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Home » वैचारिकी » संघवाद » संघ की पोल खोल -4 : संघ प्रचारकों का पर्दाफाश
संघवाद

संघ की पोल खोल -4 : संघ प्रचारकों का पर्दाफाश

Courtesy Desk
By Courtesy Desk 17 Min Read
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17 Min Read
India Speaks Daily - ISD News
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संजीव जोशी। कम्युनल, देशद्रोही, पाकिस्तानी, isi का एजेंट, कांग्रेसी दलाल और भाँती भांति कि उपमायें जिन्हें मैं लिख भी नहीं सकता!सोच रहा हूँ कहाँ से शुरू करूँ? २०१२ से फेसबुक मैं हूँ और रेगुलर हूँ लेकिन जिस तरह की प्रतिक्रिया हमारी वेब #ISD पर डाली एक पोस्ट पर मिली! उन्हें पढ़कर यह लगा कि हम सोये लोगों को जगाने की कोशिश कर रहे हैं. उन अंधों को आइना दिखाने की कोशिश कर रहे हैं जो अपने अंदर झांकना नहीं चाहते. वैसे सच भी है गंजे को कंघी देंगे तो वह घाव ही करेगा अपने सर पर. कम्युनल, देशद्रोही, पाकिस्तानी isi का एजेंट, मुल्ला, कांग्रेसी दलाल और भाँती भांति कि उपमायें जिन्हें मैं लिख भी नहीं सकता क्योंकि मैं माता सरस्वती का अपमान नहीं कर सकता न मेरे संस्कार मुझे ऐसे करने की आज्ञा देते हैं!

इतनी गालियां पढ़कर ऐसा लगा कि लोग कितने भरे हुए हैं? जाने किस बात का गुस्सा लेकर दूसरे को नोचने को तैयार खड़े है? बिना सोचे समझे जाने बूझे! मै जवाब दे सकता था! लेकिन एक महात्मा की बात याद आ गयी कि जो चीज मैंने ली ही नहीं तो मेरी कैसे हो सकती है! ऐसे शब्दवीरों में एक भी ऐसा भी वीर नहीं मिला जो कि मुझे इनबॉक्स कर पूछे कि अपने क्या लिखा है बस गालियां लिख दी! काम ख़त्म भड़ास निकल गयी हो गयी राष्ट्र सेवा! दया आती है मूढ़मतियों पर जो बिना सोचे समझे कुछ भी कह देते हैं

कुछ लोग ऐसे भी थे जिन्होंने पोस्ट पूरी पढ़ी और लोगों को समझने की कोशिश भी की पहले पोस्ट पढ़िए किन्तु कोई पढ़े तब न भेड़ो कि तरह कूदने लगे कुँए में एक के पीछे एक!खैर संघ के बारे में आज दूसरी बात रख रहा हूँ उनके प्रचारकों को लेकर! मेरी सभी रायचंद और ज्ञानियों से विनती है कि मेरी पोस्ट पर न आयें ताकि उनके अपशब्दों से सरस्वती का अपमान न हो!

नितिन शुक्ला।‌ इस पोस्ट के बाद शायद मुझे संघ और उसके घटक संस्थानों से हमेशा के लिए बैन कर दिया जाए, हो सकता है कि मुझ पर कानूनी कार्यवाही भी हो जाये, क्योंकि इस पोस्ट में संघ के प्रचारकों का पर्दाफाश करने वाला हूँ, पर्दे के पीछे की उनकी छुपी हुई ज़िन्दगी आज आप सबके सामने लाने वाला हूँ, बंद कमरे में प्रचारकों के क्रिया कलाप, जैसा आप सोचते हैं उससे ठीक उलट है संघ प्रचारकों कि जिंदगी, इस पोस्ट को पढ़ने के बाद प्रचारकों के बारे में आपकी सोच पूरी तरह बदल जाएगी, आपकी आंखें फटी रह जाएंगी और आपके कानों से धुआं निकलने लगेगा, पोस्ट थोड़ी लंबी है इसलिए अंत तक पढ़े क्योंकि इस पोस्ट में कई बार कई मोड़ और उतार-चढ़ाव आएंगे।

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संघ यानी वो संस्था जिसे BJP का माई-बाप कहा जाता है, कहा जाता है कि सरकार के निर्णय असल में संघ द्वारा ही लिए जाते हैं या संघ से प्रभावित होते हैं, सरकार के ऊपर भी यह सुपर सरकार हैं इसलिए इन्हें सारी सुविधाएं मुहैया होती हैं, मेरा कुछ दिन पहले संघ की एक इकाई में जाना हुआ वहां का अपना एक्सपीरियंस आप सब के साथ साझा कर रहा हूं।

