संदीप देव । बिहार के सारण में बेटी की लाश के पास बिलखता राजपूत परिवार, अनमने ढंग से खानापूर्ति करती पुलिस और सोशल मीडिया पर अट्टहास करता बलात्कारियों का ‘हिसाब चुकता’ समूह!
‘अजैविक सुल्तान’ ने ‘हिसाब चुकता’ का नारा देकर और ‘हिसाब चुकता जाति’ ने सामान्य जातियों का करेंगे शुद्धिकरण, उसकी बेटी ब्याह लाओ- जैसे नारे लगाकर सामान्य जातियों की बेटियों के समक्ष सम्मान और प्राण का संकट उत्पन्न कर दिया है। पहले सामान्य जातियों की बेटियां ‘मीम’ के निशाने पर थीं, अजैविक सुल्तान के नारों और योजनाओं ने अब उसे ‘भीम’ के निशाने पर भी ला दिया है!
सामान्य जाति के लोगों यदि थोड़ा भी सक्षम हो तो अपने बच्चों को इस देश से बाहर भेजने की तैयारी कर लो! तुम्हारे बच्चे ‘भीम-मीम’ द्वारा या तो नोंच डाले जाएंगे या फिर SC/ST act और UGC कानून में पीस दिए जाएंगे!
सच जितना जल्दी स्वीकार कर लो उतना अच्छा! और हां, जिस संगठन, जिस पार्टी और जिस नेता की चापलूसी में तुमने अपने जीवन के इतने वर्ष लगा दिए हैं न, उसी ने तुम्हारे विरुद्ध कानून बना-बना कर, मंचों से तुमको शोषक बोल-बोल कर तुमसे ‘हिसाब चुकता’ करने के लिए इन वर्गों को उकसाया है!
क्यों? क्योंकि यह औपनिवेशिक ताकतों के उस अधूरे एजेंडों को पूरा करने में जुटे हैं, जिससे उन्हें बार-बार हारना पड़ा था! इसके बावजूद उन औपनिवेशिक ताकतों ने अपने एजेंडों को भारत में पूरा करने का काम कभी बंद नहीं किया और वह आज भी जारी है!
औपनिवेशिक शक्ति पहले ब्रिटेन थी, आज अमेरिका है! ब्रिटेन ने ‘आर्य आक्रमण’, ‘दलितवाद’ ‘बहुजनवाद’, ब्रह्मणवाद, 5000 साल से शोषक-शोषित आदि की थ्योरी गढ़ी थी, अमेरिका ने एक ‘क्रिटिकल रेस’ थ्योरी में ही इन सभी को मिलाकर अपने भारतीय एजेंट्स को थमा दिया। उनके भारतीय एजेंटों ने 1970 के दशक में अपनी पहली सरकार बनते ही, कानून बनाकर सामान्य जाति के बच्चों के संहार का रास्ता तैयार करना आरंभ कर दिया था, जिसे आज वह और भी तेजी से अंजाम दे रहे हैं! पहले ‘मंडल कमीशन’ की चिता पर तुम्हारे बच्चे जले, अब यूजीसी की चिता उन्होंने तुम्हारे बच्चों के लिए सजा दी है!
इन औपनिवेशिक शक्तियों द्वारा भारत में हिंदू वेश में छुपे भेड़ियों के जरिए ही हिन्दू समाज का संहार किया जा रहा है। इनके निशाने पर वो जातियां हैं, जिनके प्रतिरोध के कारण औपनिवेशिक शक्तियों व उनके एजेंटों एवं देशविरोधी ताकतों को बार-बार हार का सामना करना पड़ा है!

और हां, अपनी जाति के विधायकों, सांसदों, नेताओं से उम्मीद मत पालना! उन्हें अपनी जाति का समझ कर तुम जीत दिलाते हो, लेकिन सत्ता में पहुंचते ही वह उन भेड़ियों के समक्ष दुम हिलाते श्वान बन जाते हैं! कोई पार्टी या नेता तुम्हारा नहीं है, क्योंकि वो जानते हैं कि तुम भले मिट जाओ, लेकिन उनके आगे-पीछे करना बंद नहीं करोगे, इसलिए वो तुम्हें या तुम्हारे बच्चों की जगह अपने बच्चों को तवज्जो देते हैं। वह सबसे पहले अपने बच्चों को विदेश या नेतागिरी में सेटल करते हैं, क्योंकि सच तो वह भी जानते हैं कि भारत में सामान्य जातियों के बच्चों के कानूनी संहार की तैयारी कर ली गई है!
सोचोगे तो अपनी मानसिक गुलामी की बेड़ियां तोड़ पाओगे और बच जाओगे! नहीं सोचोगे तो जैसे आज तुम इनकी गुलामी कर रहे हो, वैसे कल तुम्हारे बच्चे या तो इनके गुलाम बनेंगे या नोंच कर मार डाले जाएंगे! मेरी बात कड़वी लगेगी, लेकिन इस देश में यही है तुम्हारे बच्चों का भविष्य!
इस सच को आज मानो या कल, मानना तो तुम्हें पड़ेगा ही, क्योंकि तुम्हारे बच्चों का नंबर लग चुका है! आज या तो दूसरों के बच्चों की दुर्दशा देखकर सचेत हो जाओ या कल अपने बच्चों की बारी की प्रतीक्षा करो!
