संदीप देव। भारत के सांस्कृतिक इतिहास में संतों का स्थान सर्वोपरि रहा है, लेकिन आज के दौर में सनातन के सर्वोच्च शिखर को जो धमकियां मिल रही हैं, वे किसी बड़े खतरे का संकेत हैं।
ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी को मिली हालिया धमकी ने पूरे देश के हिंदू समाज को झकझोर कर रख दिया है। उज्जैन और वाराणसी के समाचार पत्रों में छपी खबरें इस बात की पुष्टि करती हैं कि शंकराचार्य जी को ‘अतीक अहमद’ जैसी मौत मारने की चेतावनी दी गई है। आखिर किसका कलेजा इतना बड़ा हो गया है कि वह भारत के शंकराचार्य को खुलेआम ललकार रहा है?
’गविष्ठी यात्रा’ से क्यों डरा है तंत्र?
शंकराचार्य जी ने आगामी ३ मई से उत्तर प्रदेश के ४०३ विधानसभा क्षेत्रों में ‘गविष्ठी यात्रा’ निकालने की घोषणा की है। इस यात्रा का एक ही मंत्र है— “गौ-हत्या मुक्त भारत”। गौ-माता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाना और भारत की धरती से कत्लखानों का कलंक मिटाना।
यही शंकराचार्य जी का संकल्प है। लेकिन जैसे ही यह संकल्प जमीन पर उतरने लगा, धमकी देने वाले गिरोह सक्रिय हो गए। १ अप्रैल और ६ अप्रैल २०२६ को उनके आधिकारिक फोन नंबर पर जो अपशब्दों से भरा ऑडियो और टेक्स्ट मैसेज आया, उनकी भाषा डरावनी है। “अतीक अहमद की तरह मार देंगे” और “टाइम नजदीक आ गया है”—यह भाषा केवल एक अपराधी की नहीं, बल्कि उस पूरे ‘कसाई तंत्र’ की है जिसे डर है कि अगर गौ-हत्या बंद हुई, तो उनका हजारों करोड़ों का काला साम्राज्य ढह जाएगा।
पालघर से उज्जैन तक: संतों का शिकार कब तक?
हमें नहीं भूलना चाहिए कि पालघर में दो निहत्थे संतों को भीड़ के हवाले कर दिया गया था और पूरा ‘सेकुलर जमात’ मौन था। आज जब एक शंकराचार्य डंके की चोट पर सनातन के मूल तत्व यानी ‘गौ-रक्षा’ की बात कर रहे हैं, तो उन्हें माफिया अतीक अहमद की मौत का उदाहरण दिया जा रहा है। क्या यह धमकी उन लोगों की ओर से है जो अवैध बूचड़खानों का सिंडिकेट चलाते हैं? या फिर इसके तार उन शक्तियों से जुड़े हैं जो भारत को उसकी सांस्कृतिक पहचान से दूर रखना चाहती हैं?
सरकार और कानून के हाथ इतने सुस्त क्यों?
वाराणसी से लेकर उज्जैन तक शंकराचार्यजी के भक्तों और समर्थकों में आक्रोश है, लेकिन सवाल प्रशासन पर है। आखिर उन नंबरों को अभी तक ट्रेस क्यों नहीं किया गया? क्या एक शंकराचार्य की सुरक्षा किसी रसूखदार नेता से कम महत्वपूर्ण है? जब एक माफिया के एनकाउंटर पर मानवाधिकारवादी ‘इकोसिस्टम’ छाती पीटने लगता है, तब एक हिंदू संत को जान से मारने की धमकी मिलने पर यह पूरा तंत्र चुप्पी क्यों साध लेता है?
इन धमकियों से शंकराचार्यजी के संकल्प की अग्नि नहीं बुझेगी। धमकी देने वाले भूल गए हैं कि ‘राम गौ-धाम’ का निर्माण और ‘गविष्ठी यात्रा’ किसी व्यक्ति का नहीं, बल्कि सनातन का संकल्प है। शंकराचार्य जी ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इन धमकियों से डरने वाले नहीं हैं। लेकिन सवाल भारत की सोई हुई हिंदू जनता से है कि क्या हम अपने संतों को इसी तरह असुरक्षित रहने देंगे?
याद रखिये, जब-जब संतों का अपमान हुआ है, समाज और सत्ता दोनों का पतन हुआ है। आज समय है कि इस ‘धमकी तंत्र’ के आकाओं को बेनकाब किया जाए, इससे पहले कि कोई और अनहोनी हमारे इतिहास पर दाग लगा दे।

बिल्कुल सही बात है। इस संघी सरकार में सनातनी हिंदू, सनातन धर्म संस्कृति, सनातनी संत, मठ मंदिर , गो माता,, गंगा सब के सब खतरे में है और आम हिंदू अभी भी सो रहा है 🥲🥲