शंकराचार्य का अपमान कर रहे
भ्रष्टाचार से बुद्धि भ्रष्ट है , देश के नेता-अफसर की ;
शंकराचार्य का अपमान कर रहे , कठपुतली ये नफरत की ।
हिंदू ! कहलाने के योग्य नहीं ये , पूरी तरह से म्लेच्छ हैं ;
अब्बासी-हिंदू भारत का नेता , वो तो पूरा ही महाम्लेच्छ है ।
राक्षस-राज से भी बदतर है भारत में चलता ये म्लेच्छ-राज ;
अंग्रेज-मुगल तक पानी भरते , इतने गंदे हैं इनके काज ।
नस-नस में भ्रष्टाचार दौड़ता , केवल पाप किया करते हैं ;
भारत के ये नेता-अफसर, हिंदू ! को ही पीड़ित करते हैं ।
ये म्लेच्छों से इतना डरते हैं , कपड़े गंदे हो जाते हैं ;
इसीलिये ये बार – बार , कपड़ों को बदलने जाते हैं ।
दिन भर कपड़े बदल रहा है, अब्बासी-हिंदू भारत का नेता ;
केवल हिंदू के लिये शेर है , असल में गीदड़ है ये नेता ।
धर्महीन – अज्ञानी हिंदू , अपनी पहचान को भूल गये हैं ;
लालच-अज्ञान-स्वार्थ के कारण , अंधभक्त सब बने हुये हैं ।
पापी-नेता के सभी समर्थक , उसके पापों को ढोते हैं ;
दुर्गति होगी अब इन सबकी , जल्दी ही वे दिन आते हैं ।
बहुत-बुरे दिन आने वाले , पापी जितने नेता-अफसर हैं ;
अंतिम-कील ठोंक ली खुद ही , गंवा चुके सारे अवसर हैं ।
इनको माफी नहीं मिलेगी , इतना बड़ा इनका अपराध ;
दंड अधिकतम मिलेगा इनको , तभी कटें इनके अपराध ।
भागे राह नहीं पायेंगे , कुछ भी काम नहीं आयेगा ;
जितने पाप किये हैं जिसने , उसी बराबर दंड पायेगा ।
घड़ा पाप का भर चुका है पूरा, अब तो ऊपर से उफन रहा ;
महाकुंभ से – माघ मेले तक , इनका सारा पाप दिख रहा ।
कालनेमि से बढ़कर हैं सब , अब्बासी-हिंदू हैं देश के नेता ;
हुआ मानसिक खतना जिनका, वो हिंदू से बदला लेता ।
मंदिर तोड़ करें गलियारा,मणिकर्णिका घाट तक तोड़ दिया ;
मां-गंगा को कर दिया मैला , गौ-मांस का कारोबार किया ।
आखिर कब तक बचेंगे पापी ? कब होगा इनका संहार ?
“भगवान-कल्कि” आने वाले हैं , वही करेंगे उपसंहार ।
“भविष्य-मालिका” में वर्णित है, प्राकट्य शीघ्र होने वाला है ;
इसी वर्ष ही होने वाला है , तभी धर्म बचने वाला है ।
थोड़ी भी बुद्धि बची है जिनमें , धर्म-मार्ग में आ जायें ;
अंधभक्त जितने नेता के , वो बहुत-बुरी गति को पायें ।
महायुद्ध होने वाला है , आर – पार का निर्णय होगा ;
सारे – म्लेच्छ मिटेंगे पापी , भारत से “रामराज्य” होगा ।
“जय सनातन-धर्म”, रचनाकार : ब्रजेश सिंह सेंगर “विधिज्ञ”
