#संदीपदेव । दिल्ली के उत्तम नगर में ‘भीम’ तरुण (26वर्ष) के ‘मीम’ हत्यारों पर हिंदू वोट लेने वाले भाजपाई प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और मुख्यमंत्री खामोश हैं! चुनाव के समय वोट के लिए शायद ये बोलेंगे, जैसे उदयपुर के कन्हैयालाल का गला कटने पर पहले चुप रहे, फिर चुनाव में उसका नाम ले-ले कर हिंदुओं को डराया और वोट मांगा था!
सबसे अधिक हिंदुओं की टारगेट कीलिंग और जिहादियों द्वारा गला रेतने की घटना इनके शासन-काल में हुई है, फिर भी ‘स्टॉकहोम सिंड्रोम’ के शिकार ‘संघी-सरकारी हिंदू’ कहते हैं कि ये नहीं रहेंगे तो हिंदू मर जाएगा, इसलिए इनका विकल्प नहीं है!
यह अध्ययन का विषय है कि जिहादी इनके शासन-काल में ही हिंदुओं पर सर्वाधिक हमलावर क्यों होते हैं? वैसे परिणाम हर बार एक ही रहा है! जहां हिंदू मारा गया है, वहां भाजपा को सत्ता मिली है! यह कड़वी सच्चाई है!
हां अमित शाह के गृहमंत्रालय के अधीन काम करने वाली दिल्ली पुलिस ने हालांकि आरोपी ‘मीमों’ को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन ‘मीम’ आरोपियों को बचाने का काम भी शुरू कर दिया है यह कह कर कि यह घटना सांप्रदायिक नहीं है, बल्कि आपसी रंजिश का है!
जबकि प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार होली के दिन दलित हिंदू परिवार की 11 साल की बच्ची अपनी छत से होली खेल रही थी। इस दौरान फेंका गया एक गुब्बारा नीचे से गुजर रही मुस्लिम समुदाय की एक महिला को लग गया। बच्ची के परिजनों का दावा है कि उन्होंने तुरंत माफी मांग ली थी, लेकिन बात बढ़ गई. बहस ने हिंसक रूप ले लिया। आरोप है कि ‘मीम पक्ष’ के लोगों ने उस घर के बेटे तरुण कुमार (26) को घेर लिया और क्रिकेट बैट, लाठियों व पत्थरों से उन पर हमला कर दिया, जिसमें उसे गंभीर चोटें आई और उसने अस्पताल में दम तोड़ दिया।
सवाल चंद्रशेखर रावण, उदितराज जैसे तथाकथित दलित नेताओं से भी है कि तुम्हारे दलित समाज का एक होनहार बच्चा मारा गया है, लेकिन तुम सामान्य जातियों और खासकर ब्राह्मणों के विरुद्ध ‘भीम-मीम’ एकता का नारा लगाने वालों क्यों नहीं जाते उस ‘भीम’ के घर और क्यों नहीं ‘मीमों’ की बढ़ती हिंसा और जिहादी प्रवृत्ति पर कुछ बोलते हो?
अगला सवाल है अनुसूचित जाति अर्थात् दलित भाईयों से कि देखो मीमों की हिंसा का कहर सबसे अधिक तुम लोगों पर ही टूटती है, फिर भी तुम किस मुंह से ‘भीम-मीम’ के नारे में अपने हिंदू समाज के विरुद्ध जहर उगलते रहते हो?
आखिरी सवाल ‘मीमों’ के तथाकथित पढ़े-लिखे वर्ग से है, जो खुद को पीड़ित बताने से जरा भी नहीं चूकते, लेकिन अपने समाज के लोगों द्वारा काटे जा रहे हिंदुओं के गले पर खामोश क्यों बने रहते हो? यह क्यों न माना जाए कि तुम्हारी खामोशी तुम्हारे जिहाद का ही हिस्सा है?
