“सोनम-वांगचुक” हैं सच्चे-योद्धा
“सोनम-वांगचुक” हैं सच्चे-योद्धा , भारत के असली-नायक हैं ;
राजनीति में इनको लाओ , ये ही पीएम के लायक हैं ।
महाविनाश से बचेगा भारत , यदि “सोनम” को ले आओ ;
अब्बासी-हिंदू नेता के रहते या मिट्टी में मिल जाओ ।
बुद्धिमान – वैज्ञानिक “सोनम” , चरित्रवान हैं देशभक्त ;
इनका विरोध करने वाले हैं , अब्बासी-हिंदू के अंधभक्त ।
अंधभक्त सब अक्ल के अंधे , कुएं में गिरने को तैयार ;
थोड़े से गंदे – धन का लालच , देश मिटाने को तैयार ।
भारत लगभग मिटने वाला है , चारों ओर मौत की खाई ;
चौकीदार सब चोर हो चुके , सरकारें हैं हरजाई ।
बदल गई रक्षक की स्थिति , बना दिया सबको भक्षक ;
मर्देमुजाहिद बन गया है नेता , काला – नाग है ये तक्षक ।
जिसको अपना-धर्म न प्यारा , कैसे भारत को प्यार करेगा ?
पुरस्कार लेकर दुश्मन से , भारत का बंटाधार करेगा ।
है जाग रही भारत की जवानी , जेन-जी सड़कों पर आया ;
किसी के रोके नहीं रुकेगा , ये सौभाग्य देश का आया ।
जेन-जी सौभाग्य देश का , नेतृत्व श्रेष्ठ देना होगा ;
“सोनम” को फौरन रिहा करो , उसका नेतृत्व ही देना होगा ।
सर्वश्रेष्ठ अब मार्ग यही है , भारत के कल्याण का ;
अब्बासी-हिंदू दुर्भाग्य देश का , दुश्मन हिंदू के प्राण का ।
जंगल – राज चलाना चाहे , भारत – वर्ष मिटाना चाहे ;
अब्बासी – हिंदू भारत का नेता , हिंदू – धर्म मिटाना चाहे ।
धर्महीन – अज्ञानी हिंदू , महामूर्ख बनता जाता है ;
नाटक-नौटंकी में फंसता जाता , सदा ही धोखा खाता है ।
“सोनम” का सब करो समर्थन , जेन-जी आगे आओ ;
मौत के मुंह में देश जा रहा , भारत का अस्तित्व बचाओ ।
पीछे हटने का कोई न कारण , अब तो आगे ही बढ़ना है ;
पीछे के मार्ग बंद हैं सारे , भारत का भाग्य बदलना है ।
जेन-जी का खून-पसीना , भारत का इतिहास लिखेगा ;
अब्बासी – हिंदू भारत का नेता , देश छोड़कर भागेगा ।
पर जायेगा वो कहाॅं भाग कर ? उसको पकड़ मंगाना है ;
हाथ हथकड़ी पांव में बेड़ी , सैनिक-जहाज़ में आना है ।
सारे-पापों की सजा मिलेगी , संगी-साथी भी सब निपटेंगे ;
भारत को लूटने वाले जितने , सजा अधिकतम भुगतेंगे ।
कोई नहीं बचे अपराधी , कानून का शासन लाना है ;
जेन-जी ही कर सकता है , अच्छी-सरकार बनाना है ।
“जय सनातन-धर्म”, रचनाकार : ब्रजेश सिंह सेंगर “विधिज्ञ”
