हैदराबाद (विशेष संवाददाता, इंडिया स्पीक डेली)। सत्ता के गलियारों से दूर जब पत्रकारिता सरोकार और साधना बन जाती है, तब उसे किसी भव्य मंच या कैमरों की चकाचौंध की आवश्यकता नहीं रहती। ‘इंडिया स्पीक डेली’ के संस्थापक और वरिष्ठ पत्रकार संदीप देव को औपनिषदीय निष्कला आम्नाय सहस्रार्क द्युति मठ श्रीमद् जगद्गुरु शारदा सर्वज्ञ पीठम् न्यास, काश्मीर (भारत) द्वारा प्रतिष्ठित ‘श्री शारदा शताब्दी विशिष्ट पत्रकारिता सम्मान 2026′ से विभूषित किया गया है।
चातुर्मास के पावन प्रवास के दौरान 21 सितम्बर 2026 को हैदराबाद में पीठ के पीठाधीश्वर अनन्त श्री स्वामी अमृतानन्द देव तीर्थ जी महाराज ने संदीप देव को यह सम्मान व्यक्तिगत रूप से अपने कर-कमलों द्वारा प्रदान किया।

उल्लेखनीय है कि 19 सितम्बर (शारदा अष्टमी) को हैदराबाद के शमशाबाद में आयोजित 15 वें श्री शारदा शताब्दी सम्मान समारोह में संदीप देव अपरिहार्य कारणों से उपस्थित नहीं हो सके थे। उस मुख्य समारोह में तेलंगाना के माननीय राज्यपाल श्री शिव प्रताप शुक्ल मुख्य अतिथि, भारत के सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री पंकज मिथल एवं काशी विद्वत् परिषद् के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। मुख्य आयोजन में संदीप देव की भौतिक अनुपस्थिति के बावजूद पीठ ने निर्णय की शुचिता को बनाए रखा और सम्मान को सुरक्षित रखते हुए उनकी प्रतीक्षा की, जिसे सनातनी मर्यादा और पीठ का सत्य के प्रति अटूट विश्वास के रूप में देखा जा रहा है।
“यह पुरस्कार नहीं गुरु–आज्ञा है“: संदीप देव
सम्मान ग्रहण करने के उपरांत अपने विचार व्यक्त करते हुए संदीप देव ने कहा, “19 तारीख को मैं उपस्थित नहीं हो सका था, किंतु माँ शारदा का बुलावा आज आया। यह कोई औपचारिक जलसा या कैमरों की चकाचौंध से भरा आयोजन नहीं था; यह चातुर्मास की पावन साधना और गुरु-चरणों का सान्निध्य था, जिसने उस दिन के अभाव को पूरा कर दिया। यह सम्मान व्यक्ति का नहीं, उस स्वतंत्र लेखनी का है जो सत्ता का प्रवक्ता बनने से इनकार करती है।”

