शंकराचार्य का धर्मादेश
सरकारी – बाबा हैं पालतू – बाबा , महाधूर्त – मक्कार हैं ;
चरित्रहीन ये सब के सब हैं , भारत के गद्दार हैं ।
धर्म – सनातन के ये दुश्मन , महाम्लेच्छ है अंतर्मन ;
सारे गंदे – काम हैं इनके , सब-कुछ गंदा तन-मन-धन ।
शंकराचार्यों के यही विरोधी , सरकारों के पिट्ठू हैं ;
जो धर्महीन – अज्ञानी हिंदू , सब बन चुके निखट्टू हैं ।
गंदे – बाबाओं के यही हैं चेले , शंकराचार्य अकेले हैं ;
गिने – चुने ही भक्त हैं उनके , हर संकट को झेले हैं ।
ये सब के सब हैं सच्चे-हिंदू , धर्म की रक्षा करते हैं ;
धर्म भी इनकी करेगा रक्षा , धर्म के द्रोही मरते हैं ।
जल्द मरेंगे धर्म के द्रोही , बुरी मौत मरने वाले ;
खुद ही खोदा पाप का गड्ढा , उसी में ये सब गिरने वाले ।
“भविष्य-मालिका” बता रही है , शास्त्रों में भी कहा गया है ;
होने वाला गृहयुद्ध भयानक , जो भी पापी है मिटा हुआ है ।
मंदिर तोड़ने वाले नेता , बहुत बड़े ये पापी हैं ;
“मणिकर्णिका” तक तोड़ दिया है , धर्म के ये अपराधी हैं ।
पापों को इतना बढ़ा लिया है,महाविनाश को बुला लिया है ;
पूरे देश में आग लगेगी , बारूद इन्होंने बिछा दिया है ।
“अवतार-कल्कि” प्राकट्य हो रहा , कोई पापी नहीं बचेगा ;
पापी – नेता , बाबा , अफसर , अब्बासी-हिंदू सभी मरेगा ।
इतने घृणित ये सारे पापी , इनको म्लेच्छ ही मारेंगे ;
इसके बाद “कल्कि” के सैनिक, पापी-म्लेच्छों को मारेंगे ।
अधिसंख्यक पापी भारत के , सौ – करोड़ मारे जाएंगे ;
तेंतीस – करोड़ जो धर्मनिष्ठ हैं , वे हिंदू बच जायेंगे ।
तेंतीस-करोड़ हैं “देव” हमारे, हर-एक करेगा एक की रक्षा ;
“धर्मो रक्षति रक्षित:” , शत – प्रतिशत है पूर्ण – सुरक्षा ।
बहुत शीघ्र ये होने वाला , अब ये टाले नहीं टलेगा ;
क्योंकि ब्रेनडेड जो हिंदू , वो धर्म-मार्ग पर न आयेगा ।
जो लाया सौगात मौत की , ये अब्बासी – हिंदू नेता ;
सफल हो रही साजिश इसकी, हिंदू-प्राणों को ये ही लेता ।
धर्मनिष्ठ जितने भी हिंदू ! सावधान सारे हो जाओ ;
हर-पल जागरूक रहना है , धर्म की रक्षा करने आओ ।
धर्म की रक्षा हर हालत में , कोई कसर नहीं छोड़ो ;
महादुष्ट अब्बासी – हिंदू , इस नेता को अभी पछाड़ो ।
शंकराचार्य का धर्मादेश , हिंदू ! तुझे मानना है ;
ऐसा करने वाले हिंदू को , हर संकट से बच जाना है ।
“जय सनातन-धर्म”, रचनाकार : ब्रजेश सिंह सेंगर “विधिज्ञ”
