ये सुप्रीम-कोर्ट को करना ही होगा
चुनाव-आयोग की बेईमानी , सुप्रीम-कोर्ट की मेहरबानी ;
अब्बासी-हिंदू सत्ता से चिपका , जनादेश की नाफरमानी ।
सुप्रीम-कोर्ट को समझना होगा , आखिर किसके रक्षक हो ?
सरकारों के नहीं हो रक्षक , तुम संविधान के रक्षक हो ।
आवश्यकता है आज देश को , चरित्रवान-नेता-अफसर की ;
पूर्ण-निष्पक्ष हो न्यायपालिका , नहीं लूट के अवसर की ।
नेता-अफसर चिकने घड़े हैं , बातों का असर नहीं होगा ;
न्यायपालिका अंतिम-आशा, निश्चय ही इस पर असर होगा ।
निश्चित ही सबको मरना एक दिन , इसको नहीं भूलना है ;
धन-दौलत सब धरी रहेगी , साथ नहीं कुछ जाना है ।
केवल सत्कर्म साथ जायेंगे , जीव को मुक्ति दिलायेंगे ;
चरित्रहीन – पापी जितने हैं , मरकर चैन नहीं पायेंगे ।
जीते जी खलनायक बनते , सबकी गाली खाते हैं ;
मन ही मन सब गाली देते , सबकी नफ़रत पाते हैं ।
अब्बासी-हिंदू का जीवन पशुवत,आहार निद्रा भय मैथुन ;
सूअर का अगला जन्म मिलेगा,मैला ही होगा इनका भोजन ।
अभी भी मैला ही खाते हैं , जो है रिश्वत का मैला ;
सूअर समान ही जीवन इनका , लगा हुआ सुअरों का मेला ।
पकी उमर वाले सब सोचें , कब तक मैला खायेंगे ?
मानव जीवन नष्ट हो रहा , दोबारा न पायेंगे ।
अगला जीवन क्या पायेंगे ? कुत्ता बिल्ली सूअर बनेंगे ;
लाखों – जन्मों तक यही बनेंगे , कभी नहीं मुक्ति पायेंगे ।
अंतिम-मौका मिल सकता है , सत्य-मार्ग पर आना होगा ;
सारा – कपट छोड़ना होगा , धर्म – मार्ग पर चलना होगा ।
सर्वश्रेष्ठ है धर्म-सनातन , शंकराचार्यों की शरण में आओ ;
धर्म-नीति अपनानी होगी , गौ – गंगा – गीता को बचाओ ।
पूरी तरह से रक्षा इनकी , भ्रष्टाचार हटाना होगा ;
जस का तस कानून हो लागू , संविधान मनवाना होगा ।
चुनाव-आयोग व प्रेस-मीडिया , इनकी सारी-चूलें कस दो ;
ई वी एम कूड़े में फेंको , जनादेश सर्वोपरि कर दो ।
सुप्रीमकोर्ट का कर्तव्य है पहला,सबसे पहले ये कदम उठाओ;
ई वी एम कचरे में डालो , चुनाव-आयोग निष्पक्ष बनाओ ।
चुनाव-आयोग जैसा पहले था,फिर से उसको वैसा कर दो ;
टी एन शेषन को फिर से लाओ, जनादेश सम्मानित कर दो ।
ये सुप्रीमकोर्ट को करना ही होगा,अच्छीसरकार बनेगी तब ही;
शेष काम सरकार करेगी , भारत-वर्ष बचेगा तब ही ।
“जय सनातन-धर्म”, रचनाकार : ब्रजेश सिंह सेंगर “विधिज्ञ”
