संदीप देव। जो हम इतने समय से कहते आ रहे हैं, आज केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी जी ने भी वह कह दिया! भारत के गरीब और गरीब हो रहे हैं और अमीर और अमीर होते जा रहे हैं।
देश में इस समय करीब 81 करोड़ 35 लाख लोग मुफ्त राशन पर जीने को विवश हैं। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 35 करोड़ लोग दो वक्त की रोटी के लिए तरस रहे हैं।

वहीं, दूसरी ओर 13 कंपनियों को 2 लाख 84 हजार 980 करोड़ रुपए की छूट लोन सेटलमेंट में दिया गया है। इसके अलावा संसद में पेश आकंड़ों के मुताबिक कारपोरेट कंपनियों के 16.35 लाख करोड़ रुपए के कर्ज को माफ किया गया है।
भारत का मध्यम वर्ग तेजी से घट रहा है। केवल तीन साल में भारत के मध्यम वर्ग के कुल घरेलू बचत में 9 लाख करोड़ से अधिक की कमी आई है। आर्थिक असमानता इतनी तेजी से बढ़ रही है।
बिज़नस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट कहती है कि औपनिवेशिक शासन से भी अधिक आर्थिक असमानता इन 11 सालों में पनपी है। आज भारत के एक केंद्रीय मंत्री भी मंच से इसे कह और स्वीकार कर रहे हैं!
फिर भी आंख पर पट्टी बांधे ‘ब्रेनडेड हिंदू’ इसे शायद ही समझें और शायद नितिन गडकरी को ही कोसने लगें। ‘ब्रेनडेड’ हिंदू एक नयी बीमारी बन चुके हैं, खासकर हिंदू समाज के लिए!
हिंदू समाज इसलिए लिख रहा हूं कि एक रिपोर्ट के अनुसार इन 11 वर्षों में औसत मुस्लिमों की आमदनी जहां बढ़ी है, वहीं औसत हिंदुओं की आमदनी घटी है। रिपोर्ट कहती है कि विभिन्न सरकारी योजनाओं का सर्वाधिक लाभ मुस्लिम वर्ग को मिला है। ज्ञात हो कि भाजपा अल्पसंख्यक आयोग के अनुसार अल्पसंख्यकों के लिए सरकार करीब 300 योजनाएं चला रही हैं। इसके 70% से अधिक लाभार्थी मुसलमान हैं।
तेजी से घटता हिंदू मध्यमवर्ग जिनमें अधिकांश भाजपा के ही वोटर हैं, उन्हें समाप्त कर भाजपा क्या हासिल करना चाहती है, यह तो ‘ब्रेनडेड भाजपाई’ ही बता सकते हैं?
