पवित्र आत्मा “फरसा-बाबा” , “गोलोक-धाम” को चले गये ;
नेता-अफसर नाली के कीड़े , नाली में ही पड़े रह गये ।
जितने बहुत बड़े हैं पापी, गौ-मांस का जो निर्यात कराते ;
म्लेच्छों का ये पेट भर रहे , धर्म का सत्यानाश कराते ।
कितने अधिक पतित हैं नेता ? पतन की चरमावस्था है ;
इसीलिये इस देश-प्रदेश की , इतनी अधिक दुरावस्था है ।
गौ-रक्षक देश में मारे जाते , गौ-भक्षक को सम्मान मिले ;
कई मिनिस्टर गौ-भक्षक हैं , केंद्र सहित सब जगह मिलें ।
महानीच एक हिंदू-नेता है , जो गौ-मांस खाने को कहता ;
ये गंदा समलैंगिक भी है, समलैंगिकता को ढूंढा करता ।
कभी जानवर में ये ढूॅंढे और कभी महाभारत में ;
चरित्रहीनता हदें पार है , गृहयुद्ध करा देगा भारत में ।
गृहयुद्ध-महायुद्ध-विश्वयुद्ध , चरित्रहीनता के कारण होगा ;
एपस्टीन-फाइल के कारण , बहुत शीघ्र भारत में होगा ।
इतने पाप किये नेता ने , रिकॉर्ड विश्व का टूट रहा ;
आयु घट गयी है कलियुग की ,अब कलियुग का अंत हो रहा ।
अंतिम-धक्का अब कलियुग को, बहुत शीघ्र लगने वाला है ;
“अवतार-कल्कि” आ चुका धरा में , शीघ्र प्रकट होने वाला है ।
पापी – नेता अफसर व्यापारी, पाखण्डी-बाबा व व्यभिचारी ;
और साथ ही पापी-जनता , इन सबके मिटने की बारी ।
उल्टी-गिनती शुरू हो चुकी , क्रमशः सब मारे जायेंगे ;
सामान्य रूप से नहीं मरेंगे सब के सब काटे जायेंगे ।
पहले म्लेच्छों के हाथ मरेंगे , बाद में सारे-म्लेच्छ मिटेगें ;
“भविष्य-मालिका” बता रही है, सौ-करोड़ तक लोग मरेंगे ।
धर्म की रक्षा करने वाला , केवल वो ही बच पायेगा ;
“गौ-गीता-गंगा” का रक्षक , “विष्णु-कृपा” से बच पायेगा ।
तेंतीस-करोड़ देवता हमारे , एक की एक करेगा रक्षा ;
सत्यनिष्ठ व धर्मनिष्ठ जो , तेंतीस-करोड़ हिंदू की रक्षा ।
“फरसा-बाबा” की हत्या करके,पापी ने अपना अंत बुलाया ;
दया नहीं अब कोई होगी , करनी का निश्चित फल आया ।
“शंकराचार्य” हैं धर्म के रक्षक , “गौ-गीता-गंगा” की रक्षा ;
“धर्मो रक्षति रक्षित : “ , धर्म – रक्षक की पूर्ण सुरक्षा ।
स्वार्थ, लोभ, भय, भ्रष्टाचार को ,अब तो हिंदू ! त्याग दो ;
चरित्रहीन-बेईमान जो नेता,उन सबको भी तत्क्षण त्याग दो ।
बिन इसके कल्याण नहीं है, पापी के संग तुम पिस जाओगे ;
पापी का संग छोड़ दो हिंदू ! तब ही तुम बच पाओगे ।
“जय सनातन-धर्म”, रचनाकार : ब्रजेश सिंह सेंगर “विधिज्ञ”
