संदीप देव। महाराष्ट्र सरकार द्वारा 11 मई 2026 को गुपचुप तरीके से जारी किया गया ‘महाराष्ट्र देवस्थान इनाम निर्मूलन (मसौदा) अधिनियम 2026’ सतह पर प्रगतिशील भूमि सुधार और किसानों/झोपड़पट्टी वासियों को मालिकाना हक देने का एक लोकलुभावन प्रशासनिक कदम दिखाई देता है। परंतु, इसका गहरा विधिक और ऐतिहासिक विश्लेषण यह सिद्ध करता है कि यह बहुसंख्यक सनातनी हिंदू समाज पर इतिहास का सबसे बड़ा ‘सांस्कृतिक हमला’ है।
महाराष्ट्र में शिवाजी महाराज, अहिल्याबाई माता एवं पेशवाओं के शाही आदेश को खत्म कर हिंदू देवताओं को जमीन से बेदखल करने की तैयारी!
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Journalist from 2.5 decades | Bestseller Author by Nielsen Jagran | Awarded the Sahitya Akademi Award for his book writing | He also received the Pandit Madan Mohan Malaviya Award and the Shivaji Ratna Award for journalism | Founder Editor of https://www.indiaspeakdaily.in
2 Comments

जिस जनसांख्यिकीय बदलाव की ओर आप इशारा कर रहें हैं वो आर्थिक लाभ से इतर इस सरकार का एक बहुत बड़ा उद्देश्य हैं. दरअसल सरकार अपने बिल्डर लॉबी को फायदा पहुंचाकर यहाँ की डेमोग्राफी ही पूरी तरह से बदल देना चाहती हैं.
सरकार उत्तर भारत के बहुसंख्यक ब्रेनडेड सरकारी हिन्दुओं को यहां बसाकर ना सिर्फ़ मराठी सभ्यता को मिट्टी में मिलाना चाहती हैं अपितु अपने लिए स्थायी रूप से वोट बँक का इंतज़ाम करने की उसकी दूरगामी रणनीती का यह अहम हिस्सा हैं.
यह ठीक उसी तरह हैं जैसे उनके फादरलॅण्ड में फादर गज़ा और वेस्ट बैंक की ज़मीन सेटलर को बसाकर अपना कब्ज़ा स्थायी करते हैं.
आपने मेरे प्रदेश के इस अहम मुद्दे को देश के सामने तथ्यों सहित पेश किया इसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद संदीप जी 🙏 🙏 🙏
कृपया इस सरकार को ‘धर्मनिरपेक्ष ‘ सरकार मत कहिए. धर्मनिरपेक्ष सरकारे सभी धर्मों को समान संरक्षण प्रदान करती हैं. हाँ, इनको ‘ अब्राहमिक ‘ सरकार कहना ज्यादा उचित होगा.
भगवान की जमीन भगवान की ही रहती है!यह तो एक तरह से दादागिरी है। (मेरे बाबा जी ने मंदिर के साथ साथ कृषि योग्य जमीन जो नदी के किनारे थी, पुजारियों को दान में दी थी!आज भी यथावत है)। यदि वक्फ की जमीन अल्लाह की है, तो हमारे इष्ट की जमीन भी भगवान की है।