“विजय” को लाओ-विजय को पाओ
दक्षिण से सूरज निकला है , तमिलनाडु में छाया है ;
पूरे भारत में लाना होगा , सबके मन को ये भाया है ।
अंधकार में डूबा भारत , अब सूरज को लाना है ;
भारत हार चुका दुनिया में , उसको विजय दिलाना है ।
पूरब , पश्चिम , उत्तर , पूर्वोत्तर , अब्बासी-हिंदू का राज है ;
वोट-डकैती से सत्ता लूटी , चुनाव-आयोग का काज है ।
लोकतंत्र अब नहीं बचा है , नेता की तानाशाही है ;
निकृष्टतम है प्रेस – मीडिया , झूठी वाहवाही है ।
अब्बासी-हिंदू भारत का नेता , ये डार्क-फोर्स का नेता है ;
धर्महीन – अज्ञानी हिंदू ! इसको नहीं समझता है ।
डार्क-फोर्स का मतलब जानो , शैतान और राक्षस मानो ;
शैतान की पूजा करने वाले , इन सबको फ्री-मेजन जानो ।
इनकी दुनिया पाप की दुनिया , ये सभी नरक के वासी हैं ;
तिलक-त्रिपुण्ड से धोखा देते , पर मानव-रक्त पिपासु हैं ।
कामी , क्रोधी , लालची , कायर , कुटिल , कपूत ;
नॉन-बायोलॉजिकल कहता है , जो नहीं है माॅं का पूत ।
नहीं है माॅं का , नहीं धर्म का और नहीं है देश का ;
चीन – अमेरिका का गुलाम ये , कठपुतली आदेश का ।
नेता से अभिनेता अच्छा , भरा हुआ है जिसका पेट ;
पूरा देश खायेगा नेता , इतना बड़ा है इसका पेट ।
जंगल-पहाड़-नदियां सब खायीं , गोचर-भूमि को पूरा खाया ;
व्यापारी-साथी की ओट में , सब-कुछ नेता ने ही खाया ।
देश के जितने भी दुश्मन हैं , अब्बासी-हिंदू नेता को चाहें ;
भारत की सत्ता इसे दिलाकर , भारत-वर्ष मिटाना चाहें ।
कुछ दिन और रहा सत्ता में , तो निश्चित भारत हार जायेगा ;
देश को विजय दिलानी है,दक्षिण से “विजय” को लाना होगा ।
“विजय” को लाओ-विजय को पाओ,अपना भारतवर्ष बचाओ
परमावश्यक-कार्य यही है , मिलकर अच्छी-सरकार बनाओ ।
घटिया-सरकारें देश की दुश्मन , धर्म-सनातन की दुश्मन हैं ;
चरित्रहीन व भ्रष्टाचारी , भारत-वर्ष के दुश्मन हैं ।
विश्वशांति को भी खतरा है,विश्व की तीनों घटिया-सरकारों से ;
गृहयुद्ध-महायुद्ध-विश्वयुद्ध होना है,इन तीनों के गंदे-कार्यों से ।
ये तीनों शैतान – राक्षस , कल्पनातीत इतने गंदे हैं ;
एपस्टीन के गंदे – हमाम में , नहा रहे एकदम नंगे हैं ।
इन नंगों का क्या इलाज है ? अच्छी-सरकार बनाना होगा ;
“विजय” को लाओ-विजय मिलेगी ,भारत-वर्ष बचाना होगा ।
“जय सनातन-धर्म”,ब्रजेश सिंह सेंगर “विधिज्ञ”
