Indiaspeakdaily. प्रसिद्ध लेखिका, शिक्षाविद् और सामाजिक टिप्पणीकार मधु किश्वर के खिलाफ चंडीगढ़ पुलिस ने 19 अप्रैल 2026 को सेक्टर-26 थाने में FIR दर्ज की है। FIR का आधार एक चंडीगढ़ निवासी की शिकायत है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि मधु किश्वर समेत कुछ अन्य सोशल मीडिया यूजर्स ने एक फर्जी/डॉक्टर्ड वीडियो को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गलत पहचान देकर वायरल किया। इस वीडियो में अश्लील और भ्रामक शब्द जोड़े गए, जिससे संवैधानिक पद (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े) की छवि खराब करने की कोशिश की गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह गलती नहीं, बल्कि जानबूझकर किया गया काम था।
मधु किश्वर और कुछ अन्य सोशल मीडिया यूज़र्स के खिलाफ सेक्टर-26 पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। इन धाराओं में धारा 196, धारा 336 (1)और धारा 356 शामिल हैं।
चंडीगढ़ पुलिस के बयान के अनुसार, एक शिकायतकर्ता ने 19 अप्रैल को आरोप लगाया कि विभिन्न सोशल मीडिया यूजर्स द्वारा कुछ जाली और गुमराह करने वाली सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो क्लिप्स फैलाई जा रही हैं, जिनमें अश्लील टेक्स्ट और सामग्री है, और जिनमें वीडियो में दिख रहे व्यक्ति की गलत पहचान बताते हुए उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बताया जा रहा है, जो झूठ है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति एक ट्रैवल व्लॉगर है, जिसकी पत्नी नियमित रूप से सोशल मीडिया पर उनकी गतिविधियों के बारे में अपडेट पोस्ट करती रहती है। यह मूल वीडियो उसके सोशल मीडिया अकाउंट से ही शेयर किया गया था।
यह शायद वह वीडियो है, जिसमें एक दाढ़ी वाले व्यक्ति के चेहरे पर मसाज करती हुई एक महिला दिख रही है, जिसे गलतफहमी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समझ पर झूठी अफवाह सोशल मीडिया पर फैला दी गई थी।
इस बीच, मधु किश्वर ने कल रात सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में बताया कि चंडीगढ़ पुलिस की एक टीम सोमवार देर रात दिल्ली के सरिता विहार स्थित उनके कार्यालय पहुंची थी। उन्होंने स्पष्ट लिखा था कि रात में कोई पुलिस वाला बिना महिला कांस्टेबल के उनके घर में नहीं घुस सकता है। यही कारण है कि मंगलवार को सुबह पुलिस उनके घर पहुंची और उन्हें FIR की कॉपी थमाया, जैसा कि वीडियो में देखा जा सकता है।
मधु किश्वर ने एक्स पर कल रात पहला पोस्ट किया, “हमारे सिक्योरिटी गार्ड ने अभी मुझे बताया कि पाँच पुलिसकर्मी—जिनमें दो महिला पुलिसकर्मी भी शामिल हैं—मेरे ऑफ़िस पहुँचे हैं। चूँकि मैं एक वीडियो रिकॉर्ड कर रही थी, इसलिए मैंने उनसे थोड़ी देर इंतज़ार करने को कहा। लेकिन इतनी देर रात को उनका आना कोई अच्छा संकेत नहीं है। मुझे पता है कि किसी भी महिला को सूरज डूबने के बाद और सूरज उगने से पहले गिरफ़्तार नहीं किया जा सकता। न जाने उन्होंने मेरे लिए क्या सरप्राइज़ रखा है।”