रात को पहुंचने में हम लेट हो गए करीब रात्रि 11:00 बजे पहुंचने के बाद भोजन किया और प्रांगण में खड़े थे कि अचानक एक कार का आना हुआ, कार के आते ही अफरा-तफरी सी मच गई मानो प्रधानमंत्री मोदी आ गए हों, कार से एक व्यक्ति उतरे और और सीधे फुर्ती से अपने कमरे की ओर बढ़ गए थोड़ी देर बाद वह बाहर आए और पूरे बिल्डिंग का मुआयना किया इसके बाद कुछ विशिष्ट लोगों के साथ वह मीटिंग में लग गए, अब तक में में समझ चुका था यह कोई सामान्य व्यक्ति नहीं बल्कि कोई अति-विशिष्ट व्यक्ति हैं!

अगले दिन सुबह मुझे पता चला कि वह संघ के राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारी हैं बोले तो बहुत बड़े पदाधिकारी, मुझसे राज्य स्तर के एक पदाधिकारी ने कहा कि मैं उनसे मिल लूं, मैं थोड़ा हिचकिचाया कहां राजा भोज कहां गंगू तेली? कहां राष्ट्रीय स्तर के संघ के पदाधिकारी जिनका उठना-बैठना केंद्रीय मंत्री से लेकर मोदी तक होगा और कहां मैं जिसे लोकल विधायक भी नहीं पहचानता, वैसे भी मैं अपनी ईगो में रहता हूँ और लल्लो चप्पो से बहुत दूर रहता हूं, नेताओं की चरण वंदना अपने बस की बात तो है नहीं इसलिए दूर रहने मैं ही भलाई समझता हूं, भाई ईगो तो अपन मैं ऐसी कूट कूट कर भरी है कि पूछिये मत, औकात भले ही 2 कौड़ी की ना हो पर ईगो मोदी से भी ऊपर है अपनी, वह मुझे हाथ पकड़ कर उनके कमरे में ले गए और उनसे मेरी मुलाकात करवाई जिस सहजता से वह मुझसे मिले वह चौंका देने वाली थी, बेहद ही सरल स्वभाव यकीन ही नहीं हो रहा था कि किसी राष्ट्रीय स्तर के संघ के पदाधिकारी से बातचीत हो रही है, उन्होंने बैठने को कहा और इसके बाद शुरू हुआ लंबी बातों का सिलसिला, शायद 1.5 घंटे उनसे बातचीत हुई वो भी पहली ही मुलाकात में, कमाल का अनुभव था ।

रूढ़िवादी और अनपढ़ टाइप धोती कुर्ते वाले संघ प्रचारक : यदि आप कभी किसी संघ के प्रचारक को देखेंगे तो वह या तो आपको धोती कुर्ते या कुर्ते पजामे में नजर आएंगे और ऐसे में अक्सर हम उन्हें रुढ़िवादी व कम पढ़ा लिखा समझ लेते हैं, मैं भी उन्हें हिंदी मीडियम टाइप ही समझता था, लेकिन मेरी पहली मुलाकात के बाद मुझे इस बात का एहसास हो गया कि संघ के प्रचारक बेहद पढ़े-लिखे और इंटेलेक्चुअल बोले तो बुद्धिजीवी होते हैं, गजब का ज्ञान और गजब की नॉलेज, कोई M.Tech (Gold Medalist), कोई Doctor, तो कोई PhD एक से बढ़ कर एक उच्च शिक्षित, सभी के पास लेटेस्ट Android मोबाइल और उन्हें चलाने का पूरा तजुर्बा, ना सिर्फ इतना, जो मुझे नहीं मालूम था उसका भी ज्ञान उन्हें था, बेहद खुले दिमाग और खुले विचारों वाले होते हैं संघ के प्रचारक, इसलिए आप उनके राष्ट्रीय पहनावे पर जाकर किसी मुगालते में ना रहिएगा वरना बुद्धि के अखाड़े में वह आपको पटक-पटक कर मरेंगे और आपको कोई कोना नहीं मिलेगा बचने के लिए ।

