क्यों अच्छे-दिन बीत गये सब ?
क्यों अच्छे-दिन बीत गये सब,क्यों नहीं लौटकर वापस आते ?
जैसी सरकार चुनी हिंदू ने , वैसा ही शासन पाते ।
पिछली सरकारों से रुष्ट था हिंदू, इसीलिये उन सबको हटाया ;
अब्बासी-हिंदू की खुली लॉटरी , हिंदू ने हृदय-सम्राट बनाया ।
पर ये निकला नकली-सोना , ढोल में कितनी पोल है ?
भीतर से खूंखार – भेड़िया , ऊपर सियार की खोल है ।
अपने दुष्चक्रों के चक्रव्यूह में , इसने भारत-वर्ष फंसाया ;
सारे संस्थान कर दिये नपुंसक, सुप्रीम-कोर्ट कमजोर कराया ।
कब ये भारत का पाप कटेगा ? कब ये नेता जायेगा ?
एपस्टीन-फाइल जब खुलेगी पूरी, मुंह काला तब हो जायेगा ।
उल्टी-गिनती प्रारम्भ हो चुकी , अब ये रोके नहीं रुकेगी ;
चाहे जितनी करे धांधली , पर किस्मत साथ नहीं देगी ।
प्रारब्ध की झोली हो चुकी है खाली,अब झोला उठ जायेगा ;
जो भी इसका शैतानी-बल है , वो पूरी तरह चुक जायेगा ।
जल चुकी है इसकी काठ की हांडी,घड़ा पाप का फूट रहा है ;
इसका दिया है बुझने वाला , बुझने से पहले भभक रहा है ।
हर – पापी की यही कहानी , अंत भयानक होता है ;
हिटलर और मुसोलिनी देखो , इसी तरह का होता है ।
हिरण्यकश्यप, कंस व रावण, कालनेमि सम कितने राक्षस ?
बुरा अंत पाये सब के सब , ये नेता भी वैसा राक्षस ।
आना पड़ता है “महा-विष्णु” को,”अवतार” पुनः अब आया है ;
“अवतार-कल्कि” प्राकट्य हो चुका,हर-एक भक्त हर्षाया है ।
अंध-भक्तों संग मिटेगा नेता , बुरा अंत पापी का होगा ;
जो बोया है वो ही काटेगा , जहरीला – फल ही पायेगा ।
थोड़ी-बहुत लगी जो देरी , कारण धर्महीन-अज्ञानी हिंदू ;
सत्य कभी न जानना चाहा,जिस वजह है नेता अब्बासी-हिंदू ।
हिंदू ! तेरी परम-मूर्खता , लगातार चल रही देश में ;
खामोशी से मंदिर तुड़वाता , तीर्थों का विध्वंस देश में ।
अब्बासी-हिंदू नेता की पार्टी,जिसकी जहरबुझी सरकारें हैं ;
मरणासन्न हो चुका है भारत , आती उसकी चीत्कारें हैं ।
पर कोई नहीं है सुनने वाला,क्या ये न्यायपालिका बहरी है ?
इसीलिये “अवतार” आ रहा, क्योंकि पाप की खाई गहरी है ।
जनता-जनार्दन जागने वाला , रूप-भयानक सामने होगा ;
नवनिर्माण देश का होगा , पर पहले पूर्ण-विध्वंस ही होगा ।
सामूहिक कर्म हैं सम्पूर्ण-देश के , एक साथ परिणाम मिलेगा ;
सारा-पापी मिट जायेगा , केवल “धर्म-निष्ठ” ही बच पायेगा ।
“जय सनातन-धर्म”,ब्रजेश सिंह सेंगर “विधिज्ञ”