संदीप देव ने आगे कहा, “निष्पक्ष और स्वाभिमानी पत्रकारिता आज के दौर में एक कठिन साधना है। माँ शारदा के नाम से मिला यह पत्र इस बात का उद्घोष है कि पत्रकार सत्ता और कॉरपोरेट के आगे नहीं झुकेगा, न किसी प्रलोभन से बिकेगा, और सत्य किसी मंच की अनुमति का मोहताज नहीं रहेगा। इंडिया स्पीक डेली का संकल्प सदैव स्पष्ट रहा है—’न लेफ्ट, न राइट, केवल सनातनी स्वर।’ ढाई दशक की पत्रकारिता में मैंने यही सीखा कि लेखनी यदि झुक गई तो समाचार भले बच जाए, आत्मा मर जाती है। पीठाधीश्वर के कर कमलों से मिले इस पत्र को मैं पुरस्कार नहीं, गुरु-आज्ञा मानता हूँ—लिखते रहो, झुको मत, बिको मत।”
संदीप देव ने आयोजन समिति के कर्नल अश्विनी कुमार (मुख्य कार्यकारी अधिकारी), डॉ. राजा लांगेर (प्रबन्ध न्यासी), मुख्य यजमान श्री सी. वी. कसाना सहित पूरी परंपरा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की, जो विस्थापन के दर्द के बीच भी भारत की ज्ञान-परंपरा और काश्मीर की आध्यात्मिक चेतना को जीवंत रखे हुए है।
“भवन छिन सकता है, स्मृति नहीं“: पूज्य पीठाधीश्वर
पत्रकारिता के नैतिक दायित्व को रेखांकित करते हुए पीठाधीश्वर अनन्त श्री स्वामी अमृतानन्द देव तीर्थ जी महाराज ने कहा:-
“काश्मीर का शारदा सर्वज्ञ पीठ केवल खंडहर नहीं, भारत की सनातन विद्या–राजधानी है। भवन छिन सकता है, पर स्मृति नहीं छिनती। यह सम्मान पत्र व्यक्ति को ऊँचा करने के लिए नहीं, बल्कि यह स्मरण कराने के लिए है कि सत्य की राह पर तुम अकेले नहीं हो। पत्रकारिता यदि माँ शारदा की सेवा है, तो वह भय या लोभ से नहीं, घोर तप से लिखी जाती है। यह सम्मान नहीं, लेखनी का उत्तरदायित्व है।“
विस्थापित पीठ और सांस्कृतिक संकल्प
मां सरस्वती से आदि शंकर ने जिस पीठ पर शास्त्रार्थ किया और अंत में मां शारदा ने आदि शंकर को आशीर्वाद देकर शंकराचार्य की उपाधि दी, यह वही प्रतिष्ठित शारदा सर्वज्ञ पीठ है, जिसका मूल स्थल ग्राम शारदी (तहसील अटमुकाम, जिला नीलम, पाक-अधिकृत कश्मीर) में स्थित है, जिसका वर्तमान विस्थापन केंद्र शिव मन्दिर लंगेत (हंदवाड़ा, कुपवाड़ा) में संचालित है, जिसके पीठाधीश्वर श्री स्वामी अमृतानन्द देव तीर्थ जी महाराज हैं।
एक पत्रकार के रूप में इस पीठ से सम्मानित होना संदीप देव पर माता सरस्वती का न केवल साक्षात आशीर्वाद है, बल्कि सत्य के प्रति उनके समर्पण को भी दर्शाता है।
संदीप देव: एक परिचय
ढाई दशक से निर्भीक पत्रकारिता और शोधपरक लेखन में सक्रिय संदीप देव ‘इंडिया स्पीक डेली’ के संस्थापक-संपादक और कपोत प्रकाशन के संचालक हैं। दैनिक जागरण और नई दुनिया जैसे मुख्यधारा के मीडिया संस्थानों में एक दशक से अधिक समय तक क्राइम व कोर्ट रिपोर्टिंग कर चुके संदीप देव काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) के छात्र हैं। गुजरात दंगों पर सुप्रीम कोर्ट की एसआईटी रिपोर्ट पर आधारित उनकी पहली पुस्तक ‘साजिश की कहानी-तथ्यों की जुबानी’ के अलावा उनकी अब तक कुल 9 शोधपरक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।
वे विश्वप्रसिद्ध प्रकाशक ब्लूम्सबरी इंडिया के पहले हिंदी लेखक हैं और उनकी चर्चित कृति ‘कहानी कम्युनिस्टों की’ नीलसन-जागरण बेस्टसेलर सूची में शीर्ष पर रही है। हिंदी कथेतर (नॉन-फिक्शन) लेखन में एक लाख से अधिक प्रतियों की बिक्री का कीर्तिमान रचने के साथ-साथ वे ‘कुरुक्षेत्र गुरुकुलम् फाउंडेशन’ के माध्यम से शिक्षा और सनातनी मूल्यों के संवर्धन में भी रत हैं, जिसके लिए उन्हें ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज द्वारा ‘उत्तम सनातनी’ की उपाधि से भी नवाजा जा चुका है।
साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में संदीप देव को अब तक कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो चुके हैं:
साहित्य अकादमी पुरस्कार (2017): उत्कृष्ट कथेतर एवं शोधपरक लेखन के लिए मध्य प्रदेश सरकार द्वारा प्रदत्त।
पंडित मदनमोहन मालवीय पत्रकारिता सम्मान: मूल्य-आधारित और तथ्यात्मक पत्रकारिता के लिए।
शिवाजी रत्न सम्मान: निर्भीक एवं राष्ट्रवादी वैचारिक चेतना के प्रसार हेतु।
श्री शारदा शताब्दी विशिष्ट पत्रकारिता सम्मान (2026): काश्मीर के औपनिषदीय निष्कला आम्नाय सहस्रार्क द्युति मठ श्रीमद् जगद्गुरु शारदा सर्वज्ञ पीठम् न्यास द्वारा चातुर्मास प्रवास में पीठाधीश्वर अनन्त श्री स्वामी अमृतानन्द देव तीर्थ जी महाराज के कर-कमलों द्वारा प्रदत्त।

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बहोत बधाई संदिपजी मॉ शारदा आप पर हमेशा कृपा बरसा ती रहे
बहुत बड़ी उपलब्धि! संदीप जी मां सरस्वती जी की कृपा सदैव आप पर बनी रहे!! आप के श्रम और श्वेता जी के समर्पण से आप सदा विजेता बनें रहें!
आप ने परमपूज्य आदिशंकराचार्य जी महाराज की परम्परा को आगे बढ़ाया है! आप को नमन है