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India Speak Daily > इतिहास > स्वर्णिम भारत > मुसलमान और ईसाई जगन्नाथ मंदिर में घुसने के लिए इतने उतावले क्यों?
स्वर्णिम भारत

मुसलमान और ईसाई जगन्नाथ मंदिर में घुसने के लिए इतने उतावले क्यों?

Awadhesh Mishra
By Awadhesh Mishra 8 Min Read
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8 Min Read
Jagannath Temple puri (File Photo)
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उड़ीसा की पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर में गैर हिंदुओं के प्रवेश को लेकर एक हिंदू वकील मृणालिनी पाधी ने याचिका दायर की है। भले ही याचिका किसी हिंदू ने दायर की हो लेकिन आरोप है कि इसके पीछे दिमाग किसी और का है। स्पष्ट है इसके पीछे दिमाग किसी हिंदू हितैषी का तो हो नहीं सकता। सवाल उठता है कि आखिर पुरी के जगन्नाथ मंदिर में ईसाई और मुसलमान प्रवेश को लेकर इतने बेचैन क्यों हैं? स्पष्ट है कि मुसलमानों और ईसाइयों की मंशा इस मंदिर को अपवित्र कर हिंदुओं को नुकसान पहुंचाना है। उनकी नजर यहां की अकूत संपत्ति पर है। इसके पूर्वज मुसलमान हमलावरों और अंग्रेजों की नजर इस मंदिर की महिमा को कम करने तथा यहां की संपत्तियों को लूटने की थी। लेकिन वे लोग हारकर चले गए। अब उनके नए वशंज इस पर नजर गड़ाए बैठे हैं।

मुख्य बिंदु

* मंदिर में गैर-हिंदुओं के प्रवेश के लिए वैसे तो याचिका एक हिंदू वकील ने दी है लेकिन दिमाग किसी और का है

* इस मंदिर में ईश्वरीय सत्ता के रूप में व्याप्त चमत्कारी निशानियों का विज्ञान भी विश्लेषण करने में असमर्थ

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प्रासाद से लेकर प्रसाद तक में है चमत्कार
मालूम हो कि जगन्नाथ मंदिर हिंदुओं के चार धामों में से एक होने के साथ ही बेहद चमत्कारी है। यहां एसी कई निशानियां मौजूद हैं जो ईश्वरीय सत्ता की गवाही देती हैं। इस मंदिर पर सदियों से मुसलिम हमलावरों की नजरों में खटकता रहा है। अंग्रेजों ने भी जगन्नाथ मंदिर में बहुत दिलचस्पी दिखाई लेकिन हार मानकर उन्होंने खुद को इससे दूर ही रखा।। लेकिन एक बार फिर से इस मंदिर को अपवित्र करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है, इसलिए तो गैर हिंदुओं के प्रवेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है।

ईश्वरीय सत्ता का साक्षात दर्शन करना चाहते हैं तो यहां वह साक्ष्य मौजूद है जिनका विज्ञान भी विश्वेषण करने में असमर्थ दिखता है। इस मंदिर में भगवान कृष्ण, अपने भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ विराजमान है। इस मंदिर की ध्वजा हमेशा हवा की विपरीत दिशा में लहराती है। मंदिर के गुंबद में लगा सुदर्शन चक्र का मुख देखने वालों के अभिमुख होता है अर्थात यदि दो लोग दो विपरित दिशाओं से देख रहे हों तो दोनों को ही यह आभास होता है कि सुदर्शन चक्र का मुख उनकी तरफ है। मंदिर के ऊपर लगी ध्वज को हर रोज बदलना पड़ता है, और इसे बदलने के लिए मंदिर के 45वें तल यानि गुंबद तक उल्टे चढ़ना पड़ता है। इस मंदिर के सुदर्शन चक्र और ध्वज शहर के हर कोने से दिख जाते हैं। मान्यता है कि अगर किसी रोज ध्वज नहीं बदला गया तो यह मंदिर 18 साल के लिए स्वतः बंद हो जाएंगे। खास बात है कि मंदिर के शिखर की परछाई कभी भी धरती पर नहीं पड़ती।

इतना ही नहीं इस मंदिर के प्रसाद के बारे में अद्भुत मान्यता है। उसके पकाने से लेकर वितरण तक में चमत्कार है। एक तो मंदिर का प्रसाद आज भी मिट्टी के बर्तन में लकड़ी की आंच पर बनता है। मिट्टी के सात बर्तनों में बनने वाले प्रसाद एक ही चूल्हे पर ऊपर नीचे रखकर बनता है। लेकिन ताज्जुब की बात है कि सबसे पहले प्रसाद सबसे ऊपर रखे बर्तन का ही तैयार होता है जबकि छूने पर सबसे कम गर्म वही बर्तन रहता है। यहां के प्रसाद का एक भी दाना न बेकार होता है और न ही खराब। मंदिर के पट खुले होने तक यह प्रसाद न घटता है न कमता है। लेकिन मंदिर के पट बंद होते ही सारा प्रसाद खत्म हो जाता है।

