संदीप देव। चुनौती मुझे हमेशा से प्रेरित करती रही है। एक ‘बाईपोलर’ मनोरोगी ‘शकाचार्य’ ने मुझ पर खूब हमला किया कि मैं ओशो का चेला हूं। आजकल वह मुझ पर फिर हमलावर है। यदि मेरा नाम न ले तो, न उसकी सुबह होती है और न ही शाम! मैंने उस पर बोलना या लिखना बंद कर दिया है, क्योंकि उसके जीवन के इतने घिनौने पक्षों से मैं अवगत हो चुका हूं कि उस पर बोलना उबकाई के समान है!
हालांकि मनुस्मृति के अनुसार उस ‘शकाचार्य’ को किसी भी भारतीय को उपदेश देने का अधिकार नहीं है। परंतु यह कलियुग है और यहां पैसा देकर फर्जी ‘जगतगुरु’ बनने की होड़ है। वह ‘शकाचार्य’ भी ‘जगतगुरु’ की उपाधि बाजार से खरीद लाया है, तो हमारे धर्म के आधार स्तंभों में से एक मनुस्मृति के विपरीत जाकर वह भारतीयों को उपदेश भी दे रहा है और धंधा भी चला रहा है। अब जब हिंदू वोट से सत्ता में पहुंचे संघी खुलेआम मंदिर तोड़ और राम मंदिर लूट रहे हों तो छोटे-मोटे धंधेबाज भी इस धंधे के नाले में छप-छई-छप कर रहे हों तो फिर कौन रोकने वाला है?
मनोरोगी ‘शकाचार्य’ ने वर्षों से मेरे ऊपर ‘ओशो का चेला’ कह कर हमला कर रखा है। फिर मैंने सोचा क्यों न ओशो की जीवनी पर बात की जाए। सारे यूट्यूब चैनल मैंने खंघाले, लेकिन ओशो के विवादास्पद, अमेरिका में बसे रजनीशपुरम आदि को लेकर तो वीडियो है, परंतु उनके पूर्व जन्म से लेकर इस जन्म के बचपन से मृत्यु तक कहीं भी सिस्टेमैटिक जीवनी अभी तक वीडियो के रूप में उपलब्ध नहीं है। फिर मैंने यह चुनौती स्वीकार की और धीरे-धीरे इसे दर्शकों का प्रेम भी मिलने लगा।

उस ‘बाईपोलर’ ‘शकाचार्य’ ने सोचा था कि मैं बैकफुट पर जाऊंगा, परंतु बचपन से ही मुझे ‘फ्रंटफुट’ खेलने की आदत है तो फिर बैकफुट पर जाने का सवाल ही नहीं उठता!
मैं इस जीवनी पर अभी तक ११ एपिसोड कर चुका हूं और अभी ओशो के स्कूली जीवन तक पहुंचा हूं। विश्वास कीजिए, ज्यों-ज्यों यह श्रृंखला आगे बढ़ेगी, ओशो के जीवन से जुड़े सारे विवाद को मैं ज्यों का त्यों रखूंगा। कुछ भी नहीं छुपाऊंगा। जहां आलोचना करनी होगी, वहां आलोचना भी करूंगा और जहां प्रशंसा करनी होगी, वहां प्रशंसा भी करूंगा। इस सदी के सर्वाधिक विवादास्पद धर्मगुरु के बारे में संपूर्ण सत्य से अवगत होने का सभी को अधिकार है और एक पत्रकार के नाते इसे उपलब्ध कराना मेरा कर्तव्य है।
आज ‘ठग्गी गुरु’, ‘अचार अशांत’ आदि जैसे तथाकथित उपदेशक व धर्म गुरु ओशो साहित्य को चुरा-चुरा कर और उसे अपने नाम से पेश कर अपना ‘अधार्मिक साम्राज्य’ खड़ा चुके हैंं, ऐसे में इनके ‘मूल मास्टर’ के बारे में जानने का हक तो इनके अनुचरों को भी है!
इस श्रृंखला को करने का एक लाभ मुझे भी मिला कि मेरे लिए समाजशास्त्र का रिवीजन हो रहा है। ओशो की जीवनी मनोवैज्ञानिक, आध्यात्मिक, समाजशास्त्रीय और रहस्य के धरातल पर खड़ा है। तो इस पर श्रृंखला करने से इतने सारे आयामों से मुझे गुजरना पड़ता है, जिससे मेरा मस्तिष्क एक एनकाउंटर स्थिति में आ जाता है, जो दिमागी कसरत के लिए बहुत आवश्यक है।
तो जिनको रुचि है सदी के सबसे विवादास्पद धर्मगुरु के जीवन और विचारों में, वो यह श्रृंखला प्रत्येक रात्रि 9 बजे यूट्यूब चैनल पर JWSD की-वर्ड सर्च कर देख सकते हैं।
मेरा मानना है कि किसी चीज से भागिए मत, उसका आंख में आंख डालकर सामना कीजिए, फिर वो आपके विकास में सहायक होता है। आज के युग में ओशो ने ही सबसे पहले विचार दिया था,”भागो मत, जागो”- यही आपको मुठभेड़ के लिए तैयार करता है। और मुठभेड़ मुझे भी हमेशा सजग और तैयार रखता है। धन्यवाद।
