है , जैसे ज्वाला जी हैं , वह भी को continous जलता रहता है । हमारे यहाँ तो अब तक नारियल फोड़े जाने लगते ।
ऐसे ही Absheron Peninsula में एक है
Yanar Dag , वह भी निरंतर जलता रहता है ।
ऐसे ही Turkey में Yanartas है , Flaming stone बोलते हैं जिसे , वहाँ तो जगह जगह ज्वाला देवी जी हैं और बहुत से flames या ज्योति जलती रहती है ।
तो हम लोग इसे भगवदस्वरूप मानकर इसकी आराधना करते हैं और ठीक भी है हमारी संस्कृति प्रकृति के कण कण में उस परम शक्ति का आभास करती है और उसकी पूजा करती है ।
Shwetabh Pathak
Shwet Prem Ras
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