हमलावरों से लेकर हंताओं तक की नजर मंदिर की संपत्ति पर
इस मंदिर का निर्माम सन 1174 में कलिंग के राजा अनंत वर्मन ने कराया था। करीब 4 लाख स्क्वायर फुट एरिया में बना ये मंदिर चारदिवारी से घिरा हुआ है। कलिंग शैली के इस मंदिर में शिल्प और स्थापत्यकला का बेहतरीन नमूना देखने को मिलता है। मुख्य मंदिर वक्ररेखीय आकार का है और इसके चारों तरफ के मंदिर ऐसे दिखते हैं मानो किसी बड़े पहाड़ के आसपास की छोटी पर्वत चोटियां हों। जगन्नाथ मंदिर की ऐतिहासिकता उसके मौजूदा रूप से कहीं अधिक प्राचीन है। इस मंदिर का जिक्र ऋग्वेद से लेकर महाभारत युग के साहित्य तक में मिलता है। जगन्नाथ मंदिर अपने अकूत खजाने के लिए भी चर्चा में रहता है। इस बात के ऐतिहासिक दस्तावेज हैं कि मंदिर को महान सिख राजा रणजीत सिंह ने इतना सोना दान में दिया था, जितना उन्होंने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर को भी नहीं दिया होगा। यही कारण था कि मुस्लिम हमलावरों की नजरों में जगन्नाथ मंदिर हमेशा खटकता रहा।

भगवान जगन्नाथ के मंदिर को अपवित्र करने के मकसद से 18 बड़े हमले हो चुके हैं। पहला हमला 1340 में बंगाल के मुसलमान शासक सुल्तान इलियास शाह ने किया था। उस हमले में मंदिर को काफी नुकसान हुआ था। लेकिन यहां की मूर्तियों को बचा लिया गया था। इसके 20 साल बाद फिरोज शाह तुगलक ने हमला किया। 1568 में यहां काला पहाड़ नाम के अफगान लुटेरे ने हमला किया था। बताते हैं कि वो दरअसल एक हिंदू था, लेकिन उसने इस्लाम कबूल लिया था। मंदिर को सबसे ज्यादा नुकसान उसी ने पहुंचाया। औरंगजेब के समय में भी इस मंदिर को अपवित्र करने की कोशिश हुई थी। आखिरी हमला अंग्रेजों के समय में हुआ था।

बार-बार के हमलों का नतीजा हुआ कि जगन्नाथ मंदिर में गैर-भारतीय धर्म के लोगों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई। हिंदू, बौद्ध, सिख और जैन जैसे सनातनी धर्मावलंबी बेरोकटोक आ जा सकते हैं। लेकिन मुसलमानों और ईसाइयों के लिए यह छूट नहीं है। वैसे भी कहा गया है कि ओडिया भाषा के धर्मशास्त्रों के अनुसार कलयुग के आखिरी चरण में मलिक नाम का कोई विदेशी राजा भगवान जगन्नाथ का हरण कर के अपने देश ले जाने की कोशिश करेगा। इसके अलावा कुछ गैर-हिंदू धार्मिक गुट भी जगन्नाथ मंदिर को अपवित्र करने के फिराक में हमेशा रहते हैं। यही कारण है कि यहां के लोग मंदिर की सुरक्षा को लेकर बेहद संवेदनशील हैं।

नोट: भगवान जगन्नाथ मंदिर से सम्बंधित अन्य खबरों के लिए नीचे पढें:

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जगन्नाथपुरी की रथ यात्रा: विश्व में केवल यही एक मंदिर है जहाँ भगवान शरीर बदलते हैं।

URL: Why is the ban on the entry of non Hindus in Jagannath Temple

Keywords: Jagannath Temple, Jagannath Temple entry rules, Jagannath Temple entry ban for non muslim, odisha puri temple, जगन्नाथ मंदिर, जगन्नाथ मंदिर प्रवेश नियम, गैर हिंदू, जगन्नाथ मंदिर प्रवेश प्रतिबंध

Awadhesh Mishra July 16, 2018
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TAGGED: hindu temple, Jagannath Temple, Odisha

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2 Comments
  • Avatar Anonymous says:
    April 16, 2026 at 7:30 pm

    आपने बहुत शोध करके देख लिखा है धन्यवाद संदीप जी। प्रश्न यह है कि हम किसी मस्जिद अथवा चर्च में घुसने की इजाजत कोर्ट से नहीं मांगते फिर हमारे सदियों पुराने मंदिर में घुसने की इजाजत ये क्यों मांग रहे हैं???

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  • Avatar Anonymous says:
    April 16, 2026 at 7:31 pm

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