“टी०एन० शेषन” को फिर से लाओ
भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुके , भारत के सारे – संस्थान ;
रत्ती – भर भी न्याय नहीं है , सत्य का कोई न स्थान ।
सुप्रीम-कोर्ट की गहरी-निद्रा , कुम्भकर्ण के समकक्ष रखो ;
कॉलेजियम-सिस्टम है तेरा,कम से कम उसकी ही लाज रखो।
निहित-स्वार्थी हैं सरकारें , हर जगह न्याय को मार रहीं ;
देशभक्ति को भूल चुकी हैं , संविधान को मिटा रहीं ।
चरित्रहीनता – भ्रष्टाचार से , राजनीति है पूर्ण – प्रदूषित ;
गंदी – नाली में बहती जाती , गद्दारी से है अच्छादित ।
कोई किसी का सगा नहीं है, अपने-अपने स्वार्थ हैं केवल ;
चोर – चोर मौसेरे – भाई , लूटमार में साथ हैं केवल ।
मिलकर देश को लूट रहे हैं , कोई नहीं बचाने वाला ;
देश का चौकीदार चोर है , यही तो है लुटवाने वाला ।
सुप्रीम – कोर्ट की जिम्मेदारी , पूरी तरह निभाना होगा ;
पूरा – सिस्टम भ्रष्ट हो चुका , तुमको ही देश बचाना होगा ।
देश बचेगा – तू भी बचेगा , भारतवासी सब बच जायेंगे ;
सुप्रीम-कोर्ट अब गफलत छोड़ो, वरना सब मिट जायेंगे ।
तू तो दूरन्देश बहुत है, तुझको भविष्य की सोचना होगा ;
तेरी-कुर्सी जब पूर्ण-सुरक्षित , तो निर्भय होकर चलना होगा ।
सबसे पहला काम ये करो , चुनाव-आयोग निष्पक्ष बनाओ ;
टी०एन०शेषन को फिर से लाओ,अपनी भूमिका पुनः निभाओ
साथ – साथ ये भी करना है , ई वी एम हटाना है ;
वोटों की चोरी बहुत हो रही , पूरी तरह रोकना है ।
परमावश्यक कार्य ये दोनों , शीघ्रातिशीघ्र इनको करना है ;
फौरन इन कामों को कर दे, अच्छी-सरकार तभी बनना है ।
अच्छी-सरकार नहीं भारत में , सबसे बड़ा यही रोना है ;
कोई चुनाव निष्पक्ष नहीं है , इसीलिये ये ही होना है ।
जनादेश का गला घुट चुका , लोकतंत्र की हुयी है हत्या ;
हत्यारों के हाथ में सत्ता , होने वाली है देश की हत्या ।
सुप्रीम-कोर्ट अब देर मत करो , हत्यारों से देश बचाओ ;
ई वी एम कूड़े में फेंको , चुनाव-आयोग निष्पक्ष बनाओ ।
अभी नहीं तो कभी नहीं , ये देश नष्ट होने वाला है ;
“गृहयुद्ध-महायुद्ध-विश्वयुद्ध” ,अब बहुत-जल्द होने वाला है ।
“जय सनातन-धर्म”, रचनाकार : ब्रजेश सिंह सेंगर “विधिज्ञ”