संघ प्रचारकों के बंद कमरे के क्रिया कलाप : आज मैं आपको एक ऐसा सच बताता हूं जिसे सुनकर आपके होश उड़ जाएंगे और आपकी सोच संघ प्रचारकों के लिए हमेशा हमेशा के लिए बदल जाएगी, विरोधियों का बदनाम करने की साजिश के तहत कहना है कि संघ प्रचारक बंद कमरे में कई ऐसे क्रिया-कलाप करते हैं जिन्हें वह सार्वजनिक रुप से नहीं कर सकते, बिल्कुल सही कहा मैं इस बात से शत प्रतिशत सहमत हूं लेकिन समस्या एक ही है और वह यह कि अपने 3 दिन के प्रवास पर मैंने किसी भी संघ प्रचारक के कमरे का दरवाजा बंद नहीं देखा, दरवाजे हमेशा खुले ही रहे थे, और उनमें कोई भी व्यक्ति कभी भी आ जा सकता था, ऐसे मैं जो मूर्ख यह बात करते हैं की बंद कमरे में कुछ होता है, तो मुझे उनकी अक्ल पर तरस आता है क्योंकि यहां तो मीटिंग भी दरवाजे खुले रखकर ही होती है, संघ प्रचारक से मिलने के लिए दरवाज़े खटखटाने की ज़रूरत नही होती क्योंकि दरवाज़े खुले ही रहते हैं ।

संघ प्रचारकों के जलवे ऐश की ज़िन्दगी : कई लोगों को ऐसा लगता है कि संघ प्रचारकों की बहुत ऐश की जिंदगी है और उनके बहुत जलवे हैं, ऐसे लोगों के लिए मैं सिर्फ इतना ही कहना चाहूंगा कि भगवान ऐसी ऐश की और जल्वेदार ज़िन्दगी आपको भी द्दे, संघ प्रचारक अपना सारा काम खुद करते हैं, मैं संघ के राष्ट्रीय पदाधिकारी को अपने कपड़े धोते देख चक्कर खा कर गिरने वाला था, मने जो व्यक्ति अगर अपने कपड़े फेंक भी द्दे तो उसे धोने के लिए लोग आपस मे झगड़ पड़ें की “मैं धोऊंगा” ऐसे व्यक्ति खुद अपने हाँथो से अपने कपड़े धोते हैं, कोई इतना down to earth कैसे हो सकता है यार? बात यहीं खत्म नही होती जो व्यक्ति पानी पीने के बाद अगर अपना ग्लास रखने को हो तो उसका ग्लास पकड़ने को 500 लोग दौड़ पड़ें ऐसे व्यक्ति खुद हमारे साथ लाइन में लग कर अपनी प्लेट उठा कर अपनी बारी का इंतज़ार कर के खुद से अपने लिए भोजन परोसा रहे थे, मजाल है कि कोई उन्हें serve कर दे, भोजन करते वक्त सब से मिलते जा रहे थे, छोटे से छोटा व्यक्ति भी उन से जा कर मिल सकता था, मैंने एक बार कहा था मेरी आत्मा संघी है, मैं आज भी भोजन के बाद अपनी थाली खुद धो कर रखता हूँ, अपने कपड़े खुद धोता हूँ और प्रेस भी खुद ही करता हूँ, पर मैंने ऐसा सपने में भी नही सोचा था कि एक राष्ट्रीय पदाधिकारी ऐसे करेंगे या करते होंगे ।

संघ प्रचारकों का दबदबा / दादागिरी : अब यह बात बिल्कुल सही है भाई, संग प्रचारों का जबरदस्त दबदबा है, और उनकी दादागिरी तो देखते ही बनती है, मैं भोजन करके थाली रखने ही जा रहा था कि अचानक किसी ने आवाज लगाई नितिन जी आपको भाई साहब बुला रहे हैं, मैं तुरंत कमरे में पहुंचा तो देखा कि भिंड के Member of Parliament भागीरथ जी सामने बैठे हुए हैं और उनकी स्थिति बिल्कुल ऐसी है मानो सामने संघ पदाधिकारी के रूप में उनका बॉस बैठा हो, भाई साहब ने मुझे बुलाया और सांसद साहब से परिचय कराया और उन्हें कुछ विषय बताने के लिए कहा मैंने नई टेक्नोलॉजी के बारे में उन से सघन चर्चा की, करीब 1 घंटे की चर्चा में मैंने देखा कि संघ के राष्ट्रीय पदाधिकारी बहुत ही सहजता और सरलता से बात कर रहे हैं किन्तु सांसद महोदय बिना बात के ही प्रेशर में आ रहे हैं, आज में आपको एक बात बताता हूँ, संघ को BJP की बिल्कुल भी ज़रूरत नही है और ना ही संघ का कोई भी व्यक्ति किसी सांसद या विधायक को अपने पास बुलाता है, ये खुद ही मार्गदर्शन लेने आते हैं, सच तो ये हैं कि बिना मार्गदर्शन के इनका गुजारा भी नही है, जब तक संघ BJP का मार्गदर्शन कर रहा है तब तक BJP का कोई कुछ नही कर सकता, संघ का हाँथ हटते ही BJP भी खत्म हो जाएगी, खत्म ना भी हो तो भ्रष्ट तो पक्का हो जाएगी ।

संघ प्रचारकों की चरण वंदना : भोजन के बाद में प्रांगण में खड़ा था संघ के राष्ट्रीय पदाधिकारी सब से मिलते हुए मेरे पास भी आये और चर्चा शुरू हो गयी, इतने में कुछ नवयुवक आये और पैर छूने के लिए झुके, भाईसाहब ऐसे पीछे हुए मानो उन्हें कोई करंट लगाने वाला हो, मुस्कुरा कर बोले “पैर छुलवाना संघ की परंपरा नही है”, मैं एक बार फिर अचरज से देख रहा था Nitin Shukla Shocked Sangh Rocked.

