नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में हैदराबाद की एक रैली में देशवासियों से एक साल तक सोना न खरीदने के आह्वान के बाद ज्वेलरी सेक्टर में हड़कंप मच गया है। इस अपील पर प्रतिक्रिया देते हुए चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने व्यापारिक और आर्थिक स्तर पर बड़े नुकसान की संभावना जताई है।
मांग में भारी गिरावट का अनुमान
CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री की इस अपील से शादियों के पीक सीजन में गहनों की मांग में भारी कमी आ सकती है। संगठन के मुताबिक, भारत वर्तमान में चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्वर्ण उपभोक्ता है, जहाँ सालाना 700 से 800 टन सोने की खपत होती है। अनुमान है कि इस आह्वान के बाद देश में सोने की कुल खपत गिरकर 500 टन तक सिमट सकती है।
व्यापारियों और कारीगरों की चिंताएँ
ज्वेलरी उद्योग से जुड़े व्यापारियों ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। CTI के अनुसार, इसके मुख्य प्रभाव निम्नलिखित क्षेत्रों पर पड़ सकते हैं:-
* छंटनी का खतरा: छोटे ज्वैलर्स, सुनार और कारीगरों को अंदेशा है कि बिक्री ठप होने से वे कर्मचारियों को वेतन देने में असमर्थ होंगे, जिससे बड़े पैमाने पर छंटनी करनी पड़ सकती है।
* शादियों के सीजन पर असर: संगठन के महासचिव गुरमीत अरोड़ा और रमेश आहूजा ने कहा कि भारतीय संस्कृति में शादियों के दौरान सोने की खरीदारी अनिवार्य मानी जाती है। ऐसे समय में यह अपील ग्राहकों के बीच संशय और डर पैदा कर सकती है।
* शेयर बाजार पर प्रभाव: CTI ने आशंका जताई है कि टाइटन, कल्याण ज्वैलर्स और सेनको गोल्ड जैसी दिग्गज लिस्टेड कंपनियों के शेयरों पर इसका नकारात्मक असर देखने को मिल सकता है।
नई रणनीतियों की आवश्यकता!
बृजेश गोयल के मुताबिक, यह अपील ज्वेलरी इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा झटका है। बाजार विशेषज्ञों और संगठन का मानना है कि अब ज्वेलरी कंपनियों को अपनी व्यापारिक गतिविधियों को सुचारू रखने के लिए पूरी तरह से नई रणनीतियां अपनानी होंगी ताकि इस चुनौतीपूर्ण समय से निपटा जा सके।
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