संदीप देव। समाजशास्त्र में ‘सफेदपोश अपराधी’ अर्थात् ‘व्हाइट कॉलर क्रिमिनल’ की अवधारणा कभी पढ़ी थी! आज भारत में अपराधी हिंदुओं के पवित्र भगवा (गेरुआ) वस्त्रों में खुलेआम घूम रहे हैं!
फिर याद आया! समाजशास्त्री मैक्स वेबर ने ‘सफेदपोश अपराध’ की अवधारणा तो बहुत बाद में दी थी। महर्षि वाल्मीकि ने तो रावण और कालनेमी के जरिए त्रेतायुग में ही समझा दिया था कि आततायी और अपराधी गेरुआ वस्त्र पहन कर भी आएंगे, इसलिए सावधान रहना!



दुःख की बात है कि महर्षि वाल्मीकि कृत रामायण को हिंदू लाल कपड़े में बांध कर भूल गया, जिस कारण आज राष्ट्र में ‘गेरुआ अपराधियों’ की भरमार हो रही हैं! हमें इन अपराधियों से अपने पवित्र गेरुआ/भगवा रंग को हर हाल में बचाना है!
