संदीप देव। सरकारों द्वारा हिंदुओं के मंदिरों की लूट लगातार बढ़ रही है। हिंदुओं की आस्था को सरकार ने अपनी कमाई का जरिया बना रखा है। काशी से लेकर मथुरा तक कॉरिडोर के नाम पर मंदिरों को तोड़ने से लेकर उसका आर्थिक दोहन करने तक, सब हिंदुओं की आंखों के सामने घटित हो रहा है, लेकिन हिंदू चुप है, क्योंकि उसके लिए धर्म से अधिक महत्वपूर्ण पार्टी, संगठन और नेता है।
कोई मुसलमान या ईसाई अपने मजहब/रिलीजन के ऊपर किसी पार्टी, संगठन या नेता को नहीं रखता, इसलिए आज जहां दुनिया भर में उनके अनेक देश हैं, वहीं हिंदू बहुल इस ‘तथाकथित सेक्युलर’ देश में भी योजनाएं उनके लिए बन और चल रही हैं। उनके मस्जिद और चर्च आजाद हैं और उसका पोषण भी हिंदुओं के पैसे से हिंदुओं द्वारा चुनी हुई सरकारें कर रही हैं!
इतिहास में सबसे अधिक पीड़ित समुदाय हिंदू है, लेकिन सबसे अधिक आत्महंता भी वही है, क्योंकि उसके लिए धर्म से बड़ा पार्टीबाजी और व्यक्तिवादिता है, जिसका परिणाम वह अपने घटते अस्तित्व के रूप में चुपचाप देख रहा है, परंतु पार्टी व नेता की जगह धर्म को प्रथम रखने को वह अभी भी तैयार नहीं है!
तहलका पत्रिका के लेटेस्ट अंक में देश भर में आस्था के नाम पर मंदिरों को जो लूटा जा रहा है, उस पर Shivendra Rana जी ने एक शानदार लेख लिखा है। इस लेख को सभी सनातनी हिंदुओं को पढ़ना चाहिए। इस लेख में मुझे भी कोट किया गया है।

एक उदाहरण देखिए कि कैसे वैष्णव देवी ट्रस्ट का पैसा रोजा-इफ्तार पर बड़ी बेशर्मी से सरकार ने खर्च किया और हिंदू दांत निपोरते हुए इसलिए चुप रहा कि सत्ता में उसकी ‘तथाकथित हिंदूवादी’ सरकार है!
जिस धार्मिक समुदाय में अपने धर्म का स्वाभिमान नहीं है, आज उसके पास कहने को अपना एक देश नहीं है! सच तो यही है! इसे कैसे झूठ लाओगे नामधारी हिंदुओं?
