संदीप देव । ‘मानसिक गुलामी’ किसे कहते हैं, यह मैं कुछ संघी-सरकारी हिंदुओं की पोस्ट में देख रहा हूं। यह सरकारी हिंदू लिख रहे हैं कि दुनिया में युद्ध चल रहा है, हमें अपने नेतृत्व का धन्यवाद करना चाहिए कि हम शांति से रह रहे हैं! जब एक व्यक्ति की चेतना मर जाती है और वह मानसिक गुलामी को ओढ़ लेता है तो फिर अपनी गुलामी को ही जीवन मानने लगता है!
इस गुलामों के लिए कुछ तथ्य इस प्रकार हैं:-
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