उसके बाद उन्होंने दूसरा पोस्ट किया, “चूँकि कानून पुलिस को सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले महिलाओं से मिलने या उन्हें गिरफ़्तार करने से रोकता है, इसलिए मैंने पुलिस से फ़ोन पर बात की। उन्होंने मुझे बताया कि उनकी टीम चंडीगढ़ में मेरे ख़िलाफ़ दर्ज एक FIR के संबंध में नोटिस देने आई है। मैंने ज़ोर देकर कहा कि वे कानून का पालन करें और सुबह आएँ। दोनों पक्षों ने पूरी तरह से शिष्टाचार बनाए रखा। मेरे ख़िलाफ़ दर्ज ताज़ा मामले का विवरण—जो इस बार चंडीगढ़ में दर्ज हुआ है—मैं FIR की प्रति मिलते ही पोस्ट कर दूँगी।”

इसके बाद उन्होंने एक और पोस्ट किया, “जिस पल मुझे बताया गया कि देर रात आधा दर्जन पुलिसवाले मेरे दरवाज़े पर आ धमके हैं, मुझे तुरंत @ThePublicIndia की मोहतरमा नीलू व्यास की याद आई, क्योंकि मैं अच्छी तरह जानती हूँ कि उन्हें इस बात से बहुत ज़्यादा तसल्ली और खुशी मिलेगी कि चंडीगढ़ में मेरे खिलाफ़ एक और FIR दर्ज हो गई है।”
“मोहतरमा व्यास इस बात से बहुत परेशान रही हैं कि मेरे खिलाफ़ अभी तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई! ज़ाहिर है, उन्हें उम्मीद थी कि मुझे तुरंत तिहाड़ जेल में बाकी की ज़िंदगी के लिए बंद कर दिया जाएगा, या बस खत्म ही कर दिया जाएगा!”
“मोहतरमा, BJP शासित राज्यों में मेरे खिलाफ़ पहले से ही कई केस चल रहे हैं। मुझे अफ़सोस है कि मैं आपको मुझे डर से काँपते हुए और माफ़ी के लिए गिड़गिड़ाते हुए देखने की तसल्ली नहीं दे सकती!”
“यह अजीब है कि आपके चैनल के मालिकों ने आपको अभी तक यह नहीं सिखाया कि पत्रकारिता के पेशेवर उसूलों के मुताबिक, आपको किसी ऐसे व्यक्ति पर उसकी गैर-मौजूदगी में, उसकी बात सुने बिना, लगातार हमला नहीं करना चाहिए—खासकर तब, जब न तो आप और न ही आपके बुलाए गए पैनलिस्टों में से कोई मुझे जानता भी हो! लेकिन मुझे लगता है कि आपको ‘सुपारी पत्रकारिता’ की ट्रेनिंग मिली है!”
फिर भी, अगर कभी आप नैतिक पत्रकारिता के बुनियादी उसूल सीखना चाहें, तो कुछ महीनों के लिए ‘मानुषी’ के साथ इंटर्नशिप करने आ जाइए! तब तक, उन ‘परमानंद’ जैसी खुशियों का मज़ा लीजिए जो आपको अपने जैसे सोच वाले ‘टॉकिंग हेड्स’ (चर्चा करने वालों) के साथ हर शो में मेरी बुराई करके मिल रही हैं—जो इस बारे में मनगढ़ंत कहानियाँ गढ़ रहे हैं कि मैं इतनी बेखौफ़ होकर क्यों बोल रही हूँ। उनकी और आपकी, कल्पना शक्ति की कमी पर मुझे तरस आती है!

बेरोज़गार पत्रकारों के साथ मिलकर एक ‘बदनीयत इको चैंबर’ बनाने के लिए आपको बधाई—जिनमें से किसी में भी इतनी समझ नहीं है कि वे आपको सलाह दें कि आपको मेरी पीठ पीछे बुराई करने के बजाय, मुझसे सीधे सवाल पूछने चाहिए।”
मधु आगे लिखती हैं, “अब आप समझ गए होंगे कि ‘सुपारी पत्रकारिता’ के शिकार लोगों ने ‘प्रेसटीट्यूट्स’ (Presstitutes) शब्द क्यों गढ़ा था! @ThePublicIndia, कृपया मेरी इस राय पर गौर करें!”
