संदीप देव। #EpsteinFiles में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम अनेक बार आने का दावा किया जा रहा है। इस फाइल के एक मेल के अनुसार:-
१) एपस्टीन ने 9 जुलाई, 2017 को एक ईमेल में लिखा: ![]()
“भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने मुझसे सलाह ली और अमेरिकी राष्ट्रपति के फायदे के लिए इज़राइल में नाचे-गाये। वे कुछ हफ़्ते पहले मिले थे। यह काम कर गया!”

नोट:- एपस्टीन अपने मेल में साफ तौर पर लिखता है कि मोदी ने उससे सलाह ली और इज़राइल गए, जहाँ उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति के फायदे के लिए ‘नाचे-गाये’। उसने यह भी कहा कि ‘यह काम कर गया।’
अब यदि हम देखें कि क्या उपरोक्त तिथि के आसपास नरेंद्र मोदी इजरायल गये थे? आइए जांच करें:-
* PM मोदी 4 से 6 जुलाई, 2017 तक इज़राइल के दौरे पर थे। एपस्टीन ने यह ईमेल ठीक इसके तीन दिन बाद 9 जुलाई को लिखा है।
* इज़राइल दौरे से ठीक पहले, 25-26 जून, 2017 को मोदी अमेरिका में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिले थे।
* जेफरी एपस्टीन के ईमेल और तिथिक्रम को जोड़ने पर यह कहा जा सकता है कि प्रधानमंत्री मोदी जून 2017 में अमेरिका गए थे और शायद वहीं उनकी एपस्टीन से मुलाकात या सलाह, जैसा कि एप्सटीन दावा कर रहा है, ली थी! याद रखिए यह एप्सटीन का एकतरफा दावा है! भारत सरकार के प्रवक्ता ने इसे बकवास बात करार दिया है!
* एक हफ़्ते बाद (4 से 6 जुलाई, 2017), मोदी इज़राइल पहुँचे और एप्सटीन के मेल के दावे के अनुसार, “वहाँ नाचे-गाए, और यह काम कर गया!”
अब नाचना-गाना कोई फ्रेज हो सकता है! इसकी पुष्टि एप्सटीन के मेल से नहीं होती। ‘यह काम कर गया!’ यह भी एप्सटीन का एकतरफा दावा है! क्या काम कर गया? यह एप्सटीन ने खुलासा नहीं किया है।
भारत सरकार के प्रवक्ता ने एक छोटा सा प्रेस रिलीज (Pic2) जरूर जारी कर इसे बकवास कहा है, परंतु एप्सटीन से प्रधानमंत्री के मुलाकात का खंडन अभी तक नहीं किया गया है, जो काफी चिंताजनक है।
अब प्रश्न उठता है?
१) क्या नरेंद्र मोदी जी की अमेरिका में यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से कोई मुलाकात हुई थी? वह उससे किस तरह की सलाह ले रहे थे? नहीं मुलाकात हुई तो सरकार स्पष्ट खंडन करे।
२) मोदी के इज़राइल में नाचने-गाने और इससे ट्रंप को फायदा पहुंचाने की बात एप्सटीन क्यों लिख रहा है? यदि ऐसा नहीं हुआ तो इसका ही स्पष्ट खंडन सरकार की ओर से आना चाहिए।
३) एपस्टीन ने लिखा, “यह काम कर गया!” तो इसका क्या मतलब है? सरकार यह भी स्पष्ट करे।
नोट:- नीचे एप्सटीन का मेल है,(pic1) जिसमें भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का नाम स्पष्ट पढ़ सकते हैं।
और हां, यह कोई लीक मेल या फर्जी मेल नहीं है, बल्कि अमेरिकी सरकार द्वारा विशेष अध्यादेश से जारी औपचारिक दस्तावेज है, जिसका कानूनी महत्व है!
याद रखिए कांग्रेस पर लगे बोफोर्स घोटाले का किसी सरकार ने औपचारिक दस्तावेज जारी नहीं किया था, जैसा एप्सटीन फाइल को अमेरिकी सरकार ने औपचारिक जारी किया है। 1987 में स्वीडन के एक रेडियो की खोजी रिपोर्ट पर जब उस समय के विपक्ष जिसमें वी.पी.सिंह सहित भाजपा भी शामिल थी, सवाल उठा रहा था तो एप्सटीन फाइल तो अमेरिका सरकार द्वारा जारी औपचारिक दस्तावेज है, जिस पर भारत सरकार को जवाब देना ही चाहिए।
अतः इसे झूठ, फेक कह कर सरकार, भाजपा या उसके ट्रोलर आरोप से बच नहीं सकते! इसमें सरकार का औपचारिक और विस्तृत बयान आना बेहद आवश्यक है। यह राष्ट्र की गरिमा, देश के प्रधानमंत्री पर एक अंतरराष्ट्रीय यौन अपराधी से संबंध का आरोप और देश की स्वतंत्र विदेश नीति का सीधे-सीधे प्रश्न है?
