India Speak Daily Bureau अमेरिका-ईरान युद्ध ने गैस और तेल नेटवर्क पर बहुत बुरा असर डाला है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरानी कब्जे के कारण तेल का पूरा वैश्विक ‘ईको सिस्टम’ गड़बड़ा गया है। ऐसे में हर देश तेल व गैस की समस्या से जूझ रहा है। सभी ईंधन जमा करने की कोशिश में हैं। ऐसे में ईरान से तेल से भरा कोई जहाज भारत के बंदरगाह पर आया और फिर भारत में तेल उतारने की जगह चीन चला गया, उस पर सवाल उठ रहे हैं!
ईरान से एक तेल का टैंकर चला भारत की तरफ, लेकिन अचानक उसने ठिकाना बदला और अब वह चीन जा रहा है? आखिर ऐसा क्या हुआ?
जानकारी के अनुसार, इस टैंकर में 6,00,000 बैरल कच्चा तेल था। इसे गुजरात के वडिनार बंदरगाह पहुंचना था। दुनिया भर में तेल और गैस की आवाजाही पर नजर रखने वाली कंपनी Kpler ने इस खबर की पुष्टि की है। कैपलर के अनुसार, भारत 60 दिश के क्रेडिट (उधार) पर तेल चाहता था, लेकिन ईरान ने मना कर दिया, जिसके बाद वह जहाज चीन की ओर मुड़ गया।

असल में अमेरिका के दबाव में भारत 2019 से ही ईरान से तेल खरीदना बंद कर चुका है। पहले ईरान भारत को क्रेडिट पर अर्थात् उधार में तेल देता था। यही नहीं, ईरान भारत से डॉलर की जगह भारतीय रुपया लेता था। यह रुपया भी भारतीय बैंकों में पड़ा रहता था, जिंसके एवज में ईरान भारत से खाद्यान्न, सामान आदि खरीदता था। एक आंकड़े के मुताबिक भारत के यूको बैंक में एक समय ईरान का 50-60000 करोड़ रुपया पड़ा था, जिससे भारत का ईको बैंक डूबने से बच गया था। इस पैसे के बदले वह भारत से भारतीय सामान का आयात करता था। यह एक तरह से पुराने जमाने के ‘बार्टर सिस्टम’ की तरह था, जिससे भारत को काफी लाभ पहुंच रहा था। ‘बार्टर सिस्टम’ में सामान के बदले सामान दिया जाता है, न कि नगदी।
जानने वाले यह भी कहते हैं कि ईरान तेल निर्यात पर भारत से ट्रांसपोर्टेशन चार्ज और बीमा शुल्क भी नहीं लेता था, जबकि अभी अमेरिका से तेल लेने पर भारत को काफी महंगा ट्रांसपोर्टेशन शुल्क चुकाना पड़ता है। लेकिन जिस तरह भारत ने अमेरिकी दबाव के आगे 2019 से ईरान से कच्चा तेल खरीदना बंद किया है, उसके बाद ईरान के रुख में यह बदलाव आया है, जो भारत से तेल टैंकर के वापस जाने के रूप में देखा जा सकता है।
Kpler से जुड़े सुमित रितोलिया का कहना है कि “‘लगता है यह पेमेंट की शर्तों में आए बदलाव से जुड़ा हुआ मामला है। अब तेल बेचनेवाले देशों ने शर्तों को कड़ा कर दिया है। Kpler के मुताबिक ये जहाज 29 अप्रैल तक चीन के बंदरगाह Dongying पहुँच जाएगा। यदि भारत पैसा दे, तो तेल अभी भी भारत को मिल सकता है।

ऐसा पागल प्रधानमंत्री मिला है हम लोगों को की सब लोगों को डुबोकर छोड़ेगा
राजा के कर्मों का फल प्रजा ही भुगतेगी!!