बता दूं कि नीलू व्यास एक वामपंथी विचारधारा की पत्रकार हैं, जो अकसर मोदी सरकार पर हमलावर रहती हैं, परंतु इस समय वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करनी वाली मधु किश्वर की गिरफ्तारी चाहती हैं! गजब संयोग है! असल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ताकत ही वामपंथी मीडिया और पत्रकारों का वह झुंड रहा है जो उन पर हमलावर रहता है, जिसके विरोध में हिंदू एकजुट होकर मोदी को वोट करते हैं। यह गुजरात में उनके मुख्यमंत्रिवकाल से ही चल रहा है। मधु किश्वर यहां उसी नीलू व्यास की बात कर रही हैं।
हालांकि वह अपने अगले ही पोस्ट में लिखती हैं कि “मैंने अपनी पूरी ज़िंदगी में नीलू व्यास से न कभी मुलाक़ात की है और न ही कभी उनसे बातचीत की है।चूँकि मैं सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर नज़र रखने में ज़्यादा समय नहीं बिताती, इसलिए मुझे उनके अस्तित्व के बारे में तब तक पता भी नहीं चला, जब तक उन्होंने मेरे ऊपर एक के बाद एक वीडियो बनाना शुरू नहीं कर दिया।”

वह लिखती हैं, “मुझे लगता है कि सभी कमज़ोर इरादों वाली महिलाएं उन महिलाओं से बहुत ज़्यादा असुरक्षित महसूस करती हैं, जो अपनी शर्तों पर ज़िंदगी जीती हैं और अपनी हैसियत के लिए किसी ‘शुगर डैडी’ या ‘गॉडफ़ादर’ की मोहताज नहीं होतीं!’
ज्ञात हो कि मधु किश्वर इन दिनों बहुत चर्चा में हैं। उन्होंने एप्सटीन फाईल को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला किया है। यही नहीं, अपने एक पोस्ट में वह मोदी को उनके आसपास की महिलाओं से जोड़ कर उन पर चारित्रिक लांक्षण भी लगाती हैं। एक पोस्ट में वह एक अधिकारी का जिक्र करते हुए लिखती हैं कि मनमोहन सिंह के पास भी नरेंद्र मोदी की फाइल थी, जिस कारण नरेंद्र मोदी ने मनमोहन सिंह के समय के उस नौकरशाह को अपने PMO में स्थान दिया। मधु किश्वर ने भाजपा IT cell प्रमुख अमित मालवीय पर ‘पोर्न पैडलर’ का आरोप भी लगाया है और अमित मालवीय का पुराना ट्वीट जनता के बीच सार्वजनिक किया है।
यही कारण है कि मधु किश्वर इस समय सोशल मीडिया पर सर्वाधिक चर्चा में हैं। चंडीगढ़ में प्रसिद्ध लेखिका और शैक्षणिक कार्यकर्ता मधु किश्वर के विरुद्ध दर्ज प्राथमिकी (FIR) और उसके बाद दिल्ली स्थित उनके कार्यालय पर पुलिस की दस्तक ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर सूचनाओं की प्रमाणिकता और डिजिटल नैतिकता के सवाल को केंद्र में ला दिया है।
यह मामला केवल एक ‘गलत पोस्ट’ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सूचना के लोकतंत्रीकरण के युग में ‘तथ्य की जांच’ (Fact-checking) और ‘प्रसार की मंशा’ के बीच की धुंधली रेखा को रेखांकित करता है।
आज के दौर में सूचना केवल ज्ञान का साधन नहीं है, बल्कि यह एक राजनीतिक और सामाजिक हथियार भी बन चुकी है। मधु किश्वर जैसे बौद्धिक व्यक्तित्व, जिनका समाज में एक विशिष्ट स्थान और प्रभाव है, जब किसी सूचना को साझा करते हैं, तो उसकी ‘विश्वसनीयता’ (Credibility) स्वतः बढ़ जाती है।
लेखिका के रूप में मधु किश्वर ने दशकों तक मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक विसंगतियों पर कलम चलाई है। किंतु, जब डिजिटल स्पेस में सृजनशीलता का स्थान ‘वायरल कल्चर’ ले लेता है, तो वहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और तथ्यों की बलि चढ़ने के मुद्दे के बीच एक संघर्ष छिड़ जाता है।
मधु किश्वर पर हुई यह कार्रवाई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रहार है या फिर डिजिटल उत्तरदायित्व (Digital Accountability) का तकाजा, यह न्यायालय के विमर्श का विषय है।
