पग घुंघरू बांध नेता नाचा था
अमरीका में खुला मुकदमा , बेईमान – व्यापारी निपटेगा ;
एपस्टीन-फाइल के संग-संग,अब्बासी-हिंदू नेता भी पिटेगा ।
पग घुंघरू बांध नेता नाचा था , गाना भी उसने गाया था ;
डोनाल्ड-ट्रंप को खुश करने को,महफिल में नाच दिखाया था ।
भारत के बाहर मुजरा करता , पुरस्कार पाता रहता है ;
देश के अंदर भी भाषण में , मुजरों की बातें करता है ।
पहले मुजरे – वाली होती थीं , अब नेता हैं मुजरे-वाले ;
कायर – कमजोर – नपुंसक नेता , सब के सब मुजरे-वाले ।
पूरी-दुनिया में नाक कट चुकी,अब्बासी-हिंदू नेताओं की ;
पूरी – छवि धूमिल भारत की , कारस्तानी नेताओं की ।
रीढ़विहीन ये सारे नेता , झुक-झुक कर मुजरा करते हैं ;
बस केवल हिंदू – जनता पर , अत्याचार किया करते हैं ।
म्लेच्छों पर कोई जोर नहीं है , चाटते रहते उनके – तलुवे ;
डी एन ए उनसे मिला रहे हैं , खिला रहे पूड़ी – हलुवे ।
धर्महीन – अज्ञानी – हिंदू ! बुद्धिभ्रष्ट होते जाते हैं ;
बुद्धि लकवाग्रस्त हो चुकी , ब्रेनडेड होते जाते हैं ।
इसका कारण धर्म से दूरी , सच्चा – धर्म नहीं जाना ;
पाखण्डों में फंसे हुये हैं , अब्बासी – हिंदू को नेता माना ।
हिंदू के दुश्मन हिंदू – नेता , चरित्रहीन हैं जो मक्कार ;
अय्याशी में फंसे हुये हैं , भारत के हैं ये गद्दार ।
दोनों – हाथों देश लूटते , केवल अपना – घर भरते ;
इनके बच्चे पढ़ते विदेश में , बैंक – विदेशी भरते रहते ।
देश की अर्थव्यवस्था चौपट , रुपया नीचे गिरता जाता ;
छोटे-छोटे देश भी आगे , पर भारत-वर्ष घिसटता जाता ।
धंधा – पानी खत्म हो चुका , रोजगार की किल्लत है ;
कोई इज्जत नहीं देश की , दुनिया भर में जिल्लत है ।
कितना जलील अब्बासी – हिंदू ? सीमाहीन गिरावट है ;
शत-प्रतिशत ये झूठ बोलता , पूरी तरह बनावट है ।
बार-बार ये कपड़े बदले , दिन-भर मेकअप करवाता है ;
जैसे सर्कस का जोकर कोई , फैंसी-ड्रेस-शो करता है ।
जिस देश का ऐसा नेता होगा , क्या उसका सम्मान बचेगा ?
देश की इज्जत मिली धूल में , लगता है पूरा-देश मिटेगा ।
बर्बादी के सारे लक्षण , पूरे भारत में छाये हैं ;
बुद्धि शुद्ध करें वे हिंदू ! जो अब तक बौराये हैं ।
यदि भारत-वर्ष बचाना है , तो अच्छी-सरकार बनाना है ;
नेता जितने अब्बासी – हिंदू , सत्ता से उन्हें हटाना है ।
“जय सनातन-धर्म”, रचनाकार : ब्रजेश सिंह सेंगर “विधिज्ञ”
