एपस्टीन-फाइल्स की आपदा
एपस्टीन-फाइल्स की आपदा , हिंदू का है स्वर्णिम-अवसर ;
अपनी मौत मरेगा नेता , अच्छी-सरकार को सुअवसर ।
लगता है जल्दी मिट जायेगा , देश का सबसे बड़ा कलंक ;
एपस्टीन को धन्यवाद है , अब्बासी – हिंदू का होगा अंत ।
वरना इसे हटाना मुश्किल , इसने सबको फांस रखा है ;
राज्य के तीनों-अंग फंसे चुके , जेब में प्रेस-मीडिया है ।
सुप्रीम-कोर्ट को जीत चुका है, चुनाव-आयोग बंधुआ-मजदूर ;
धर्महीन – अज्ञानी हिंदू , बुरी तरह से है मजबूर ।
साजिश रचने का विश्व-चैंपियन , ऐसे ही साथी बना रखे हैं ;
चोर , लुटेरे , हत्यारे , व्यभिचारी , पाखंडी सारे पाल रखे हैं ।
इसकी साजिश से बचना मुश्किल , हिंदू वैसे भी हैं अज्ञानी ;
धर्महीन-अज्ञानी हिंदू की , उनकी जान है निश्चित जानी ।
धर्म का सबसे बड़ा शत्रु है , अपने मजहब को कहे शांति का ;
हर हिंसा की वजह यही है , कारण यही अशांति का ।
“फ्री-मेजन” इसका मजहब है , शैतान की पूजा करते हैं ;
दुराचार बच्चों से करते , उनकी बलि भी देते हैं ।
उन्हें मारकर रक्त भी पीते , मांस भी उनका खाते हैं ;
इसमें उनका विश्वास यही है , इससे जवान बने रहते हैं ।
एपस्टीन-फाइल में यही सब , पूरी फाइल जल्द खुलेगी ;
अब्बासी-हिंदू भारत के नेता की,मृत्यु-कुण्डली यही बनेगी ।
डोनाल्ड-ट्रंप भय दिखलाता है , ब्लैकमेल नेता को करता ;
ट्रेड – डील मनचाहा करके , पूरा भारत – वर्ष लूटता ।
डोनाल्ड-ट्रंप जो भी करता है, अपने देश की खातिर करता ;
पर भारत का अब्बासी-हिंदू , भारत से गद्दारी करता ।
स्वार्थ , लोभ ,भय , भ्रष्टाचार में , गंदे – हिंदू फंसे हुये हैं ;
अब्बासी-हिंदू के यही समर्थक , यही देश को डंसे हुये हैं ।
अब्बासी-हिंदू के टुकड़े पाकर, ये अपनी पूंछ हिलाते हैं ;
महामूर्ख ये नहीं जानते , अपनी ही चिता सजाते हैं ।
मास्टरस्ट्रोक-वादी भी यही हैं , हिंदू को मूर्ख बनाते हैं ;
कब तक मूर्ख बनोगे हिंदू ? ये भारत को नर्क बनाते हैं ।
एपस्टीन-फाइल के रूप में, अब्बासी-हिंदू का काल आ रहा ;
इसीलिये अब्बासी-हिंदू , अपना अंतिम-हथियार चल रहा ।
इसका अंतिम-हथियार यही है, पूरे भारत में आग लगाना ;
जाति-संघर्ष हिंदू में कराकर , गृहयुद्ध भयंकर करवाना ।
शायद इसमें सोच है उसकी , इससे वो बच जायेगा ;
पर उल्टा होने वाला है , दल-बल सहित ये मिट जायेगा ।
“जय सनातन-धर्म”, रचनाकार : ब्रजेश सिंह सेंगर “विधिज्ञ”
