“संदीप-देव” हैं हिंदू-गाइड
राजनीति का सारा स्तर , कितना नीचे गिरा दिया है ?
अब्बासी-हिंदू भारत का नेता,सब कुछ मिट्टी में मिला दिया है।
सड़क से लेकर संसद तक में व लाल किले का सम्बोधन ;
सारी शुचिता मिटा चुका है , सब कुछ गंदा तन-मन-धन ।
चंगू – मंगू भारत के नेता , छंटे हुये बदमाश हैं ;
हिंदू को इतना गिरा दिया है , टूट चुकी हर आस है ।
धर्महीन – अज्ञानी हिंदू ! जब से धर्म से दूर हो गया ;
नेता के षड्यंत्र में उलझा , पूरी तरह गुलाम हो गया ।
मुफ्त का गल्ला पांच-किलो है , उसी में हल्ला मचा रहा है ;
अपना सब कुछ लगा दांव पर , नेता पर बाजी लगा रहा है ।
जबकि नेता महाकुटिल है , केवल अपने लिये है जीता ;
नाटक-नौटंकी , जुमले-बाजी , लफ्फाजी करके ये जीता ।
चरित्र नाम है किस चिड़िया का ? इस नेता को नहीं पता है ;
कामवासना में कितना अंधा ? एपस्टीन फाइल में पता है ।
भारत की बर्बादी के दिन , पता नहीं कब पूरे होंगे ?
हिंदू ! को धर्म में आना होगा , तब जाकर ये पूरे होंगे ।
स्वार्थ ,लोभ ,भय ,भ्रष्टाचार को , पूरी तरह छोड़ना होगा ;
रामायण , गीता , महाभारत , अच्छी तरह समझना होगा ।
या शंकराचार्यों की बात को सुनना , पूरी तरह मानना है ;
या संदीपदेव का चैनल देखो,सब कुछ समझ में आ जाना है ।
और नहीं है मार्ग दूसरा , धर्म – मार्ग पर चलना होगा ;
“गौ – गीता – गंगा” की रक्षा , हर हालत में करना होगा ।
हर स्थिति में जानना होगा,अब्बासी-हिंदू को समझना होगा ;
भेड़ की खाल में छिपा भेड़िया , अच्छी तरह देखना होगा ।
तुम्हें भेड़िये से बचना है , उसके दांत तोड़ना है ;
शस्त्र-शास्त्र का पूर्ण-प्रशिक्षण , अच्छी तरह से लेना है ।
“संदीप-देव” हैं हिंदू – गाइड , इंतजाम सब कर देंगे ;
हिंदू को भी चलना होगा , मंजिल तक पहुंचा देंगे ।
“यति-नरसिंहानंद” गुरु हैं , हिंदू ! उनसे शिक्षा लेना ;
अभी नहीं तो कभी नहीं , ये दृढ़-निश्चय तुम कर लेना ।
अब्बासी-हिंदू है जहर-हलाहल , हिंदू के प्राण हर रहा है ;
महामूर्ख – अज्ञानी हिंदू , फिर भी कंधों पर बिठा रहा है ।
ऐसे हिंदू ब्रेन-डेड हैं , कभी नहीं ये सुधरेंगे ;
इनको इनके हाल पे छोड़ो , अपने आप ही निपटेंगे ।
“भविष्य-मालिका” राह दिखाती , उसी मार्ग पर चलना है ;
यदि शांति से हिंदू जीना चाहो तो ,अच्छी-सरकार बनाना है ।
“जय सनातन-धर्म”, रचनाकार : ब्रजेश सिंह सेंगर “विधिज्ञ”
