अब तो यही है अंतिम आशा
चुनाव-आयोग कैसा भारत का ? सत्ताधीशों का गुलाम है ,
वोटों की चोरी करता है , पूरा किस्सा आम है ।
जनादेश का गला घोंटता , लोकतंत्र का हत्यारा ,
महास्वार्थी – महाधूर्त है , भारत को कर दिया बेचारा ।
न्यायपालिका हो चुकी है जर्जर , निहित-स्वार्थ में डूबी है ,
अब्बासी-हिंदू भारत का नेता , ब्लैकमेलिंग की खूबी है ।
ब्लैकमेल पहले होता है , बाद में सबको करता है ,
सभी की फाइल खोल चुका है , उसका भय दिखलाता है ।
पर अमरीका – चीन से डरता , क्योंकि उनकी कठपुतली है ,
बहुत सी सी-डी पास हैं उनके , तभी तो हालत पतली है ।
ये फार्मूला सीख चुका है , भारत में अपनाता है ,
लगभग सारे नेता – अफसर , इससे उनको डरवाता है ।
जिनके भीतर कई छेद हैं , सब के सब वे डरते हैं ,
चरित्र का संकट बड़ा विकट है , करनी का फल भरते हैं ।
चरित्रवान नेता व अफसर , भारत में इनका पूर्ण-अभाव ,
कमजोर नसें दब रही हैं सबकी , नहीं है कोई पुरसाहाल ।
इसी से भारत डूब रहा है , शीघ्र ही पूरा डूब जायेगा ,
अब तो यही है अंतिम-आशा , जैन-जी जब आयेगा ।
यही नियत लग रही देश की , उथल – पुथल पूरी होगी ,
सिद्धांत कर्म का सदा अटल है , बहुत-बुरी बर्बादी होगी ।
जिनका खून हो चुका पानी , पानी की भांति बह जायेगा ,
चरित्रहीन व धर्म का द्रोही , वो पापी मिट जायेगा ।
“भविष्य-मालिका” भविष्य का दर्शन,उसमें हमें झांकना है ,
धर्महीन – अज्ञानी हिंदू को , चक्की में पिस जाना है ।
देवासुर – संग्राम – भयंकर , भारत में होने वाला है ,
“धर्मनिष्ठ-हिंदू” ही बचेगा,जो “विष्णु-कृपा” पाने वाला है ।
सौ-करोड़ तक मिट सकते हैं , जो भी धर्म के द्रोही हैं ,
तैंतीस-करोड़ ही बच पायेंगे,जो धर्म-सनातन-ध्वजवाही हैं ।
यही नियति हो चुकी देश की , तेजी से उसे तरफ बढ़ रहा ,
वामी,कामी,जिम्मी,सेक्युलर,मौत के मुँह की ओर जा रहा ।
चरित्रहीन – बेईमान जो सारे , बोझ बन चुके धरती के ,
शीघ्र ही ये मिटने वाले हैं , कलंक मिटेंगे धरती के ।
स्वाभाविक है गति कर्मों की , अपने अंजाम को पाती है ,
जैसा करोगे – वैसा भरोगे , बस देर-सबेर हो जाती है ।
देर-सबेर के कई कारण हैं , पर बिलकुल अंधेर नहीं है ,
जल्दी अंधियारा छंटने वाला है , सूर्योदय में देर नहीं है ।
“जय सनातन-धर्म”, रचनाकार:ब्रजेश सिंह सेंगर “विधिज्ञ”
