भारत की सेना और “जेन-जी” (भाग-5)
कितना सुंदर देश था भारत ? नेता ने बरबाद कर दिया ;
अब्बासी-हिंदू भारत का नेता , दुश्मन-देशों का काम किया ।
पूरा-भारत खुद लूट रहा है , व्यापारी-साथी तो बहाना है ;
नदियां , पहाड़ , जंगल सब काटे , पर्यावरण मिटाना है ।
भारत को कंगाल कर रहा , सबको मजदूर बनाना है ;
पांच-किलो राशन के बदले , उसका सब-कुछ छीनना है ।
शिक्षा , स्वास्थ्य , धर्म का दुश्मन , पेपर लीक कराता है ;
कला-संस्कृति मिटा रहा है , हिंदू-मंदिर लुटवाता है ।
“फ्री-मेजन” इसका मजहब है, शैतान की पूजा करने वाला ;
हिंदू-धर्म का पक्का-दुश्मन , मंदिर-मूर्ति तोड़ने वाला ।
काशी के पौराणिक-मंदिर , अक्षयवट , मणिकर्णिका घाट ;
म्लेच्छों से ज्यादा तोड़ रहा है , हिंदू की लगा रहा है बाट ।
छलिया , धोखेबाज , कुटिल है , शत-प्रतिशत ये झूठा है ;
पूरे भारत को धोखा देता , पापी शैतान अनूठा है ।
शैतान भी अपने-लोग छोड़ता, ये अपनों का गला काटता ;
जिन-कंधों पर चढ़कर बढ़ता , उनको हरदम तोड़ा करता ।
भ्रष्टाचार का महारथी है , काले-धन का खिलाड़ी है ;
इसका पूरा-साम्राज्य है काला , पर हिंदू महा-अनाड़ी है ।
हृदयहीन जो राक्षस-नेता , उसको हृदय-सम्राट बनाया ;
अंधभक्त सब महामूर्ख हैं , खुद ही अपना-गला कटाया ।
वोटों की चोरी – टैक्स डकैती , टोल-टैक्स से लूट रहा है ;
“राम-मंदिर” को कितना लूटा ? ज्यादातर मंदिर लूट रहा है ।
लूट-डकैती का सारा-धन , “केयर-फंड” में रखता है ;
दुश्मन-देशों से रिश्वत मिलती , वो भी इसी में रखता है ।
लूटपाट – रिश्वत की दौलत , जिसका पारावार नहीं है ;
सारी-अय्याशी इसी से करता, किसी का पुर्साहाल नहीं है ।
सबसे अधिक ड्रेस हैं इसकी , दिन भर ड्रेस बदलता है ;
लगता जैसे सरकस का जोकर , इतने स्वांग रचाता है ।
चीन – अमेरिका बड़े – मदारी , ये उनका छोटा – बंदर है ;
छप्पन-इंची कहने वाला , क्या जल्दी जेल के अंदर है ?
सारे-भेद खुल चुके इसके , घड़ा पाप का फूटता जाता ;
पर सारा-सिस्टम पूर्ण-नपुंसक , इसी से नेता बचता जाता ।
भारत की सेना और “जेन-जी”, अब ये ही देश बचायेंगे ;
अब दोनों खुलकर आने वाले , देश के दुश्मन मिट जायेंगे ।
पर सबको सावधान रहना है , नेता कुछ भी कर सकता है ;
दंगा-फसाद गृहयुद्ध-भयानक, ये कुछ भी करवा सकता है ।
“जय-हिन्द”, ब्रजेश सिंह सेंगर “विधिज्ञ”,
