धर्मो रक्षति रक्षित: (भाग-3)
केवल भ्रष्टाचार हटा दो , देश तरक्की कर जायेगा ;
अब्बासी-हिंदू नेता को हटा दो, भारत विकसित हो जायेगा ।
वरना इन दोनों के रहते , शीघ्र ही भारत मिट सकता है ;
आने वाला है समय भयानक , महा-विनाश हो सकता है ।
हिंदू ! को सबसे अधिक है खतरा , क्योंकि धर्म से दूर है ;
नेता उनके तलवे चाटें , जिनको जन्नत की हूर है ।
धर्महीन – अज्ञानी हिंदू ! ये बिलकुल न बच पायेगा ;
जिसको अपना नेता माना , उसी से धोखा खायेगा ।
छुरा पीठ पर सदा मारता , अब्बासी – हिंदू ये नेता ;
हिंदू ! अब तक समझ न पाया, मुफ्त में अपनी जान गंवाता ।
इस नेता के बहकावे पर , पूरे देश में हिंदू ! मरता ;
पहलगाम में घूमने जाता, वहाॅं पे गोली खाकर मरता ।
कश्मीर घूमने का न्योता दे , अब्बासी-हिंदू बुला रहा है ;
तरह-तरह से लुट कर हिंदू ! अपना-जीवन गंवा रहा है ।
भविष्य-मालिका भविष्य का दर्शन,हिंदू !तेरा भविष्य लिखा है ;
धर्म-मार्ग पर यदि न लौटा , तो फिर महा-विनाश लिखा है ।
जेहादी-हमले हर तरफ से होंगे , भीतर-बाहर सभी जगह ;
म्लेच्छ-देश सब करेंगे हमला , रक्त का सागर सभी जगह ।
बहुत ही कम अब समय बचा है , संभल सको तो संभलो हिंदू ;
वरना उनकी मौत है निश्चित , गांधी-बुद्ध के जो हिंदू ।
बंटवारे में मरे थे कितने ? किसने गांधी से धोखा खाया ?
हजार-गुना अब मरेंगे ज्यादा , अब्बासी-हिंदू नेता जो आया ।
जागो हिंदू ! अब तो जागो,क्या तुमको सोना है मौत की निद्रा ?
फौरन धर्म – मार्ग पर आओ , वहीं खुलेगी तेरी निद्रा ।
“धर्मो रक्षति रक्षित : “ और नहीं कोई दूसरा – मार्ग ;
धर्म तुम्हारी करेगा रक्षा , पर आना होगा धर्म के मार्ग ।
म्लेच्छ हो रहे दुनिया पर हावी , क्योंकि मजहब के कट्टर हैं ;
पर धर्म-मार्ग हिंदू ! ने छोड़ा , बना ये नेता का खच्चर है ।
हिंदू ! बना हुआ खच्चर है , डंडे खाता बोझा ढोता ;
न ये घर का नहीं घाट का , बना हुआ धोबी का कुत्ता ।
सम्मान नहीं पूरी दुनिया में , अब्बासी-हिंदू भारत का नेता ;
पुरस्कार का टुकड़ा पाकर , अपनी पूंछ हिलाता रहता ।
पर अपने मजहब का पक्का , गजवायेहिंद कराना है ;
मंदिर तोड़ करे गलियारा , हिंदू – धर्म मिटाना है ।
निकट आ रहा समय भयंकर , हिंदू ! कैसे तू बच पायेगा ?
पूरी तरह धर्म में लौटो , तब ही हिंदू ! तू बच पायेगा ।