अंग्रेज़ी से नफरत करने वाले संघ के प्रचारक : सुबह सुबह मैं उठ कर नीचे आया, प्रांगण में कुछ संघ प्रचारक बैठे थे, मैं थोड़ा लेट हो गया था उसका एहसास दिलाते हुए मुस्कुराते हुए बोले उठ गए नितिन जी? अपनी आदत अनुसार मैंने जवाब दिया Good Morning Sir, ohh sorry सुप्रभात, वे मुस्कुरा दिए और बोले आएगा आएगा धीरे धीरे आएगा अंग्रेज़ी आनी चाहिए अच्छी बात है पर हिन्दी बोलने में गौरव महसूस होना चाहिए, उनकी बात सुन कर मैं सुन्न हो गया और सीधे मैदान की ओर दौड़ लगा दी ।

कड़क अनुशासित और खड़ूस संघ प्रचारक : निसंदेह संघ के प्रचारक अनुशासन प्रिय होते हैं, लेकिन अगर कोई मुझ से कहेगा तो मैं कड़क और खड़ूस शब्द को सिरे से नकार दूँगा, मेरी नज़र में सभी प्रचारक बहुत ही प्यार देने वाले थे, ये मेरे लिए बहुत अचंभे की बात थी क्योंकि जैसा मैंने सुन रखा था उन सबका व्यवहार उस से बिल्कुल उलट था, संघ प्रचारक caring और loving होते हैं, बहुत ही ज़्यादा, जितना आप सोच नही सकते उस से भी ज़्यादा, समापन सत्र के बाद संघ के राष्ट्रीय अधिकारी मेरे पास आये और बोले “कैसा लगा आपको? रुकने में परेशानी हुई होगी आपको?” मानो उन्होंने मेरे चेहरे से पढ़ लिया हो (कृपया Part – 1 पढ़ने का कष्ट करें) मैंने कहा “बहुत कुछ सीखने को मिला, कष्ट हुआ पर अगर तुलनात्मक दृष्टि से देखूं तो 100ग्राम कष्ट हुआ और एक टन ज्ञान ले कर जा रहा हूँ” मने इतनी care करते हैं कि उन्हें आपकी छोटी से छोटी असुविधा का आभास होता है, इतना प्यार करते हैं कि अनुशासन में रखते हैं और आपके भोजन से ले कर हर आराम की व्यवस्था करते हैं, और घूम घूम कर सभी छोटे बड़े कार्यकर्ताओ से बात करते हैं ।

निष्कर्ष : संघ में कोई छोटा बड़ा नही है, सबसे बड़ा कार्यकर्ता है, इसलिए यहां किसी भी पद (संघ की भाषा मे दायित्व) की कोई खास वैल्यू नही है, सबसे ज़यदा वैल्यू है काम करने वाले कार्यकर्ता की, संघ के प्रचारक मेरी नज़र में बहुत प्यारे होते हैं, बहुत ही cute होते हैं, इतना प्यार देते हैं कि आपकी वहाँ से वापस आने की इच्छा ही नही होगी, आपको उनके लिए कुछ करने की इच्छा होगी, मेरी नज़र में अगर असली संत कोई है तो वो संघ के प्रचारक हैं, इतने महान् संतों के बीच रह कर एक चीज़ अच्छी हुई मेरी ईगो सिर्फ एक दिन में 50% कम हो गयी, जिबकी संघ के प्रचारकों में ईगो होती ही नही है मने 0%, पता नही क्या है कौन सा जादू है पर जब से आया हूँ सपने भी संघ के आ रहे हैं, संघ ने हुआ पहला प्यार हो गया ।
रात 12 बजे से लिखना शुरू हुआ था और अब रात के 3 बज रहे हैं, इतनी मेहनत से अगर पढ़ लिया होता तो आज IAS होता, लेकिन यही तो संघ का जादू है जो आपको सोने नही देता, सभी लोग ज़ोर से बोलिये, भारत माता की जय, वंदे मातरम। क्रमशः…

साभार: नितिन शुक्ला जी के फेसबुक वाल से!

Courtesy Desk August 24, 2017
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