राज्यों संग अन्याय मत करो
राज्यों संग अन्याय मत करो , अलगाववाद बढ़ सकता है ;
गुंडागर्दी बंद करो अब , भारत-वर्ष टूट सकता है ।
जनादेश का हरण मत करो , क्षरण देश का हो जायेगा ;
जब हुयी है हत्या लोकतंत्र की, तब मरण देश का हो जायेगा ।
सुप्रीम-कोर्ट क्यों पथराया है ? ये निश्चचला तोड़नी होगी ;
न्याय की देवी न्याय को तरसे , न्याय की रक्षा करनी होगी ।
भारत-माता संग बलात्कार है , उसी के पापी-बेटे करते ;
नेता-अफसर पाप कर रहे, कायर-कमजोर भुगतते रहते ।
धर्महीन – अज्ञानी – हिंदू , अब भी ताली पीट रहा है ;
अपनी माता के हत्यारों संग, प्रेम की पींगें बढ़ा रहा है ।
जबकि यही निशाने पर हैं , अगला-नंबर इन्हीं का होगा ;
अब्बासी-हिंदू नेता का सपना , इसी तरह से पूरा होगा ।
भारत – वर्ष मिटा देने का , इस नेता का सपना है ;
सबसे – बड़ा धर्म का दुश्मन , हिंदू ने समझा अपना है ।
ये नहीं देश का – नहीं धर्म का , न पत्नी – परिवार का ;
फ्री-मेजन परिवार है इसका , जो कि है शैतान का ।
अज्ञानी-हिंदू ये नहीं जानता , अज्ञान ही उसकी मौत है ;
गाली – बाज हिंदू – यूट्यूबर , पहले इनकी ही मौत है ।
बरसाती – पतंगे ही हैं सारे , बहुत – शीघ्र मिट जाना है ;
अज्ञान की निद्रा सोने वाला , पूरी – तरह निपट जाना है ।
भविष्य-मालिका भविष्य का दर्पण,बड़ी-तबाही दिखा रहा है ;
सिलसिला मौतका शुरू हो चुका,गृहयुद्ध भयानक बता रहा है
जब शासन में ही अपराधी , बेलगाम – हत्यारे हैं ;
धर्म के दुश्मन – देश के दुश्मन , करते वारे – न्यारे हैं ।
पूरे-भारत की लूट कर रहे , भारत में आग लगाते हैं ;
अपने-पापों को छुपा रहे हैं , मुद्दे से ध्यान हटाते हैं ।
इनकी-अय्याशी असली-मुद्दा , एपस्टीन-फाइल में छाया ;
भारत में भी कई-फाइलें , “मधु-किश्वर” ने बतलाया ।
“मणि-शंकर” ने सबसे पहले , इसके सच को बतलाया ;
“सुब्रमण्यम-स्वामी” ने सदा-सदा ही,सम्पूर्ण-देश को चेताया ।
पर हिंदू ! कभी नहीं समझा है , मुट्ठी-भर को छोड़कर ;
निहित-स्वार्थ में अंधे हैं सब , सत्य से मुख को मोड़कर ।
अंधे-कुयें में गिरेंगे सारे , अंधों की तरह भटकने वाले ;
तैंतीस-करोड़ हिंदू ही बचेंगे , “विष्णु-कृपा” को पाने वाले ।
दंगों की आग भड़कने वाली , सौ-करोड़ मिट जायेंगे ;
पर सारे-पापी मिटते-मिटते , कहर देश पर ढा जायेंगें ।
“जय सनातन-धर्म”, ब्रजेश सिंह सेंगर “विधिज्ञ”, १-६-२०२६
