संदीपदेव। एक मित्र ने मुझसे पूछा कि यह ‘तुगलकी फरमान’ मुहावरे का क्या अर्थ है? इसका इतिहास क्या है? और आज भी इस मुहावरे का उपयोग क्यों किया जाता है? उन और उन जैसे सभी जिज्ञासु मित्रों के लिए यह रहा ‘तुगलकी फरमान’ मुहावरे का ऐतिहासिक संदर्भ:-
दिल्ली सल्तनत के सुल्तान मोहम्मद बिन तुगलक (1325-1351) के सनकी और असफल फैसलों के लिए इतिहास प्रसिद्ध है। इसीलिए ‘तुगलकी फरमान’ का मुहावरा प्रचलित हो गया।
*मोहम्मद बिन तुगलक के असफल फैसले के ऐतिहासिक उदाहरण जिससे ‘तुगलकी फरमान’ का मुहावरा प्रचलित हुआ:-
१) राजधानी स्थानांतरण: 1327 में दिल्ली से 700 मील दूर दौलताबाद (महाराष्ट्र) राजधानी ले जाना और फिर वापस दिल्ली लौटना, जिससे रास्ते में असंख्य जनता मारी गई।
२) मुद्रा बदलना: चांदी के बजाय तांबे के सिक्के चलाना, जिससे नकली मुद्रा की भरमार हो गई।
३) कर वृद्धि: दोआब (गंगा-यमुना क्षेत्र) में टैक्स 50% तक बढ़ाना, जिससे अकाल पड़ा और जनता त्राहि-त्राहि करके मरी।
*तुगलकी फरमान की मुख्य विशेषताएं, जिसके लिए यह मुहावरा आज भी प्रयुक्त होता है:-
१) अव्यावहारिक (Impractical) फैसले: ऐसे आदेश जो जमीनी हकीकत से कोसों दूर होते हैं।
२) सनकभरे फैसले: तर्क के बजाय सुल्तान (या नेता) की सनक पर आधारित फैसले।
३) विनाशकारी परिणाम: इन फैसलों से अकसर आम जनता को बड़ी आर्थिक, सामाजिक एवं अन्य तरह की हानि होती है।
४) अचानक लागू करना: ऐसे फैसले बिना तैयारी के रातों-रात लागू कर घोषणा कर दिए जाते हैं।
नोट:- यही कारण है कि आज के समय में जब कोई सरकार या अधिकारी ऐसा नियम लागू करता है जिससे आम जनता को अचानक भारी समस्या का सामना करना पड़े, तो उसे ‘तुगलकी फरमान’ कहा जाता है।
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