संदीप देव। अब ‘भाजमुल्ले’ जनरल जीडी बख्शी को भी गाली देंगे? ‘भाजमुल्लों’ की पूरी जमात देशद्रोही हो चुकी है! पहले इन्होंने हिंदू धर्म छोड़ा, अब भारत राष्ट्र को भी तिलांजलि दे दी है। इनके लिए ‘अजैविक सुल्तान’ ही इनका खुदा और राष्ट्र है!
ये मेरी शिकायत करते हैं कि मैं इनको ‘भाजमुल्ला’ कहता हूं! मैं इनको ‘भाजमुल्ला’ ऐसे थोड़े न कहता हूं। इनके व्यक्तिवादी आचरण और कट्टरपंथी अब्राहमिकों के व्यक्तिवादी आचरण में जरा साम्यता देखिए:-
- कट्टरपंथी मजहबी देश से ऊपर मजहब व पैगंबर को रखते हैं! भाजमुल्ले भी भारत राष्ट्र से ऊपर संघ-भाजपा और अपने नरेंदर को रखते हैं!
- कट्टरपंथियों का एक ही पैगंबर है! भाजमुल्लों का भी एक ही नरेंदर है!
- कट्टरपंथियों के लिए जैसे उनका पैगंबर ही आखिरी है, वैसे ही भाजमुल्लों के लिए नरेंदर का कोई विकल्प नहीं है। वह उनके आखिरी मसीहा हैं!
- कट्टरपंथी मंदिर-मूर्तियों से घृणा करते हैं, उसे तुड़वाते हैं। उनके पैगंबर ने ही इसकी शुरुआत की थी।
आधुनिक समय में भाजमुल्लों के ‘अजैविक सुल्तान’ ने ही मंदिर-मूर्तियों को तुड़वाने की शुरुआत गुजरात से की थी और काशी होते हुए अयोध्या, उज्जैन- सभी जगह मंदिर-मूर्तियों का विध्वंस कर उसकी आध्यात्मिक ऊर्जा क्षेत्र को समाप्त किया और उसे पर्यटन क्षेत्र में बदल दिया। मूर्तियों के प्रति घृणा जर्मनी की धरती पर उन्होंने उगला था!
- कट्टरपंथी मजहबियों ने सनातन धर्म शास्त्रों को जलाया, नष्ट किया, भाजमुल्लों के संघावत ने भी शास्त्रों को पुनः लिखवाने की बात कही।
- भारत के मुस्लिम आक्रांता शासकों में से अनेक में समलैंगिकता और दूसरे की बीबीयों को भोगने की बीमारी थी। संघावत ने उसी राह पर चलते हुए महाभारत में समलैंगिकता साबित करने का प्रयास किया और भाजपा सरकार ने समलैंगिकता और विवाह के बाहर के अवैध संबंधों को भी अपराध से बाहर कर इसे वैधता प्रदान किया।
- इस्लाम में बुतपरस्ती मना है, लेकिन उन्होंने मस्जिदपरस्ती को अपनी सुविधा से जायज बना दिया गया।
उसी तरह सनातन देवी-देवताओं को ५० साल छोड़ने का नारा देकर संघ ने एक अस्त्र-शस्त्र विहीन ‘छद्म देवी’ ‘भारत माता’ को गढ़कर हिंदुओं के समक्ष शस्त्रविहीन स्त्री का वह रूप रखा, जिस पर कभी भी आक्रमण किया जा सकता है, जिसे लूटा और दबाया जा सकता है! इन्होंने चक्रवर्ती सम्राट भरत के नाम पर जिस भारत की पहचान सनातन शास्त्रों में है, उन सम्राट भरत के पौरुष को भारतीयों के मस्तिष्क से ही मिटा दिया। इससे हिंदुओं को कायर और पहचान-विहीन बनाने में संघ को मदद मिली।
- अब्राहमिकों को जैसे हिंदुओं की सामान्य जाति खासकर ब्राह्मणों से चिढ़ है, संघ-भाजपा और अजैविक सुल्तान को भी सामान्य जाति खासकर ब्राह्मणों से भयंकर चिढ़ है, जो उनके ‘हिसाब चुकता’ का नारा से लेकर मंडल कमीशन, SC/ST act, UGC act आदि से बार-बार प्रकट होता रहता है!
- अब्राहमिकों के साथ कम्युनिस्टों ने मिलकर यह झूठा नरेशन गढ़ा की ब्राह्मणों ने जाति बनाई और सदियों तक दलितों का शोषण किया, जबकि १००० साल शासन इस्लाम-इसाईयत का ही था, लेकिन वो खुद पर यह दोष नहीं मढ़ते।
संघावत और संघी सरकार भी यही नरेशन गढ़ती रही है। संघावत का बयान याद कीजिए- ‘जाति ब्राह्मणों ने बनाई’, ‘2000 साल से दलितों पर अत्याचार हो रहा है’, ‘200 साल तक और आरक्षण देंगे’ वगैरह।
- अब्राहमिक यहूदी जैसे पीठ में छुरा खोंपने, ब्लैकमेलिंग के जरिए विश्व पर कंट्रोल करने, झूठ बोलने और विक्टिम कार्ड खेलकर नरेशन गढ़ने के लिए कुख्यात रहे हैं, भारत में वही ‘पैटर्न’ संघियों का भी आरंभ से ही रहा है!
- अब्राहमिक जैसे मीडिल-ईस्ट में अमेरिका के चाटुकार और उसके टूल हैं, भारत में वैसे ही संघी भी अमेरिकी चाटुकार और टूल हैं!
यदि ये भाजमुल्ले जो कल तक जनरल बख्शी को राष्ट्रवादी कह कर सिर पर बैठाते थे, आज उन्हें गाली देने लगें, कोसने लगें तो आश्चर्य मत कीजिएगा! वह अपने एक मात्र ‘खलीफा’ और उसकी ‘खिलाफत व्यवस्था’ के विरुद्ध किसी का सच न सुनना चाहते हैं, न देखना चाहते हैं!

अब्राहमिकों के लिए जैसे अभी भी आसमान खंभों पर टिका है, वैसे ही भाजमुल्लों के लिए सारा विश्व उनके एक मात्र विश्वगुरु ‘अजैविक सुल्तान’ की मेहरबानी से ही चल रहा है!
