संदीप देव। तथाकथित निग्रहाचार्य ऊर्फ शक म्लेच्छ भागतानंद की जब लगतार पोल खुलने लगी तो पहले उसने वीडियो बनाकर मेरे चरित्र पर हमला आरंभ किया। इसके लिए उसने एक पत्रकार के रूप में मेरे द्वारा सेहत, सेक्स, सिनेमा, सेलिब्रिटीज आदि पर लिखे लेख को अपने वीडियो में प्रदर्शित किया। इस मूढ़ को यह नहीं पता कि पत्रकार अपने बीट (दिए गये विषय) के अनुसार रिपोर्ट करता और लेख लिखता है। इसके लिए पूर्व के एकम के कुछ ‘डोबरमैन’ प्रजाति के अपने चेले-चेलियों की उसने मदद ली।
यह फुस्स हो गया तो इसने ब्रह्मलीन शंकराचार्य जी के विरुद्ध संघ-भाजपा के प्रभाव में मेरे द्वारा लिखे पुराने पोस्ट को शंकराचार्यों को भेजना आरंभ किया। इस पर मेरे द्वारा माफी मांगने और प्रायश्चित का पुराना वीडियो शंकराचार्यों के पास पहले से है, इसलिए इसका यह अभियान भी फुस्स हो गया!
फिर इसने अपने चेलों को सोशल मीडिया पर भेजकर मुझे गाली-गलौच कराने का प्रयास किया, लेकिन मैंने उसके भेजे हर गालीबाज को ब्लॉक कर दिया। फिर इसने मेरे विरुद्ध खुले मंच से दो बार लोगों को मुझ पर हमला करने के लिए उकसाया, फिर भी प्रभाव न होता देख एक ‘बगुलाभगत’ से मेरे विरुद्ध फतवा जारी करवा दिया।
बात इससे भी नहीं बनी, फिर इसके चेले देश भर में मेरे विरुद्ध पुलिस शिकायत दर्ज कराने लगे। अभी तक 6 से अधिक शिकायत दर्ज करा चुके हैं।
और अब यह अपनी आखिरी चाल चलते हुए पिशाच-जिन्न-कालिया साधना का भय मुझे दिखाने लगा है। अपने चेलों से यह मुझे धमकी दिलवा रहा है कि तुम्हारा, तुम्हारे पुत्र का, तुम्हारे परिवार का अहित होगा, तुम्हें रोग होगा आदि-आदि। इसने अपने ‘बाईपोलर’ मनोरोग का लक्षण प्रकट करना आरंभ कर दिया है!


कल इसकी पुस्तक (Pic3) से ही मैंने बताया था कि यह टाइप-२ ‘बाईपोलर’ मनोरोगी है, जिसकी मैनिक कंडीशन है। दो बार इश्क में फेल हो जाने पर यह मनोरोगी हो गया और इसका व्यक्तित्व दो हिस्से में बंट गया। इसको दौरे पड़ने लगे। अपने ही अंदर कभी गुरु तो कभी चेला बनकर यह बड़बड़ाने लगता है। सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ साइकियाट्री में इसका मानसिक उपचार हुआ है (pic4)।

कमाल देखिए कि जिस मनोरोगी का मानसिक अस्पताल में उपचार हुआ है, वह स्वघोषित धर्मगुरु बनकर धड़ल्ले से आदि शंकराचार्य, चारों शंकराचार्य सहित अन्य पीठों एवं आचार्यों पर अपने अपशब्दों से बार-बार आक्रमण कर रहा है।
इसने अपना शैतान की आकृति वाला एक शैतानी दंड बनाया है, जिसे हाथ में लेकर चलता है। उसे वह ब्रह्म दंड कहता है, लेकिन परिभाषा राजदंड की देने लगता है। ब्रह्मा दंड से वह सनातन धर्म के धार्मिक समाज पर शासन करना चाहता है तो उसे राजदंड घोषित कर देश के शासक वर्ग पर भी सत्ता स्थापित करना चाहता है। इसके बाइपोलर व्यक्तित्व का यह सटीक उदाहरण है!
सनतन धर्मशास्त्र साफ़-साफ़ किसी शारीरिक एवं मानसिक रूप से विकलांग एवं मनोरोगी को गुरु होने से वंचित करते हैं, फिर भी इसकी धृष्टता देखिए कि एक स्वघोषित निग्रह संप्रदाय खड़ा करके यह स्वघोषित निग्रहाचार्य (आखिरी पैगंबर या खलीफा जैसा) बन बैठा है और देश के सभी धर्माचार्य या तो मौन हैं या इसके अपशब्दी आचरण से डरे हुए हैं या फिर यह उनके विरुद्ध कोई वितंडा न करे, इसलिए इसके समर्थन का दिखावा कर रहे हैं। कोई मनोरोगी आज के भौतिक जगत में साधारण शिक्षक नहीं बन सकता तो यह सनातन धर्म का सर्वोच्च धर्मगुरु बनने का षड्यंत्र कैसे रच रहा है?
मेरे द्वारा किए जा रहे लगातार एक्सपोजर से इसका बाइपोलर व्यक्तित्व एक्टिवेट हो गया है और इसे पुनः दौरे पड़ने लगे हैं, जिसके कारण यह लगातार झूठ बोल रहा है, वितंडा कर रहा है और मुझ पर हमला करने के लिए लोगों को उकसा रहा है।
अब यह अपना आखिरी तीर चलाते हुए अपनी कालिया-जिन्न पैशाचिक साधना (इसने स्वयं स्वीकार किया है कि यह इस्लामी कालिया-जिन्न साधना करता है और उसका मंत्र लोगों को देता है) की धमकी अपने चेलों से दिलवा कर मेरा मुंह बंद करने की कोशिश में जुटा है। (pic1&2)

यह डरपोक नहीं जानता कि मैं भगवान श्रीहरि विष्णु का भक्त हूं। उनकी इच्छा से ही मेरे या पेरे परिवार का जो होना होगा, वह होगा; इसकी कालिया-जिन्न साधना से नहीं!
डरपोक भगोड़ा मनोरोगी भागतानंद सुन, और जितना गिरना है तू गिर, मैं डरने वालों में से नहीं हूं। वंदे विष्णुं 🙏
