संदीप देव। भागतानंद ने अपने एक ‘डोबरमैन’ को सर्वश्रेष्ठ शांकर पीठों में से एक के परमपूज्य जगतगुरु शंकराचार्य जी के पास भेजा है अपने खर्चे पर अपना समर्थन जुटाने के लिए! यही नहीं, अपने ‘पालतुओं’ से चिट्ठी लिखवा कर भी पीठों को भेज रहा है कि देखिए मेरे सभी दास बेचैन हैं! मुझे बचाइए!
त्राहिमाम-त्राहिमाम कर रहा है! हर जगह नाक रगड़ रहा है कि मुझ शाकद्वीपी मूल के ‘अंतर्द्वीपीय वर्णसंकर’ को बचाइए, अन्यथा मैं भविष्य पुराण के अनुसार अपूज्य होकर भी भोले-भाले हिंदुओं से जो अपनी पूजा करवा रहा हूं, वह भेद कहीं वृहत् स्तर पर न खुल जाए! 😂 भागतानंद का वह पालतू डोबरमैन कल से ही एक शांकर पीठ में पड़ा है कि मेरे अपूज्य गुरु को बचा लीजिए!
म्लेच्छ भागतानंद के समक्ष एक मूल समस्या और उत्पन्न हो गई है! वह तथाकथित विद्वानों को लिख रहा है कि शाकद्वीप अभी कहां है, इसे कैसे ढूंढे? काफी विद्वानों के पास भी अपने ‘पालतुओं’ को दौड़ा रखा है! कोई उसे कह रहा है कि आस्ट्रेलिया में शाकद्वीप है, कोई उसे अफ्रीका बता रहा है, कोई ईरान, कोई इंडोनेशिया, कोई साइबेरिया बता रहा है, कोई रूस में शाकद्वीप ढूंढने को कह रहा है! आस्ट्रेलिया वाला पोस्ट तो कल ही इसके एक मूढ़ चेले ने इतरा कर मुझे भेजा है!😀बेचारा कंफ्यूज है कि अपनी वर्णसंकरता का असली DNA ढूंढे तो कहां ढूंढे?
सुना है इस जरथ्रुष्ट्र की संतान की मुसीबत आगे और बढ़ने वाली है। उड़ती हुई खबर है कि शाकद्वीपी मगों पर एक बड़े विद्वान बड़े ही शोधपरक ग्रंथ की रचना कर रहे हैं, यहां के ब्राह्मणों और हिंदुओं को इस शापित अपूज्य से बचाने के लिए!
मेरी सलाह है तुझे भागतानंद कि अपने डोबरमैन को लगाकर वह ग्रंथ भी पढ़वा लेना! किशोरावस्था की कुवृत्तियों के कारण तू पहले ही बाइपोलर मनोरोगी होकर अपनी मेधा शक्ति खो चुका है! अस्पताल में मनोचिकित्सा करा चुका है। अतः तेरी समझ में तो ग्रंथ आएगा नहीं! उसे भी मोबाइल में भर लेना और स्क्रीन देख-देख कर पढ़ते रहना!
बता दूं कि भागतानंद का वह पालतू ‘डोबरमैन’ पहले एक बाबाजी को इसके समर्थन में लेकर आया था। एक दिन बाद ही उन बाबाजी का दूसरा वीडियो निकल आया, जिसमें उन्होंने भागतानंद के मुख में बाबासीर बताकर प्रकारांतर से उसके मुख को मलद्वार कह दिया था!😀 फिर भागतानंद ने एक दूसरे स्वामी जी से समर्थन जुटाया, लेकिन वह स्वामी जी स्वयं ही शाकद्वीपी निकले! फिर तीसरे स्वामी जी ने इसे ही भाषा की नसीहत देते हुए सभी को मिलजुल कर रहने को कहा!
अब यह निर्लज्ज भागतानंद उन्हीं परमपूज्य शांकर पीठों से स्वयं को बचाने की गुहार लगा रहा है, जिनको कभी वह कोस-कोस कर गाली देता था, कभी उनकी सिद्धियों पर वीडियो बनाकर मजाक उड़ाता था तो कभी आदि शंकराचार्य जी को मुड़ी कटवा साबित करने का प्रयास करता था!
शापित अंतर्द्वीपीय वर्ण संकर इतनी जल्दी शांकर मठों के श्राप का शिकार हो जाएगा, किसने सोचा था! धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो- यह प्रत्यक्ष साबित हो रहा है! जय-जय शंकर 🙏
