“फ्री-मेजन” है गुप्त संस्था , पैशाचिक सब कार्य हैं ;
“शैतान” है इनका इष्ट-देवता , नरबलि देना अपरिहार्य है ।
बाल यौन शोषण भी करते , उन्हें मार कर खून भी पीते ;
इसमें उनका विश्वास यही है , इससे सौ-बरस तक जीते ।
अजैविक भी खुद को कहते हैं, कहते उनकी अलग है दुनिया ;
राष्ट्रीय समलैंगिक संघ भी , इसी से निकली इनकी दुनिया ।
तथाकथित हिंदूवादी दल , इनकी नाजायज औलाद है ;
लूटमार के लिये इकट्ठे , पर जंग लगे फौलाद हैं ।
सब के सब मिट्टी के शेर हैं , अपने मुख्यालय में पिटते ;
प्रेस-मीडिया फांस रखा है , इसी की दम पर छिपते फिरते ।
धर्महीन – अज्ञानी हिंदू , अपना – धर्म नहीं जाना ;
“फ्री-मेजन” को क्या समझेंगे ? किसी का मर्म नहीं जाना ।
इसीलिये मिटता जाता है , पूरी तरह भी मिट सकता है ;
अब्बासी-हिंदू नेता के रहते , कुछ भी मुमकिन हो सकता है ।
“फ्री-मेजन” पूरी दुनिया में , बहुत बड़ी ये ताकत है ;
“शैतान” से ताकत इनको मिलती,मानवता पर लानत है ।
अब्बासी-हिंदू नेता व अफसर, ज्यादातर “फ्री-मेजन” हैं ;
सब के सब शैतान हैं पूरे , दुराचार ही भोजन है ।
हिंदू-धर्म से ये डरते हैं , क्योंकि वो इन्हें मिटा सकता है ;
इसीलिये मंदिर तुड़वाकर , तीर्थ नष्ट ये करता है ।
सर्वश्रेष्ठ है धर्म – सनातन , कभी नहीं मिट सकता है ;
जैसे ही हिंदू जाग जायेगा , “फ्री-मेजन” मिट सकता है ।
हिंदू ! तुम्हें जागना होगा , मानवता को बचाना होगा ;
“फ्री-मेजन” हो रहा है हावी , भारत से इसे मिटाना होगा ।
सरकारों में भरे हुये हैं , चरित्रहीन ये भ्रष्टाचारी ;
हिंदू – धर्म मिटाना चाहें , मिलकर सारे ये व्यभिचारी ।
पत्नी की मर्यादा त्यागें , वर्जनाहीन इनका जीवन है ;
इनका बिल्कुल अलग है मजहब , पापपूर्ण पूरा जीवन है ।
“फ्री-मेजन” संस्था को जानो , हर हिंदू ! को जानना है ;
ऑस्ट्रेलिया की “श्वेता-पुरोहित “, उनका चैनल देखना है ।
अभियन्ता ये बहुत बड़ी हैं , बहुत बड़ी हैं अन्वेषक ;
ज्योतिष-शास्त्र में पारंगत हैं , धर्म-सनातन की वाहक ।
समझ का पूरा खेल चल रहा , हिंदू ! तुम नासमझी छोड़ो ;
मौत के मुंह में देश जा रहा , फौरन उसकी दिशा को मोड़ो ।
जागो हिंदू ! अब तो जागो , धर्म , देश व राष्ट्र बचाओ ;
यदि सारे संकट से बचना है , तो फौरन धर्म-मार्ग में आओ ।
“जय सनातन-धर्म”, रचनाकार : ब्रजेश सिंह सेंगर “विधिज्ञ”
